वायनाड में मॉनसून की बारिश 50% कम, जलवायु परिवर्तन का असर
वायनाड में भारी बारिश के बावजूद मॉनसून की 50% कमी बरकरार वायनाड, 2 अगस्त: भारी बारिश के बावजूद वायनाड जिले में मॉनसून की भारी कमी बनी हुई है।
वायनाड में भारी बारिश के बावजूद मॉनसून की 50% कमी बरकरार
वायनाड, 2 अगस्त: भारी बारिश के बावजूद वायनाड जिले में मॉनसून की भारी कमी बनी हुई है। इस सीजन में अब तक कुल बारिश सामान्य स्तर से 50% कम रही है। 1 जून से 31 जुलाई के बीच इस पहाड़ी जिले में सिर्फ 802 मिमी बारिश हुई, जबकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक इस अवधि के लिए सामान्य बारिश 1,600 मिमी होनी चाहिए थी। ये आंकड़े ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी के ह्यूम वेदर लैब से मिले हैं।
असमान बारिश और जलवायु परिवर्तन का असर
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की देरी, जिसे वैश्विक जलवायु परिवर्तन और एल नीनो प्रभाव से जोड़ा जा रहा है, बारिश में कमी की बड़ी वजह मानी जा रही है। हालांकि, 27 से 31 जुलाई तक पांच दिनों की भारी बारिश ने थोड़ी राहत दी। इस दौरान 199 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो पिछले दो महीनों में हुई कुल बारिश का करीब 25% है। ह्यूम सेंटर के कार्यकारी निदेशक सी.के. विष्णुदास के मुताबिक, 4 अगस्त तक बारिश जारी रहने की संभावना है।
वायनाड में बारिश का वितरण बहुत असमान रहा है। जहां लक्किडी में 2,548 मिमी बारिश दर्ज की गई, वहीं मुथंगा में सिर्फ 228 मिमी बारिश हुई। स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्रों में थोंडरनाड ग्राम पंचायत में सबसे ज्यादा औसत 1,990 मिमी बारिश हुई, जबकि नूलपुझा ग्राम पंचायत में सबसे कम 277 मिमी बारिश दर्ज की गई।
तापमान में गिरावट से राहत
जुलाई के अंत में हुई बारिश से दिन के तापमान में भी गिरावट आई है। मॉनसून की शुरुआत में बारिश की कमी के कारण तापमान असामान्य रूप से ज्यादा था। पिछले पांच दिनों में वायनाड का औसत दिन का तापमान करीब 25°C तक गिर गया है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है।
क्यों है यह चिंता की बात?
मॉनसून की कमी वायनाड के लिए बड़ी चुनौती है, जो कृषि पर निर्भर और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। असमान बारिश से पानी की कमी और फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है। वहीं, मॉनसून में देरी से यह भी साफ होता है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसे कारक क्षेत्रीय मौसम प्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं।
जिले में आने वाले दिनों में और बारिश की उम्मीद है, लेकिन इस साल के अनियमित मॉनसून के दीर्घकालिक प्रभाव स्थानीय समुदायों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वायनाड में मॉनसून की बारिश में कमी कितनी है?
वायनाड में मॉनसून की बारिश 50% कम हुई है।
इस साल वायनाड में कुल कितनी बारिश हुई है?
वायनाड में इस साल अब तक 802 मिमी बारिश हुई है।
जलवायु परिवर्तन का वायनाड के मौसम पर क्या असर है?
जलवायु परिवर्तन और एल नीनो के कारण वायनाड में बारिश में कमी आई है।
वायनाड में तापमान में हाल ही में क्या बदलाव आया है?
जुलाई के अंत में हुई बारिश से वायनाड का औसत दिन का तापमान 25°C तक गिर गया है।
वायनाड में बारिश की असमानता का क्या मतलब है?
वायनाड में कुछ क्षेत्रों में ज्यादा बारिश हुई है, जबकि कुछ में बहुत कम, जैसे लक्किडी में 2,548 मिमी और मुथंगा में 228 मिमी।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में आधार कार्ड सेंटरों पर अवैध वसूली का मामला सामने आया
- 2
गाजियाबाद में स्वतंत्रता दिवस पर भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन
- 3
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में नवाचार कार्यशाला का आयोजन
- 4
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में ‘फ्री थिंकर्स क्लब’ की शुरुआत
- 5
शिक्षक पर शराब पीकर स्कूल आने का आरोप, ग्रामीणों का हंगामा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।