अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को दिया खतरों को पहले ही खत्म करने का निर्देश
गृह मंत्री अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो सम्मेलन में सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे उभरती चुनौतियों को पहचानकर बड़े संकट बनने से पहले खत्म करें।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसा तरीका अपनाएं जो खतरों को पहचानकर उन्हें बड़े संकट बनने से पहले ही खत्म कर दे। उन्होंने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारी को देश के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य से जोड़ा।
मंगलवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र में बोलते हुए शाह ने मंच से कहा कि अगले 15 से 20 साल के रुझानों का अध्ययन करें और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाएं। उन्होंने कहा, "हमें चुनौतियों को पहले से पहचानना होगा और उन्हें बड़ी समस्या बनने से पहले खत्म करना होगा।" उन्होंने एक ऐसा माहौल बनाने की बात कही जो सुरक्षित, घुसपैठिए-मुक्त और नशा-मुक्त भारत दे।
सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवेश
गृह मंत्री ने बताया कि उन्होंने पिछले आठ महीनों में सभी स्थलीय सीमा वाले राज्यों का दौरा किया है और चार सूत्रीय सीमा सुरक्षा रणनीति का दस्तावेज साझा किया है। देश को कम समय में "घुसपैठिए-मुक्त" बनाने के सरकार के लक्ष्य की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासी राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसंख्या संतुलन के लिए खतरा हैं। शाह ने कहा, "यह देश कोई धर्मशाला नहीं है और यहां रहने का अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों को है।"
नई दौर के खतरों के इर्द-गिर्द पॉलिसी बनाना
शाह ने जोर देकर कहा कि भारत की सुरक्षा पॉलिसी उभरती वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनानी होगी, जिसमें भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा और संसाधन असुरक्षा, सप्लाई चेन में रुकावट, बढ़ता कट्टरपंथ और साइबर गलत सूचना अभियान शामिल हैं। उन्होंने मजबूत आंतरिक सुरक्षा को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा, "अगर हमें हर क्षेत्र में नंबर वन बनना है तो आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।"
पुरानी नाकामियों से सीख
गृह मंत्री ने पिछली सरकारों की आलोचना की कि वे नशीले पदार्थों की तस्करी, वामपंथी उग्रवाद और पूर्वोत्तर में अशांति जैसी समस्याओं का पहले से अनुमान नहीं लगा पाईं, जब तक वे गंभीर नहीं हो गईं, जिससे देश को दशकों तक उनके नतीजे झेलने पड़े। उन्होंने राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को तीन बड़े आंतरिक सुरक्षा हॉटस्पॉट से पैदा चुनौतियों से पार पाने में सफल होने का श्रेय दिया।
नए आपराधिक कानून और आतंकवाद-रोधी रणनीति
शाह ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानून एक साल के अंदर पूरी तरह लागू हो जाएंगे। उनके मुताबिक इनके लागू होने से आपराधिक मामले सुप्रीम कोर्ट स्तर तक तीन साल में निपटाए जा सकेंगे और सजा की दर में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। आतंकवाद-रोधी कार्रवाई पर उन्होंने आतंकवाद-रोधी ढांचा "प्रहार" को पॉलिसी दस्तावेज से रोजमर्रा की प्रैक्टिस में लाने की बात कही और एजेंसियों से कहा कि "360 डिग्री आतंकवादी नेटवर्क" को तोड़ें। उन्होंने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ समन्वित राष्ट्रव्यापी कार्रवाई और उसके बाद उस पर लगे प्रतिबंध को केंद्र-राज्य समन्वय के असरदार उदाहरण के तौर पर पेश किया।
नशा नियंत्रण और पुलिसिंग में टेक्नोलॉजी
शाह ने राज्य पुलिस बलों से नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्युमेंट 2026-2029 को लागू करने और नशा-मुक्त भारत हासिल करने के लिए "डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय" के तीन स्तंभों पर काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों की समन्वित कार्रवाई से ही जीती जा सकती है। पुलिसिंग में टेक्नोलॉजी की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि CCTNS, ICJS, NatGrid और NAFIS को जोड़ते हुए इंटीग्रेटेड डेटाबेस बनाए गए हैं, और युवा अधिकारियों से कहा कि डेटा इंटीग्रेशन, एनालिसिस और आपराधिक तरीकों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करें ताकि कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी मिल सके।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने फरार अपराधियों के खिलाफ तंत्र मजबूत किए हैं और 2019 से 2026 के बीच करीब 274 फरार अपराधियों को विदेश से भारत वापस लाया गया है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को क्या निर्देश दिया है?
अमित शाह ने खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे खतरों को पहचानकर उन्हें बड़े संकट बनने से पहले ही खत्म कर दें। उन्होंने कहा कि अगले 15 से 20 सालों के रुझानों का अध्ययन करके उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीति बनानी चाहिए।
अवैध प्रवासियों को लेकर सरकार का क्या रुख है?
गृह मंत्री ने कहा कि अवैध प्रवासी राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसंख्या संतुलन के लिए खतरा हैं। उन्होंने घोषणा की कि सरकार कम समय में भारत को 'घुसपैठिए-मुक्त' बनाने का लक्ष्य रखती है और कहा कि यहां रहने का अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों को है।
नए आपराधिक कानूनों से क्या फायदे होंगे?
शाह ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानून एक साल के अंदर पूरी तरह लागू हो जाएंगे। इनके लागू होने से आपराधिक मामले सुप्रीम कोर्ट स्तर तक तीन साल में निपटाए जा सकेंगे और सजा की दर में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
नशा नियंत्रण के लिए क्या योजना है?
शाह ने राज्य पुलिस बलों से नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्युमेंट 2026-2029 को लागू करने के लिए कहा है। नशा-मुक्त भारत हासिल करने के लिए 'डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय' के तीन स्तंभों पर काम करना होगा और यह केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों की समन्वित कार्रवाई से ही संभव है।
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