श्रावस्ती में पानी की टंकी शोपीस, 15 हजार को प्यास
श्रावस्ती के जमुनहा इलाके के मजरा द्वारिका गांव बाग में बनी पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गई है। यह टंकी जो स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी, अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है।
श्रावस्ती के जमुनहा इलाके के मजरा द्वारिका गांव बाग में बनी पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गई है। यह टंकी जो स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी, अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है।
आरोप है कि ऑपरेटर कभी-कभी ही जलापूर्ति करता है। इससे करीब 15 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है।
इस टंकी से जमुनहा बाजार, जमुनहा गांव, रानीपुरवा, रामजानकी मंदिर, काली मां मंदिर, गांधी चौक, भरत मिलाप चौराहा, वासुदेव चौराहा, होलिका दहन तिराहा, बड़का फत्तेपुर, नई बस्ती, ईदगाह, द्वारिका गांव, विधायक पुरवा, भवनियापुर, काशीराम पुरवा जैसे कस्बों और मजरों में पानी की आपूर्ति मिलती है। इसके निर्माण का मकसद करीब 15 हजार की आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत टंकी तो बना दी गई, लेकिन उसका संचालन सही ढंग से नहीं किया जा रहा है। यहां सुबह-शाम नियमित जलापूर्ति न कर ऑपरेटर मन मर्जी से ही आपूर्ति देता है। इस वजह से लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले भीषण गर्मी और अब बारिश के मौसम में भी उन्हें हैंडपंप का ही सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाओं को दूर से पानी लाना पड़ता है। कई बार शिकायत के बाद भी जिम्मेदार लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि द्वारिका गांव की पानी टंकी से नियमित रूप से सुबह-शाम जलापूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।
ग्राम प्रधान असरार आलम ने बताया कि ऑपरेटर इतना लापरवाह है कि सुनने को तैयार नहीं है। शिकायत करने पर फोन भी नहीं उठाता। उसे बदलने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि जलापूर्ति के संचालन और मरम्मत के लिए बीटिल नामक संस्था से एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन संस्था वाले काम नहीं कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावस्ती में द्वारिका गांव की पानी की टंकी से कितने लोग प्रभावित हो रहे हैं?
यह टंकी करीब 15 हजार आबादी को पानी की आपूर्ति करने के लिए बनाई गई थी। इसमें जमुनहा बाजार, रानीपुरवा, गांधी चौक और कई अन्य इलाके शामिल हैं।
पानी की टंकी से नियमित जलापूर्ति क्यों नहीं हो रही?
ऑपरेटर नियमित सुबह-शाम की आपूर्ति न कर मन मर्जी से पानी देता है। संचालन और मरम्मत के लिए BTTL नामक संस्था से एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रही है।
यह टंकी किस योजना के तहत बनाई गई थी?
यह टंकी जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई थी ताकि स्वच्छ पेयजल लोगों तक पहुंचे।
ग्रामीणों को पानी के लिए क्या करना पड़ रहा है?
टंकी से पानी न मिलने से लोगों को हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाओं को दूर से पानी लाना पड़ता है।
ग्राम प्रधान ने ऑपरेटर के बारे में क्या कहा?
ग्राम प्रधान असरार आलम ने बताया कि ऑपरेटर बेहद लापरवाह है और शिकायत पर फोन भी नहीं उठाता। उसे बदलने की तैयारी की जा रही है।
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