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एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू बढ़कर 154.4 पहुंचा, केंद्रीय कर्मचारियों के 65% डीए पर बढ़ा ध्यान

AICPI-IW बढ़कर 154.4 पर पहुंचा, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 65% डीए पर बढ़ा ध्यान क्रिस्टा पाइक औद्योगिक कामगारों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का अगस्त का आंकड़ा बढ़ गया है।

एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू बढ़कर 154.4 पहुंचा, केंद्रीय कर्मचारियों के 65% डीए पर बढ़ा ध्यान
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क्रिस्टा पाइक

औद्योगिक कामगारों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का अगस्त का आंकड़ा बढ़ गया है। इससे केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के अगले महंगाई भत्ते में बदलाव तय करने वाली गणना पर ध्यान बढ़ गया है।

श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले श्रम ब्यूरो के मुताबिक, अगस्त 2026 में यह सूचकांक 1.2 अंक बढ़कर 154.4 हो गया। जुलाई 2026 में यह 153.2 था।

इस बढ़ोतरी के बाद इस बात पर फिर ध्यान गया है कि क्या महंगाई भत्ता 65% तक बढ़ सकता है। हालांकि, केवल अगस्त का आंकड़ा अंतिम प्रतिशत तय नहीं करता।

डीए की 1 जनवरी, 2027 से जुड़ी गणना के लिए सितंबर से दिसंबर तक के चार और मासिक आंकड़ों की जरूरत अभी बाकी है।

अगस्त के महंगाई आंकड़े से अगले डीए बदलाव पर बढ़ा ध्यान

औद्योगिक कामगारों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को AICPI-IW के नाम से जाना जाता है। इसका इस्तेमाल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की गणना में किया जाता है।

अगस्त 2026 में यह सूचकांक 154.4 रहा। इससे पहले वाले महीने में यह 153.2 था।

श्रम ब्यूरो ने 30 सितंबर, 2026 की अपनी प्रेस रिलीज में इस बढ़ोतरी की जानकारी दी।

श्रम ब्यूरो ने रिलीज में कहा, “अगस्त, 2026 के लिए अखिल भारतीय CPI-IW 1.2 अंक बढ़कर 154.4 अंक हो गया (एक सौ चौवन दशमलव चार)।”

महीने के लिए अलग से मापी गई महंगाई भी पिछले महीने के 4.57% से बढ़कर 4.96% हो गई।

इस तरह अगस्त में हुए बदलाव से दो जुड़े हुए आंकड़े ध्यान में आए। पहला, डीए की गणना में इस्तेमाल होने वाले सूचकांक में बढ़ोतरी और दूसरा, बताई गई महंगाई दर में इजाफा।

यह सूचकांक खुद महंगाई भत्ते का प्रतिशत नहीं है। हालांकि, यह वह आंकड़ा देता है जिसका इस्तेमाल भत्ते की गणना के लिए किया जाता है।

यह अंतर जरूरी है, क्योंकि अंतिम डीए दर केवल एक महीने के आंकड़े पर नहीं, बल्कि तय की गई गणना अवधि पर निर्भर करती है।

7वें केंद्रीय वेतन आयोग के फॉर्मूले के तहत डीए की हर किस्त की गणना 12 महीने की अवधि के सूचकांक के औसत के आधार पर की जाती है।

एक महीने की बढ़ोतरी औसत को ऊपर ले जा सकती है, लेकिन अंतिम नतीजा संबंधित अवधि में आने वाले बाकी आंकड़ों पर भी निर्भर करता है।

65% के आंकड़े की चर्चा क्यों हो रही है

अगस्त की महंगाई के आंकड़े जारी होने के बाद इस सवाल ने जोर पकड़ा है कि क्या डीए 65% तक पहुंच सकता है।

अगस्त का आंकड़ा 1 जनवरी, 2027 से लागू होने वाले डीए से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, गणना अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के आंकड़े उपलब्ध सामग्री में अभी शामिल नहीं हैं।

ये चार आंकड़े 1 जनवरी, 2027 की गणना के लिए जरूरी बाकी आंकड़ों का हिस्सा होंगे।

7वें केंद्रीय वेतन आयोग के फॉर्मूले के तहत तय 12 महीने का औसत हर किस्त का आधार होता है।

इसका मतलब है कि 153.2 से 154.4 की बढ़ोतरी के आधार पर अकेले अंतिम डीए प्रतिशत तय नहीं किया जा सकता।

