छत्तीसगढ़ ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल पास किया
छत्तीसगढ़ में कारोबार को बढ़ावा देने वाला बिल पास छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी।
छत्तीसगढ़ में कारोबार को बढ़ावा देने वाला बिल पास
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी। यह कदम राज्य में व्यापार संचालन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने रिस्क और ट्रस्ट आधारित बिजनेस परमिशन सिस्टम अपनाया है।
एमएसएमई के लिए व्यापार प्रक्रियाएं होंगी आसान
यह कानून खासतौर पर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) के लिए प्रक्रियागत अड़चनों को कम करने, अनुपालन को सरल बनाने और एक पारदर्शी, निवेशक-फ्रेंडली माहौल बनाने के लिए लाया गया है। अब बिजनेस को उनके साइज और रिस्क प्रोफाइल के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। कम जोखिम वाले कारोबार को जल्दी मंजूरी मिलेगी, जबकि हाई-रिस्क प्रोजेक्ट्स पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
मंजूरी के तरीकों में बड़ा बदलाव
बिल के तहत आठ विभागों की 43 सेवाओं को रिस्क आधारित अप्रूवल फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। इसे आगे बढ़ाने के लिए कार्यकारी परिषद की मंजूरी से और सेवाएं जोड़ी जा सकती हैं। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन-स्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है। इसमें राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति और जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता वाली समितियां शामिल हैं। इन सभी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता वाली काउंसिल का मार्गदर्शन मिलेगा।
15 लाख से ज्यादा एमएसएमई को होगा फायदा
सरकार का अनुमान है कि इस सुधार से 15 लाख से ज्यादा एमएसएमई को सीधे फायदा होगा। कारोबार शुरू करने और चलाने में लगने वाले समय और खर्च दोनों में कमी आएगी। हालांकि, हाई-रिस्क सेक्टर्स के लिए सख्त निगरानी भी जारी रहेगी। यह कदम छत्तीसगढ़ को एक निवेश-फ्रेंडली और भरोसेमंद डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत करेगा।
विधानसभा में मिली-जुली प्रतिक्रिया
वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने यह बिल पेश किया, जिसे चर्चा के बाद आंशिक संशोधन के साथ पास कर दिया गया। बीजेपी नेताओं, जिनमें पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर भी शामिल हैं, ने इसे एक ऐतिहासिक सुधार बताया। वहीं, कांग्रेस विधायक डलेश्वर साहू ने बिल पेश करने से पहले पर्याप्त विचार-विमर्श और सलाह-मशविरा न होने पर सवाल उठाए।
यह विधायी पहल एमएसएमई के लिए मजबूत कारोबारी माहौल बनाने के साथ-साथ हाई-रिस्क इंडस्ट्रीज के लिए रेगुलेटरी निगरानी बनाए रखने की छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाती है।
स्रोत: The Hindu
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