CJI सूर्यकांत की कॉकरोच टिप्पणी पत्रकार सौरव दास को निशाना बनाकर की गई थी
CJI सूर्यकांत की "कॉकरोच" टिप्पणी पत्रकार सौरव दास पर थी, पार्टी के संस्थापक का दावा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापकों का दावा है कि CJI सूर्यकांत की विवादित टिप्पणी पत्रकार सौरव दास को निशाना बनाकर
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापकों का दावा है कि CJI सूर्यकांत की विवादित टिप्पणी पत्रकार सौरव दास को निशाना बनाकर की गई थी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के विस्फोटक दावों के मुताबिक, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने "कॉकरोच" शब्द का इस्तेमाल खासतौर पर पत्रकार सौरव दास के लिए किया था।
यह विवाद अदालत की कार्यवाही के दौरान की गई एक टिप्पणी को लेकर है, जिसने बेरोजगारी और युवाओं पर न्यायिक टिप्पणियों को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी।
निशाना बनाने का आरोप
न्यूज 24 से बात करते हुए दीपके ने साफ तौर पर कहा कि "जो कॉकरोच शब्द इस्तेमाल किया गया था वो सौरव के लिए था क्योंकि उस वक्त वो सबसे ज्यादा लिख रहे थे"। दास, जो CJP के चीफ स्पोक्सपर्सन हैं और मुख्य रूप से कानून और जजों पर लिखते हैं, ने इस बात की पुष्टि की।
दास ने बताया कि उस वक्त कई वकीलों और रिटायर्ड जजों ने उन्हें संपर्क किया और कहा कि यह टिप्पणी उन्हीं पर की गई थी। यह तब हुआ जब वो कारवां मैगजीन के लिए जस्टिस सूर्यकांत पर एक प्रोफाइल पीस तैयार कर रहे थे और अपनी रिसर्च के सिलसिले में कई राइट टू इंफॉर्मेशन एप्लीकेशन दाखिल कर चुके थे। इससे पहले उन्होंने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ पर भी ऐसे प्रोफाइल लिखे थे।
CJI ने असल में क्या कहा था
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि जो युवा अपने पेशे में नौकरी नहीं पा सकते, वे मीडिया के लोग या RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर "सिस्टम पर हमला करते हैं"। "कॉकरोच" शब्द और "परजीवी" का जिक्र इसी संदर्भ में सामने आया।
शुरू में इन टिप्पणियों को भारत के बेरोजगार युवाओं की आलोचना के तौर पर लिया गया, जिससे व्यापक विरोध हुआ। जस्टिस सूर्यकांत ने बाद में अदालत में स्पष्ट किया कि मीडिया के कुछ हिस्सों ने उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया था।
CJI ने समझाया, "मैं यह पढ़कर दुखी हुआ कि सुनवाई के दौरान मीडिया के एक हिस्से ने मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया। मैंने उन लोगों की आलोचना की थी जो नकली और धोखाधड़ी वाली डिग्रियों की मदद से कानून जैसे क्षेत्रों में घुस गए"। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे प्रतिष्ठित पेशों में भी घुस गए हैं, जो उन्हें "परजीवी की तरह" बनाता है, और जोर देकर कहा कि यह कहना बेबुनियाद है कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की।
विवाद से राजनीतिक आंदोलन तक
यह न्यायिक टिप्पणी एक अनोखी राजनीतिक घटना की वजह बन गई। टिप्पणी सामने आने के बाद दीपके ने X पर पोस्ट किया, "अगर सारे कॉकरोच इकट्ठा हो जाएं तो क्या होगा?"। यह ट्वीट वायरल हो गया, जिसके बाद उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से X और इंस्टाग्राम हैंडल बनाए।
चार दिनों के भीतर इंस्टाग्राम अकाउंट को करीब 25 मिलियन फॉलोअर्स मिल गए, जिससे दीपके राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए। इसके बाद वो अमेरिका से भारत आए और NEET पेपर लीक विवाद के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया।
पार्टी के गठन ने न्यायिक आलोचना से शुरू हुई चीज को एक ऐसे प्लेटफॉर्म में बदल दिया जिसने लाखों फॉलोअर्स को आकर्षित किया है, जो दिखाता है कि डिजिटल युग में कोर्टरूम की बहस कैसे व्यापक राजनीतिक लामबंदी की चिंगारी बन सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CJI सूर्यकांत की 'कॉकरोच' टिप्पणी किसके लिए थी?
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का दावा है कि यह टिप्पणी पत्रकार सौरव दास को निशाना बनाकर की गई थी, जो उस समय CJI सूर्यकांत पर एक प्रोफाइल पीस लिख रहे थे और कई RTI एप्लीकेशन दाखिल कर चुके थे।
CJI ने असल में अपनी टिप्पणी में क्या कहा था?
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि जो युवा अपने पेशे में नौकरी नहीं पा सकते, वे मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सिस्टम पर हमला करते हैं। 'कॉकरोच' और 'परजीवी' शब्द इसी संदर्भ में आए थे।
CJI ने अपनी टिप्पणी के बारे में बाद में क्या स्पष्ट किया?
CJI ने कहा कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना नहीं की थी, बल्कि उन लोगों की आलोचना की थी जो नकली डिग्रियों की मदद से कानून जैसे क्षेत्रों में घुस गए हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों ने उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया।
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत कैसे हुई?
इस न्यायिक टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके ने X पर 'अगर सारे कॉकरोच इकट्ठा हो जाएं तो क्या होगा?' पोस्ट किया। यह ट्वीट वायरल हुआ, जिसके बाद उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से X और इंस्टाग्राम हैंडल बनाए। चार दिनों में इंस्टाग्राम को 25 मिलियन फॉलोअर्स मिल गए।
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