यह बढ़ोतरी जरूर दिखाती है कि अगस्त में कीमतों से जुड़ा आंकड़ा ऊपर गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 65% भत्ते का ऐलान हो गया है।

उपलब्ध जानकारी उस सवाल की ओर इशारा करती है जिस पर विचार किया जा रहा है। यह इस बात की पुष्टि नहीं करती कि प्रस्तावित प्रतिशत को मंजूरी मिल चुकी है।

इसलिए जनवरी 2027 के बदलाव में इस्तेमाल होने वाले औसत के लिए अगले चार आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

संबंधित 12 महीने की अवधि में सूचकांक लगातार बढ़ता रहा, तो इसका असर ज्यादा डीए प्रतिशत के रूप में दिख सकता है।

यही वजह है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशन पाने वाले लोग अगस्त की बढ़ोतरी पर नजर रख रहे हैं।

आंकड़े ने गणना में इस्तेमाल होने वाले इनपुट को बदल दिया है। लेकिन उपलब्ध सामग्री में अगली किस्त के लिए अंतिम डीए प्रतिशत नहीं बताया गया है।

सूचकांक कैसे तैयार किया जाता है

AICPI-IW हर महीने 317 मार्केट से जुटाई गई खुदरा कीमतों के आधार पर तैयार किया जाता है।

ये मार्केट औद्योगिक तौर पर महत्वपूर्ण 88 केंद्रों में फैले हुए हैं।

इसलिए हर महीने का आंकड़ा सूचकांक के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तय मार्केट और केंद्रों में कीमतों में हुए बदलाव को दिखाता है।

इस सूचकांक में उन समूहों को शामिल किया जाता है जो गणना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली उपभोग टोकरी का हिस्सा हैं।

इस टोकरी में खाने-पीने की चीजों का वजन सबसे ज्यादा है।

खाने-पीने की चीजों का सूचकांक जुलाई के 158.9 से बढ़कर अगस्त में 161.3 हो गया।

यह 2.4 अंक की बढ़ोतरी थी। श्रम ब्यूरो की रिलीज में बताए गए समूहों में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।

इसलिए खाने-पीने की चीजों में हुआ बदलाव सामान्य सूचकांक में हुई 1.2 अंक की बढ़ोतरी से ज्यादा था।

सामान्य सूचकांक जुलाई के 153.2 से बढ़कर अगस्त में 154.4 हो गया।

समूह स्तर पर हुए बदलाव और पूरे सूचकांक के बदलाव के बीच का अंतर इस बात को दिखाता है कि अलग-अलग श्रेणियां मिलकर बड़े सूचकांक में किस तरह योगदान करती हैं।

अगस्त के आंकड़ों में कई दूसरी श्रेणियों में भी छोटी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पान, सुपारी, तंबाकू और नशीली चीजों का सूचकांक 176.9 से बढ़कर 177.3 हो गया।

कपड़ों और जूतों-चप्पलों का सूचकांक 158.0 से बढ़कर 158.2 हो गया।

ईंधन और रोशनी का सूचकांक 159.9 से बढ़कर 160.0 हो गया।

विविध श्रेणी का सूचकांक 148.2 से बढ़कर 149.0 हो गया।

बताए गए समूहों में सिर्फ आवास का सूचकांक स्थिर रहा।

इसका सूचकांक 143.0 पर ही रहा।

अलग-अलग श्रेणियों के आंकड़े दिखाते हैं कि अगस्त की बढ़ोतरी हर समूह में एक जैसी नहीं थी।

उपलब्ध सामग्री में बताए गए समूहों में खाने-पीने की चीजों में सबसे बड़ा बदलाव दर्ज किया गया।

इसके उलट, दिखाए गए दोनों महीनों के बीच आवास के सूचकांक में कोई बदलाव नहीं हुआ।

डीए साल में दो बार बदला जाता है

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में साल में दो बार बदलाव किया जाता है।

ये बदलाव 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होते हैं।

डीए का मकसद केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर कीमतों में बढ़ोतरी के असर को कम करना है।

यह भत्ता बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में दिया जाता है।

केंद्र आम तौर पर इसका ऐलान मार्च और अक्टूबर में करता है। वहीं, बदलाव जनवरी और जुलाई से लागू किए जाते हैं।

इस गणना का आधार अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े होते हैं।

इसलिए AICPI-IW के आंकड़े डीए की दोनों सालाना किस्तों के समय और रकम से जुड़े होते हैं।

