आंध्र प्रदेश को 20,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करने की उम्मीद
आंध्र सरकार को 20,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद, रेयर अर्थ मिनरल प्रोसेसिंग सेक्टर पर फोकस: मंत्री आंध्र प्रदेश सरकार टाइटेनियम स्पॉन्ज, टाइटेनियम मेटल और रेयर अर्थ व एडवांस मिनरल प्रोसेसिंग से जुड़ी
आंध्र सरकार को 20,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद, रेयर अर्थ मिनरल प्रोसेसिंग सेक्टर पर फोकस: मंत्री
आंध्र प्रदेश सरकार टाइटेनियम स्पॉन्ज, टाइटेनियम मेटल और रेयर अर्थ व एडवांस मिनरल प्रोसेसिंग से जुड़ी इंडस्ट्रीज स्थापित करने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार कर रही है। इस पहल के जरिए 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य है। ये जानकारी एक्साइज, माइंस और जियोलॉजी मंत्री कोल्लू रविंद्र ने दी।
सचिवालय में मीडिया से बात करते हुए कोल्लू रविंद्र ने बताया कि तमिलनाडु के बाद आंध्र प्रदेश में भारत का दूसरा सबसे बड़ा बीच सैंड मिनरल डिपॉजिट है। राज्य के तटीय इलाकों में इल्मेनाइट, रूटाइल, ज़िरकॉन, गार्नेट और टाइटेनियम जैसे कीमती मिनरल्स मौजूद हैं, जिनकी ग्लोबल मार्केट में भारी मांग है। इन संसाधनों का सही इस्तेमाल कर संपत्ति बनाने की कोशिश हो रही है।
मंत्री ने कहा कि राज्य की पारदर्शी नीतियों और सुधारों ने बड़ी कंपनियों का ध्यान खींचा है। इनमें जेएसडब्ल्यू स्टील, वेदांता, हिंदुस्तान जिंक, अंबुजा सीमेंट, श्री सीमेंट, डालमिया सीमेंट और जेके सीमेंट जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनके निवेश से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा, इंडस्ट्रियल ग्रोथ तेज होगी और हजारों नौकरियां पैदा होंगी।
रेयर अर्थ मिनरल्स के अलावा, आंध्र प्रदेश अन्य प्रमुख माइनिंग प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम कर रहा है। अनंतपुर जिले के जोंनागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट में 13 टन सोने का भंडार है और यहां जल्द ही कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने वाला है। चित्तूर जिले के 17 मिनरल ब्लॉक्स में आयरन ओर और चूना पत्थर की खोज भी जारी है।
एपी माइनर मिनरल पॉलिसी-2025 के तहत राज्य में निवेश और रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई है। पिछले दो सालों में 1,700 से ज्यादा माइनिंग लाइसेंस के लिए आवेदन मिले, जिनमें से 172 को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, 21 मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की गई, जिससे 11 माइनिंग लीज और 10 कंपोजिट लाइसेंस जारी किए गए।
सरकार ने फ्री सैंड पॉलिसी के तहत रेत खनन में भी बड़ी प्रगति की है। 412 डिस्पैच सेंटर्स और 238 स्टॉकयार्ड्स के जरिए 1.9 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा रेत सप्लाई की गई। अवैध खनन रोकने के प्रयासों से 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की डिमांड नोटिस जारी की गई है।
आगे के लिए, गोल्ड माइनिंग के नए अवसरों की तलाश की जा रही है। चित्तूर जिले के चिगुरुगुंटा, अनंतपुर के रामगिरी और विशाखापट्टनम के कुछ इलाकों में सोने की संभावनाओं पर काम चल रहा है।
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