आंध्र प्रदेश ने AYUSH सेक्टर के लिए ₹257 करोड़ की मदद मांगी
आंध्र प्रदेश ने AYUSH सेक्टर को मजबूत करने के लिए ₹257 करोड़ की केंद्रीय मदद मांगी: स्वास्थ्य मंत्री आंध्र प्रदेश सरकार ने नेशनल आयुष मिशन के तहत 2026-27 के वित्तीय साल के लिए अपने वार्षिक कार्य
आंध्र प्रदेश सरकार ने नेशनल आयुष मिशन के तहत 2026-27 के वित्तीय साल के लिए अपने वार्षिक कार्य योजना में ₹257 करोड़ की मांग की है। यह फंड राज्य में आयुष के इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होगा। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने गुरुवार को दी।
संयुक्त अस्पताल और कॉलेज की योजना
विजयवाड़ा में आयुष प्रैक्टिशनर्स के एक सम्मेलन में बोलते हुए यादव ने बताया कि छह जगहों, तिरुपति, गिद्दालुर, नंदीगामा, तेनाली, टेक्काली और रामपचोडावरम, में संयुक्त आयुष अस्पताल बनाने की योजना है। हर अस्पताल पर ₹15 करोड़ खर्च होंगे। इसके अलावा, धर्मावरम और पिथापुरम में आयुर्वेद कॉलेज और प्रोड्डटूर में यूनानी कॉलेज बनाने के लिए ₹210 करोड़ का बजट रखा गया है।
विशाखापट्टनम में ₹70 करोड़ की लागत से बन रहा नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज लगभग पूरा हो चुका है। साथ ही, आयुष हेल्थ मंदिरों के लिए नई बिल्डिंग्स का काम भी अंतिम चरण में है। ये सभी पहल राज्यभर में आयुष सुविधाओं को बढ़ाने की सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती हैं।
भर्ती और सर्जिकल मंजूरी
2024 से अब तक 216 आयुष डॉक्टरों की भर्ती की जा चुकी है, ताकि इस सेक्टर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जा सके। सरकार ने आयुर्वेद में 58 सर्जिकल प्रक्रियाओं को भी मंजूरी दी है। हालांकि, इन्हें लागू करने से पहले हितधारकों से चर्चा और जनता में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
पिछली सरकार की आलोचना
यादव ने मौजूदा सरकार के प्रयासों की तुलना पिछली टीडीपी-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार से की। उन्होंने बताया कि 2024-25 में ₹85 करोड़ और 2025-26 में ₹166 करोड़ की मदद नेशनल आयुष मिशन के तहत मिली थी। उन्होंने वाईएसआरसीपी सरकार पर आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में पर्याप्त केंद्रीय मदद हासिल करने में नाकामी रही।
एलोपैथी और आयुष: पूरक भूमिका
मंत्री ने साफ किया कि आयुष को बढ़ावा देने का मतलब एलोपैथी को कमजोर करना नहीं है। आपातकालीन इलाज और जटिल सर्जरी के लिए एलोपैथी बेहद जरूरी है। यह संतुलित दृष्टिकोण सरकार की समग्र स्वास्थ्य सेवा विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
क्यों है यह अहम
₹257 करोड़ का यह प्रस्ताव आंध्र प्रदेश की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध और नेचुरोपैथी जैसी पारंपरिक पद्धतियों को बढ़ावा देना शामिल है। संयुक्त अस्पताल, उन्नत कॉलेज और बेहतर भर्ती प्रक्रिया के जरिए राज्य का लक्ष्य है कि वैकल्पिक चिकित्सा को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए और एलोपैथिक स्वास्थ्य सेवाओं को इसका पूरक बनाया जाए।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आंध्र प्रदेश को AYUSH सेक्टर के लिए कितनी केंद्रीय मदद चाहिए?
आंध्र प्रदेश ने नेशनल आयुष मिशन के तहत 2026-27 के वित्तीय साल के लिए ₹257 करोड़ की केंद्रीय मदद मांगी है। यह फंड राज्य में आयुष के इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होगा।
कौन-कौन से शहरों में संयुक्त आयुष अस्पताल बनाने की योजना है?
तिरुपति, गिद्दालुर, नंदीगामा, तेनाली, टेक्काली और रामपचोडावरम में संयुक्त आयुष अस्पताल बनाने की योजना है। हर अस्पताल पर ₹15 करोड़ खर्च होंगे।
आयुर्वेद और यूनानी कॉलेज कहां बनाए जाएंगे?
धर्मावरम और पिथापुरम में आयुर्वेद कॉलेज और प्रोड्डटूर में यूनानी कॉलेज बनाए जाएंगे। इन कॉलेजों के लिए ₹210 करोड़ का बजट रखा गया है।
2024 से अब तक कितने आयुष डॉक्टरों की भर्ती हुई है?
2024 से अब तक 216 आयुष डॉक्टरों की भर्ती की जा चुकी है ताकि आयुष सेक्टर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जा सके।
क्या आयुष को बढ़ावा देने का मतलब एलोपैथी को कमजोर करना है?
नहीं। स्वास्थ्य मंत्री ने साफ किया कि आयुष को बढ़ावा देने का मतलब एलोपैथी को कमजोर करना नहीं है। आपातकालीन इलाज और जटिल सर्जरी के लिए एलोपैथी बेहद जरूरी है।
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