अगस्त 2026 का आंकड़ा 1 जनवरी, 2027 से लागू होने वाली किस्त के लिए प्रासंगिक आंकड़ों की अवधि में आता है।

1 जुलाई का बदलाव भी उपलब्ध सामग्री में बताए गए इसी व्यापक छह महीने के बदलाव चक्र के तहत होता है।

उपलब्ध सामग्री में 12 महीने की पूरी अवधि के मासिक आंकड़े नहीं दिए गए हैं। इसी अवधि के आधार पर जनवरी 2027 का आंकड़ा तय होगा।

इसमें यह भी नहीं कहा गया है कि केंद्र ने 65% डीए दर को मंजूरी दे दी है।

इस समय की स्थिति यह है कि गणना के लिए जरूरी एक महत्वपूर्ण आंकड़ा जारी हुआ है।

अंतिम आंकड़ा तय औसत और गणना के लिए बताए गए बाकी आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

पिछले बदलाव में क्या बदला था

पिछली डीए बढ़ोतरी का ऐलान अप्रैल में किया गया था। उस समय वित्त मंत्रालय ने डीए को बेसिक सैलरी के 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया था।

यह बढ़ोतरी 1 जनवरी, 2026 से लागू हुई थी।

ताजा ऐलान को भी 2% की बढ़ोतरी बताया गया है, जिसके बाद डीए बेसिक सैलरी का 60% हो गया।

उपलब्ध सामग्री में इस ऐलान का समय अप्रैल बताया गया है।

ताजा आंकड़ों पर चर्चा से पहले की गई दो सबसे हाल की बढ़ोतरी जनवरी और जुलाई 2025 के लिए क्रमशः 2% और 3% की थी।

7वें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत 2021 से अब तक 10 बढ़ोतरी हुई हैं।

इनमें सबसे बड़ी बढ़ोतरी जुलाई 2021 में हुई थी, जब डीए में 11% का इजाफा किया गया था।

पहले हुए ये बदलाव अगली किस्त पर दिए जा रहे ध्यान का संदर्भ देते हैं।

उपलब्ध सामग्री के मुताबिक, कर्मचारी और पेंशन पाने वाले लोग 2024 और 2025 में हुए पिछले ऐलानों के आधार पर दिवाली के दौरान केंद्र से एक और डीए बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।

उपलब्ध सामग्री में बताई गई यह उम्मीद अगली प्रतिशत दर पर पक्के फैसले से अलग है।

अगला बदलाव तय 12 महीने के औसत के आधार पर किया जाएगा। इसलिए अगस्त में सूचकांक में हुई बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है।

58% से 60% तक का पिछला बदलाव यह भी दिखाता है कि भत्ते में बदलाव को बेसिक सैलरी के प्रतिशत के तौर पर बताया जाता है।

उपलब्ध सामग्री में यह नहीं बताया गया है कि भविष्य में होने वाली बढ़ोतरी से किसी एक कर्मचारी को कितनी रकम मिलेगी।

ऐसा इसलिए है क्योंकि भत्ते की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में होती है और अलग-अलग कर्मचारियों की बेसिक पे अलग होती है।

डीए और डीआर बढ़ोतरी से किन लोगों को फायदा हो सकता है

उपलब्ध सामग्री के मुताबिक, डीए और महंगाई राहत में बढ़ोतरी से 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा हो सकता है।

इस समूह में करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और लगभग 65 लाख पेंशन पाने वाले लोग शामिल हैं।

पेंशन पाने वालों के समूह में रक्षा कर्मचारी, रेलवे कर्मचारी और रिटायर हो चुके लोग शामिल हैं।

डीए कर्मचारियों की सैलरी पर लागू होता है।

महंगाई राहत यानी डीआर का असर पेंशन की रकम पर होता है।

यह अंतर इस बात पर आधारित है कि फायदा किसे मिलता है और वह किस जगह दिखाई देता है।

कर्मचारियों के लिए इसका असर सैलरी पर पड़ता है।

रिटायर हो चुके लोगों के लिए इसका असर पेंशन की रकम पर पड़ता है।

इसी उपलब्ध सामग्री में डीए को केंद्रीय और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की सैलरी के हिस्से के रूप में बताया गया है।

इसमें यह भी कहा गया है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की मासिक सैलरी में डीए जोड़कर दिया जाता है।

उपलब्ध सामग्री में यह नहीं कहा गया है कि अगला बदलाव निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी लागू होगा।

