जयविलास पैलेस की दीवार पर एलिवेटेड रोड के लूप के निशान
ग्वालियर में ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए बन रहा एलिवेटेड रोड अब शहर की ऐतिहासिक विरासत के सामने खड़ा नजर आ रहा है।
ग्वालियर में ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए बन रहा एलिवेटेड रोड अब शहर की ऐतिहासिक विरासत के सामने खड़ा नजर आ रहा है। एलिवेटेड रोड के प्रस्तावित लूप के रास्ते में सिंधिया राजवंश के ऐतिहासिक जयविलास पैलेस की बाहरी दीवार के भीतर तक सफेद निशान लगाए गए हैं। इसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या एलिवेटेड रोड के लूप के लिए महल की दीवार का कुछ हिस्सा हटाया जाएगा?
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। महल के बाहर नापजोख के बाद चर्चा तेज हो गई है कि एलिवेटेड रोड की जद में जयविलास पैलेस की दीवार भी आ सकती है। हालांकि अभी तक विभागीय अधिकारियों ने किसी खास व्यक्ति या संपत्ति का नाम लेकर कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है।
जयविलास पैलेस केवल एक निजी संपत्ति नहीं है। यह ग्वालियर की ऐतिहासिक पहचान और सिंधिया राजवंश की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में अगर एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए इसकी दीवार प्रभावित होती है, तो प्रशासन और सिंधिया परिवार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा होगा।
एलिवेटेड रोड के प्रस्तावित लूप के लिए लोक निर्माण विभाग सेतु के कार्यपालन यंत्री जोगेंद्र यादव अपनी टीम के साथ क्षेत्र में जमीन की नापजोख के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान जयविलास पैलेस के ठीक बाहर की दीवार के भीतर तक सफेद निशान लगाए गए। निशान लगने के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि एलिवेटेड रोड के रास्ते में महल की दीवार भी आ रही है।
अधिकारियों की ओर से अब तक यह नहीं कहा गया है कि निशान केवल जयविलास पैलेस की दीवार को हटाने के लिए लगाए गए हैं। लेकिन अधिकारियों का साफ कहना है कि एलिवेटेड रोड के निर्माण में जो भी निर्माण बाधा बनेगा, उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसी बयान के बाद महल की दीवार को लेकर सवाल और ज्यादा गंभीर हो गया है।
एलिवेटेड रोड के निर्माण की राह में सबसे बड़ी चुनौती स्वर्णरेखा नदी के किनारे वर्षों से हुए अतिक्रमण बने हुए हैं। प्रारंभिक तौर पर 360 से ज्यादा कच्चे-पक्के निर्माण प्रोजेक्ट के रास्ते में बताए जा रहे हैं। इनमें से कई निर्माण स्वर्णरेखा नदी किनारे की जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए गए हैं।
प्रशासन अब इन निर्माणों को हटाने की तैयारी कर रहा है। तहसीलदार मनीष जैन के मुताबिक अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। संबंधित लोगों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि एलिवेटेड रोड के रास्ते में आने वाली हर जमीन की स्थिति एक जैसी नहीं होगी। जहां रास्ते में निजी भूमि आएगी, वहां भू-अर्जन और अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, अगर निर्माण सरकारी या अतिक्रमित जमीन पर पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यानी आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि रास्ते में आने वाला निर्माण सरकारी जमीन पर है, अतिक्रमित जमीन पर है या वैध निजी भूमि पर। निजी भूमि होने की स्थिति में भू-अर्जन और अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग सेतु के कार्यपालन यंत्री जोगेंद्र यादव ने भी कहा है कि एलिवेटेड रोड के निर्माण में बाधक बन रहे निर्माणों को हटाने के लिए नोटिस की कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से भू-अर्जन और अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
