कानपुर देहात में तीन महीने से ठप्प गांवों के विकास कार्य
राष्ट्रीय पंचायती राज संगठन उत्तर प्रदेश ने कानपुर देहात के जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर ग्राम पंचायतों में रुके हुए विकास कार्यों को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।
राष्ट्रीय पंचायती राज संगठन उत्तर प्रदेश ने कानपुर देहात के जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर ग्राम पंचायतों में रुके हुए विकास कार्यों को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। संगठन के जिला मंत्री शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रदेश महासचिव दिनेश मिश्रा की मौजूदगी में प्रधानों ने अपनी समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
प्रदेश महासचिव दिनेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों में निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया था, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी गांवों में विकास कार्य गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। राष्ट्रीय पंचायती राज संगठन उत्तर प्रदेश के बैनर तले प्रधान संगठन के जिला मंत्री शैलेंद्र सिंह और अन्य प्रधानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर विकास कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया को तुरंत पूरा करने की मांग की है।
संगठन ने पत्र में बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक ग्रामीणों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रशासक नियुक्त किए गए थे। हालांकि, बीते तीन महीनों से विकास कार्य लगभग ठप्प पड़े हैं। प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अनुमतियों में हो रही देरी के कारण सरकार की छवि पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
संगठन ने मांग की है कि एमबी पूर्ण किए गए कार्यों के जल्द भुगतान की अनुमति दी जाए। मुख्यमंत्री आवास योजना को लेकर भी मांग रखी गई है कि वर्ष 2025 में अतिवृष्टि के कारण जिन बेघर लोगों को मुआवजा मिल चुका है, उनकी ब्लॉक स्तर पर जांच या सर्वे कराकर मुख्यमंत्री आवास तेज गति से उपलब्ध कराए जाएं।
संगठन ने नए कार्यों की अनुमति की भी मांग की है। विकास कार्यों में आ रही रुकावट को दूर करने के लिए नए प्रस्तावों की मंजूरी दी जाए। संगठन ने यह भी मांग की है कि जांच के नाम पर प्रशासकों का उत्पीड़न बंद किया जाए।
इस मौके पर आशीष पटेल, दिनेश कुमार, शैलेंद्र सिंह, मोहम्मद कासिम, शंकर सिंह, संतोष कुशवाहा, राकेश कुमार, बृजेंद्र सिंह समेत कई ग्राम प्रधान मौजूद रहे। यह रिपोर्ट विवेक त्रिवेदी ने कानपुर देहात से भेजी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कानपुर देहात में गांवों के विकास कार्य क्यों रुके हुए हैं?
प्रशासक नियुक्त किए जाने के बाद तीन महीने बीत गए हैं, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अनुमतियों में देरी के कारण विकास कार्य लगभग ठप्प पड़े हैं।
राष्ट्रीय पंचायती राज संगठन ने जिलाधिकारी से क्या मांग की है?
संगठन ने विकास कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया तुरंत पूरी करने, पूर्ण किए गए कार्यों का तुरंत भुगतान करने और नए कार्यों की अनुमति देने की मांग की है।
मुख्यमंत्री आवास योजना को लेकर क्या समस्या है?
2025 में अतिवृष्टि के कारण जो बेघर लोगों को मुआवजा मिल चुका है, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ तेजी से मिले, इसके लिए ब्लॉक स्तर पर जांच-सर्वे की आवश्यकता है।
इस पत्र को सौंपने के पीछे क्या मुद्दा है?
प्रशासनिक देरी से सरकार की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है और ग्रामीण विकास की उम्मीदें पूरी नहीं हो रही हैं।
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