इसमें खास तौर पर एचआरए को ऐसा भत्ता बताया गया है जो निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी मिलता है।

डीए और डीआर के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों फायदे अलग-अलग लोगों से जुड़े हैं।

डीए में बदलाव कर्मचारी की सैलरी के हिस्से से जुड़ा होगा, जबकि डीआर में बदलाव पेंशन की रकम से जुड़ा होगा।

उपलब्ध सामग्री में भविष्य के बदलावों से मिलने वाले संभावित फायदे के संदर्भ में दोनों का जिक्र किया गया है।

सैलरी की गणना पर असर

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए बेसिक सैलरी का इस्तेमाल भुगतान से जुड़े कई दूसरे हिस्सों की गणना में किया जाता है।

इन हिस्सों में प्रोविडेंट फंड में योगदान, पेंशन, भत्ते और ग्रेच्युटी शामिल हैं।

इस वजह से डीए बढ़ने का असर सैलरी स्ट्रक्चर में सिर्फ डीए वाली लाइन तक सीमित नहीं रहता।

उपलब्ध सामग्री में कहा गया है कि ज्यादा डीए, खासकर डीए को मर्ज करने की मांग के संदर्भ में, कुल सैलरी में काफी और अपने-आप बढ़ोतरी कर सकता है।

इसमें यह भी कहा गया है कि इसके बाद दूसरे जुड़े हुए भत्तों और रकम में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

इस असर का स्तर कर्मचारी की बेसिक सैलरी और लागू सैलरी स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा।

उपलब्ध सामग्री में किसी कर्मचारी की सैलरी का उदाहरण या किसी पे लेवल के लिए रुपये में कोई खास बढ़ोतरी नहीं दी गई है।

हालांकि, इसमें यह साफ किया गया है कि डीए की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में होती है।

इसका मतलब है कि डीए का एक जैसा प्रतिशत अलग-अलग कर्मचारियों के लिए अलग-अलग रकम बन सकता है, क्योंकि उनकी बेसिक पे अलग होती है।

इसी गणना की वजह से 65% तक बढ़ोतरी की चर्चा बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में की जा रही है, न कि किसी तय रकम के रूप में।

अगस्त में सूचकांक में हुई बढ़ोतरी अपने-आप में किसी खास कर्मचारी को मिलने वाली रकम नहीं बताती।

यह गणना पूरी करने से पहले सूचकांक के बाकी आंकड़ों और तय औसत की जरूरत होगी।

डीए, सीटीसी और टैक्स का इलाज

उपलब्ध सामग्री के मुताबिक, डीए कर्मचारी की कॉस्ट-टू-कंपनी यानी सीटीसी का हिस्सा है।

इसे केंद्रीय और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की सैलरी के हिस्से में शामिल किया जाता है।

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए डीए मासिक सैलरी में जोड़ा जाता है।

लागू टैक्स स्लैब के मुताबिक डीए की पूरी रकम पर इनकम टैक्स लगता है।

इनकम टैक्स नियमों के तहत टैक्सपेयर के इनकम टैक्स रिटर्न में डीए के हिस्से को अलग से बताना जरूरी है।

डीए पर लागू टैक्स का तरीका हाउस रेंट अलाउंस के लिए बताए गए तरीके से अलग है।

एचआरए कर्मचारियों के घर से जुड़े खर्चों में मदद के लिए दिया जाता है।

एचआरए पर अलग नियमों के तहत टैक्स लगता है।

एक तय सीमा तक एचआरए को इनकम टैक्स से छूट मिल सकती है।

इसके उलट, डीए और डीआर को एचआरए की तरह छूट नहीं मिलती।

उपलब्ध सामग्री में भविष्य में डीए की दर 65% होने की स्थिति में अलग से टैक्स गणना नहीं दी गई है।

इसमें सिर्फ डीए पर लागू सामान्य टैक्स नियम बताए गए हैं।

इसलिए डीए प्रतिशत में होने वाला कोई भी बदलाव सैलरी की गणना, सीटीसी और पहले बताए गए टैक्स नियमों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

उपलब्ध सामग्री में संभावित भविष्य की बढ़ोतरी के बाद हाथ में आने वाली सैलरी की नई रकम नहीं बताई गई है।

8वें केंद्रीय वेतन आयोग की भूमिका

8वां केंद्रीय वेतन आयोग आजादी के बाद से बना इस तरह का सबसे नया पैनल है।

केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हर 10 साल में किया जाता है।

