ट्रंप की मेल वोटिंग पाबंदियों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की मिडटर्म चुनावों में डाक मतपत्र पर पाबंदी लगाने की कोशिश को रद्द कर दिया।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मिडटर्म चुनावों के लिए ट्रंप की डाक मतपत्र पाबंदियों को खारिज किया
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मिडटर्म चुनावों के लिए डाक से वोटिंग पर पाबंदी लगाने की कोशिश को खारिज कर दिया है, और अपना फैसला तब सुनाया जब वोटिंग पहले से ही चल रही थी।
इस फैसले का मतलब है कि राज्य डाक मतपत्र बांटने के अपने मौजूदा तरीकों को बनाए रखेंगे, वे प्रक्रियाएं जारी रहेंगी जो सालों से चली आ रही हैं। ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट से नवंबर की प्रतिस्पर्धाओं से पहले पाबंदियों को मंजूरी देने का आग्रह किया था, जिनसे कांग्रेस का नियंत्रण तय होगा।
देर से चुनौती पर बंटी बेंच
कोर्ट के संक्षिप्त आदेश पर दो न्यायाधीशों ने सार्वजनिक असहमति जताई। जस्टिस सैमुअल अलीटो और क्लेरेंस थॉमस ने बहुमत के फैसले से अपनी असहमति दर्ज की।
यह कानूनी चुनौती आखिरी वक्त में दखल के रूप में आई, सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर एक अहम चुनाव चक्र के दौरान राजनीतिक विवाद के केंद्र में खुद को पाया।
राष्ट्रीय वोटिंग के लिए दांव
यह मामला काफी अहमियत रखता है क्योंकि करीब एक तिहाई अमेरिकी मतदाता डाक से अपने मतपत्र डालते हैं। खारिज की गई पाबंदियों ने मिडटर्म चुनावों से पहले लाखों लोगों के लिए वोटिंग की पहुंच को बदल दिया होता।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ट्रंप ने डाक से वोटिंग पर क्या पाबंदी लगाना चाहते थे?
ट्रंप प्रशासन मिडटर्म चुनावों के लिए डाक मतपत्र (mail ballot) पर पाबंदी लगाना चाहता था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से नवंबर के चुनावों से पहले इन पाबंदियों को मंजूरी देने का आग्रह किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की डाक मतपत्र पाबंदियों को खारिज कर दिया। अब राज्य अपने मौजूदा तरीकों से डाक मतपत्र बांटना जारी रखेंगे, जैसे वो सालों से करते आ रहे हैं।
क्या सभी न्यायाधीशों ने इस फैसले का समर्थन किया?
नहीं। जस्टिस सैमुअल अलीटो और क्लेरेंस थॉमस ने बेंच में विभाजन दिखाते हुए इस फैसले से अपनी असहमति दर्ज की।
डाक से वोटिंग कितने अमेरिकी मतदाताओं के लिए जरूरी है?
करीब एक तिहाई अमेरिकी मतदाता डाक से अपने मतपत्र डालते हैं। अगर पाबंदी लगी होती तो लाखों लोगों की वोटिंग की पहुंच प्रभावित होती।
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