यादव ने किसी संपत्ति का नाम लिए बिना कहा कि एलिवेटेड रोड के रास्ते में जो भी निर्माण आएगा, उसे नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर निर्माण निजी भूमि पर है तो नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा, जबकि अतिक्रमण पाए जाने पर उसे हटाने की कार्रवाई होगी।
इसी बात से अब सबसे बड़ा सवाल जयविलास पैलेस की दीवार को लेकर खड़ा हो गया है। अगर एलिवेटेड रोड का प्रस्तावित लूप वास्तव में महल की दीवार को प्रभावित करता है, तो प्रशासन का अगला कदम क्या होगा? क्या दीवार को हटाया जाएगा, या एलिवेटेड रोड के लूप की योजना में कोई बदलाव किया जाएगा? इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है।
अधिकारियों के बयान के मुताबिक नियम सभी निर्माणों पर लागू होंगे। इसलिए सवाल उठ रहा है कि अगर जयविलास पैलेस की दीवार एलिवेटेड रोड के रास्ते में आती है, तो क्या उसे भी उसी तरह देखा जाएगा, जिस तरह रास्ते में आने वाले किसी अन्य निर्माण को देखा जा रहा है।
जयविलास पैलेस की दीवार तक पहुंचे सफेद निशानों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। अब नजर सिंधिया परिवार पर है। सवाल यह भी है कि क्या केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ऐतिहासिक विरासत के किसी हिस्से को एलिवेटेड रोड के लिए प्रभावित होने देंगे?
एक तरफ शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने वाला महत्वाकांक्षी एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट है। दूसरी तरफ ग्वालियर की पहचान से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत है। यही वजह है कि जयविलास पैलेस की दीवार पर लगे सफेद निशान सामान्य नापजोख से आगे का सवाल बन गए हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और सिंधिया परिवार इस संभावित टकराव का रास्ता कैसे निकालते हैं। एलिवेटेड रोड की राह में बताए जा रहे 360 से ज्यादा कच्चे-पक्के निर्माणों पर कार्रवाई कैसे होती है, यह प्रशासनिक प्रक्रिया से तय होगा।
अतिक्रमणकारियों को नोटिस, सुनवाई का अवसर, भू-अर्जन और अधिग्रहण की प्रक्रिया तथा नियमानुसार मुआवजा, इन सभी कदमों के बीच अब जयविलास पैलेस की दीवार पर सबकी नजर है। सवाल यही है कि एलिवेटेड रोड के लिए लगाई गई नापजोख का असर महल की बाहरी दीवार तक पहुंचेगा या नहीं।
एलिवेटेड रोड की राह में सैकड़ों अतिक्रमण हटेंगे या नहीं, यह प्रशासनिक कार्रवाई तय करेगी। लेकिन अगर सफेद निशान वास्तव में जयविलास पैलेस की दीवार तक पहुंच गए हैं, तो अब सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या विकास की सड़क विरासत की दीवार से होकर गुजरेगी?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जयविलास पैलेस की दीवार पर सफेद निशान क्यों लगाए गए?
एलिवेटेड रोड के प्रस्तावित लूप के लिए जमीन की नापजोख के दौरान दीवार के भीतर तक सफेद निशान लगाए गए।
क्या जयविलास पैलेस की दीवार हटाई जाएगी?
अभी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि निर्माण में बाधा बनने वाली हर संपत्ति पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
एलिवेटेड रोड की नापजोख के लिए कौन पहुंचा था?
लोक निर्माण विभाग सेतु के कार्यपालन यंत्री जोगेंद्र यादव अपनी टीम के साथ नापजोख के लिए पहुंचे थे।
एलिवेटेड रोड के रास्ते में कितने निर्माण बाधा बने हुए हैं?
प्रारंभिक तौर पर 360 से ज्यादा कच्चे-पक्के निर्माण प्रोजेक्ट के रास्ते में बताए जा रहे हैं।
निजी जमीन आने पर क्या मुआवजा दिया जाएगा?
निजी भूमि होने पर भू-अर्जन और अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
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