इस पैनल को आधिकारिक तौर पर केंद्रीय वेतन आयोग कहा जाता है।

यह योगदान, रिटायरमेंट से जुड़े फायदे और सरकारी खर्च से जुड़े फैसलों के लिए जिम्मेदार होता है।

डीए में बदलाव उन मुद्दों में शामिल है जिन पर 8वां केंद्रीय वेतन आयोग चर्चा कर रहा है।

उम्मीद है कि पैनल के गठन के करीब 18 महीने बाद उसकी अंतिम सिफारिशें पेश की जाएंगी।

उपलब्ध सामग्री में कहा गया है कि ये सिफारिशें मई 2027 तक आने की उम्मीद है।

यह चर्चा 1 जनवरी, 2027 से लागू होने वाली डीए किस्त की तुरंत होने वाली गणना से अलग है।

जनवरी 2027 की गणना में AICPI-IW के आंकड़ों और 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के फॉर्मूले के तहत तय 12 महीने के औसत का इस्तेमाल होगा।

8वें केंद्रीय वेतन आयोग की व्यापक चर्चा में डीए में बदलाव का मुद्दा शामिल हो सकता है। लेकिन उपलब्ध सामग्री में इसकी अंतिम सिफारिश के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

इसमें यह भी नहीं कहा गया है कि पैनल ने किसी खास डीए प्रतिशत को मंजूरी दे दी है।

तुरंत सामने का मुद्दा जनवरी 2027 की गणना के लिए जरूरी मासिक आंकड़ों का पूरा होना है।

लंबे समय से जुड़ा मुद्दा यह है कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग चर्चा में शामिल मुद्दों में डीए बदलाव पर विचार करेगा।

अगस्त का आंकड़ा क्या साफ करता है

अगस्त का AICPI-IW सूचकांक 1.2 अंक बढ़कर 154.4 हो गया।

पिछले महीने का सूचकांक 153.2 था।

बताई गई महंगाई दर 4.57% से बढ़कर 4.96% हो गई।

बताए गए समूहों में खाने-पीने की चीजों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह सूचकांक 2.4 अंक ऊपर गया।

आवास का सूचकांक 143.0 पर स्थिर रहा।

यह आंकड़ा 317 मार्केट में हर महीने जुटाई गई खुदरा कीमतों के आधार पर तैयार किया गया। ये मार्केट औद्योगिक तौर पर महत्वपूर्ण 88 केंद्रों में हैं।

यह आंकड़ा 1 जनवरी, 2027 से मिलने वाले डीए के लिए प्रासंगिक है।

उपलब्ध सामग्री में बताई गई गणना के तहत सितंबर से दिसंबर तक के चार मासिक आंकड़े अभी बाकी हैं।

डीए की किस्त 12 महीने की अवधि में सूचकांक के औसत के आधार पर तय की जाएगी।

उस अवधि में लगातार बढ़ोतरी होने पर डीए प्रतिशत ज्यादा हो सकता है।

उपलब्ध सामग्री में यह पुष्टि नहीं की गई है कि भत्ता बढ़कर 65% हो जाएगा।

इसमें इतना साफ होता है कि अगस्त के आंकड़े से गणना में इस्तेमाल होने वाला सूचकांक बढ़ा है और अगले डीए बदलाव पर फिर ध्यान गया है।

कर्मचारियों और पेंशन पाने वाले लोगों के लिए इस रिलीज का महत्व अंतिम ऐलान में नहीं, बल्कि गणना में जुड़े नए आंकड़े में है।

अगला पक्का आंकड़ा बाकी आंकड़ों और तय 12 महीने के औसत पर निर्भर करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 2026 में AICPI-IW कितना रहा?

अगस्त 2026 में AICPI-IW 1.2 अंक बढ़कर 154.4 हो गया, जबकि जुलाई में यह 153.2 था।

क्या AICPI-IW बढ़ने से DA 65% तय हो गया है?

नहीं, 65% DA की चर्चा जरूर बढ़ी है, लेकिन केवल अगस्त के आंकड़े से अंतिम प्रतिशत तय नहीं होता।

1 जनवरी 2027 के DA की गणना के लिए कौन से आंकड़े बाकी हैं?

सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के चार मासिक आंकड़े अभी बाकी हैं।

DA की गणना किस आधार पर होती है?

7वें केंद्रीय वेतन आयोग के फॉर्मूले के तहत DA की गणना 12 महीने के सूचकांक के औसत के आधार पर होती है।

#aicpi-iw#central employees#dearness allowance

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