रीना रामटेके की पहल से छत्तीसगढ़ के गांवों में डिजिटल जागरूकता बढ़ी
सोशल मीडिया की सही-गलत पहचान सिखाकर रीना बदल रही गांव की तस्वीर छत्तीसगढ़ के गांवों में डिजिटल बदलाव की पहल, रीना रामटेके की मेहनत लाई रंग छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कई गांवों में
सोशल मीडिया की सही-गलत पहचान सिखाकर रीना बदल रही गांव की तस्वीर
छत्तीसगढ़ के गांवों में डिजिटल बदलाव की पहल, रीना रामटेके की मेहनत लाई रंग
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कई गांवों में बच्चे अब सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और भ्रामक कंटेंट की पहचान करना सीख गए हैं। ये बदलाव रीना रामटेके और उनके संगठन 'नव निर्माण चेतना मंच' की कोशिशों का नतीजा है। रीना, जो गरियाबंद की रहने वाली हैं, अपने जागरूकता अभियान के जरिए बच्चों, महिलाओं और गांव के लोगों को डिजिटल दुनिया में जिम्मेदारी से कदम रखने की सीख दे रही हैं।
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इंटरनेट का सही इस्तेमाल सिखाने की पहल
रीना और उनकी टीम गांव-गांव जाकर बच्चों और उनके माता-पिता को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके बता रही हैं। वह ऑनलाइन कंटेंट पर भरोसा करने और फेक न्यूज से बचने के महत्व पर जोर देती हैं। मोबाइल फोन अब हर जगह, खासकर बच्चों के बीच आम हो गया है। रीना के वर्कशॉप्स में फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और एक्स (पहले ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स के सही इस्तेमाल के साथ-साथ साइबर फ्रॉड, फेक लिंक, ओटीपी स्कैम और ऑनलाइन सुरक्षा के उपाय भी सिखाए जाते हैं।
इस पहल का असर साफ दिख रहा है। इलाके में साइबर फ्रॉड के मामलों में कमी आई है और गांववाले अब संदिग्ध मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। रीना की कोशिशों ने डिजिटल सतर्कता की संस्कृति को बढ़ावा दिया है, जिससे गांववाले ऑनलाइन खतरों से निपटने में सक्षम हो रहे हैं।
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महिलाओं को डिजिटल साक्षरता से सशक्त बनाना
रीना की पहल सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को भी डिजिटल साक्षरता के जरिए सशक्त बनाया है। उनकी टीम ने महिलाओं को मोबाइल बैंकिंग, केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने और ऑनलाइन लेनदेन करना सिखाया है। इस ज्ञान ने महिलाओं को वन अधिकार समितियों में फैसले लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाया है। जो महिलाएं पहले मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से हिचकिचाती थीं, अब वे आत्मविश्वास के साथ डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं।
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संघर्ष से शुरू हुआ सफर
रीना की समाज सेवा की प्रेरणा उनके खुद के संघर्षों से आई। जमीन विवाद के चलते उनके परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें समाज में भेदभाव खत्म करने और जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। आर्थिक चुनौतियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने सेवा का रास्ता चुना और डिजिटल साक्षरता को बदलाव का माध्यम बनाया।
रीना की कहानी यह साबित करती है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकती हैं। वह आत्मनिर्भरता का समर्थन करती हैं और महिलाओं को अपनी राह खुद बनाने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि शिक्षा, तकनीक और आत्मविश्वास एक मजबूत और सशक्त समाज की नींव हैं।
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बदलाव की मिसाल
रीना रामटेके की पहल दिखाती है कि जमीनी स्तर पर किए गए प्रयास डिजिटल खाई को पाट सकते हैं। जागरूकता फैलाकर और समुदायों को जरूरी डिजिटल कौशल सिखाकर, वह न सिर्फ गलत जानकारी से लड़ रही हैं बल्कि लोगों को अपने भविष्य की जिम्मेदारी लेने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं। उनका काम ग्रामीण भारत में शिक्षा के जरिए बदलाव की प्रेरणादायक मिसाल है।
स्रोत: Patrika
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रीना रामटेके कौन हैं?
रीना रामटेके छत्तीसगढ़ की एक समाजसेवी हैं, जो डिजिटल जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं।
रीना की पहल से गांवों में क्या बदलाव आया है?
उनकी पहल से गांवों में बच्चे फेक न्यूज और भ्रामक कंटेंट की पहचान करना सीख गए हैं।
रीना की टीम किस तरह की जानकारी देती है?
रीना की टीम बच्चों और माता-पिता को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और ऑनलाइन सुरक्षा के उपाय सिखाती है।
महिलाओं को डिजिटल साक्षरता का क्या फायदा हुआ है?
महिलाएं अब मोबाइल बैंकिंग, केवाईसी और ऑनलाइन लेनदेन में सक्षम हो गई हैं, जिससे वे निर्णय लेने में सशक्त हुई हैं।
रीना की प्रेरणा का स्रोत क्या है?
उनकी प्रेरणा उनके खुद के संघर्षों से आई है, जिसमें सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक चुनौतियां शामिल हैं।
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