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कानपुर में प्रतियोगी परीक्षा में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से धांधली का गिरोह पकड़ा

कानपुर में एसटीएफ और सचेंडी थाना पुलिस ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाकर पेशेवर सॉल्वर बैठाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

कानपुर में प्रतियोगी परीक्षा में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से धांधली का गिरोह पकड़ा
Image credit: News Darpan Team

कानपुर में एसटीएफ और सचेंडी थाना पुलिस ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाकर पेशेवर सॉल्वर बैठाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आईबीपीएस परीक्षा केंद्र 'आईओएन डिजिटल जोन' भौती से छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में अवनीश यादव, आशीष कुमार, अंकित सचान और राहुल कुमार सिन्हा शामिल हैं, जिनमें से आशीष और राहुल सॉल्वर या स्क्राइब के तौर पर काम करते थे।

पुलिस के मुताबिक यह सिंडिकेट पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य अभ्यर्थियों को सीएमओ कार्यालय से सांठगांठ कर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र दिलवाता था। इसके बाद दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलने वाली श्रुत लेखक यानी स्क्राइब की सुविधा का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा हॉल में पेशेवर सॉल्वर बैठाए जाते थे। ये लोग परीक्षा पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलते थे।

पुलिस ने आरोपियों के पास से एक वैगनआर कार, एक आईपैड, पांच मोबाइल फोन, फर्जी दिव्यांग दस्तावेज, प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड और नकदी बरामद की है। पूछताछ के दौरान आठ और लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश जारी है।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह कानपुर के आसपास के कई जिलों में सक्रिय था और अब गिरोह से जुड़े अन्य दलालों और नेटवर्क की तलाश की जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर में क्या धांधली का गिरोह पकड़ा गया?

कानपुर में एसटीएफ और सचेंडी थाना पुलिस ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाकर पेशेवर सॉल्वर बैठाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आईबीपीएस परीक्षा केंद्र 'आईओएन डिजिटल जोन' से छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह गिरोह कैसे परीक्षा में धांधली करता था?

गिरोह पहले सीएमओ कार्यालय से सांठगांठ कर स्वस्थ अभ्यर्थियों को फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र दिलवाता था। फिर दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलने वाली श्रुत लेखक यानी स्क्राइब की सुविधा का दुरुपयोग करके परीक्षा हॉल में पेशेवर सॉल्वर बैठा देते थे।

गिरोह अभ्यर्थियों से कितना पैसा वसूलता था?

ये लोग परीक्षा पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलते थे।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद किया गया?

पुलिस ने आरोपियों के पास से एक वैगनआर कार, एक आईपैड, पांच मोबाइल फोन, फर्जी दिव्यांग दस्तावेज, प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड और नकदी बरामद की है।

क्या इस गिरोह के और भी सदस्य हैं?

जी हां, पूछताछ के दौरान आठ और लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश चल रही है।

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