कर्नाटक में हाई स्कूलों में AI लागू करने का विरोध तेज
कर्नाटक के हाई स्कूलों में तीसरी भाषा की जगह स्किल एजुकेशन में आएगा AI, हिंदी टीचर्स एसोसिएशन ने जताया विरोध कर्नाटक सरकार ने 2026-27 से राज्य के 1,652 सरकारी हाई स्कूलों में तीसरी भाषा की जगह स्किल
कर्नाटक के हाई स्कूलों में तीसरी भाषा की जगह स्किल एजुकेशन में आएगा AI, हिंदी टीचर्स एसोसिएशन ने जताया विरोध
कर्नाटक सरकार ने 2026-27 से राज्य के 1,652 सरकारी हाई स्कूलों में तीसरी भाषा की जगह स्किल एजुकेशन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शुरू करने का ऐलान किया है। यह कदम नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) का हिस्सा है, जिसका मकसद छात्रों को रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स और प्रोफेशनल कॉम्पिटेंस देना है। 'समग्र शिक्षा-कर्नाटक' (SSK) की ओर से जारी सर्कुलर में स्कूलों को AI के लिए गेस्ट टीचर्स नियुक्त करने और तैयारी करने का निर्देश दिया गया है।
कुछ स्कूलों में मौजूदा विषयों की जगह आएगा AI
यह फैसला 1,642 हाई स्कूलों को प्रभावित करेगा, जिनमें 1,180 नए मंजूर किए गए स्कूल, 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृत 381 NSQF स्कूल और 81 मौजूदा सिंगल-सेक्टर स्कूल शामिल हैं। इन सिंगल-सेक्टर स्कूलों में AI ब्यूटी एंड वेलनेस, रिटेल और अपैरल जैसे विषयों की जगह लेगा। ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर्स को हर स्कूल में एक AI गेस्ट टीचर नियुक्त करने की जिम्मेदारी दी गई है।
हिंदी टीचर्स एसोसिएशन ने जताया कड़ा विरोध
कर्नाटक हाई स्कूल हिंदी भाषा टीचर्स एसोसिएशन ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि यह तीसरी भाषा पढ़ाने वाले टीचर्स के भविष्य को खतरे में डालता है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को चिट्ठी लिखकर सर्कुलर वापस लेने और तीन-भाषा फॉर्मूला जारी रखने की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डी. मंजुनाथ ने कहा, "तीसरी भाषा के साथ AI को लागू करने से बच्चे AI सीख सकते हैं, बिना भाषा की पढ़ाई को नुकसान पहुंचाए। कर्नाटक में तीन-भाषा प्रणाली जारी रहनी चाहिए।"
तीसरी भाषा के टीचर्स का पुनर्नियोजन
सरकार ने तीसरी भाषा के टीचर्स को स्टाफ की कमी वाले नजदीकी स्कूलों में पुनर्नियोजित करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, हिंदी टीचर्स एसोसिएशन की चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। एसोसिएशन ने इस आदेश को उनके प्रोफेशनल भविष्य के लिए खतरा बताया है।
क्यों है यह फैसला अहम
AI एजुकेशन को प्राथमिकता देने का फैसला नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के स्किल डेवलपमेंट और फ्यूचर-रेडी कॉम्पिटेंस पर जोर देने के अनुरूप है। लेकिन इस कदम ने टेक्नोलॉजी और भाषा व सांस्कृतिक शिक्षा को संतुलित करने पर बहस छेड़ दी है। प्रभावित पक्षों की चिंताओं को दूर करने में सरकार की सफलता इस पहल की कामयाबी तय करेगी।
स्रोत: The Hindu
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