शरणार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए UNHCR, SICCI और एथिराज कॉलेज की साझेदारी
UNHCR, SICCI और एथिराज कॉलेज ने शरणार्थियों को शिक्षा और कौशल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए साझेदारी की।
UNHCR, SICCI और एथिराज कॉलेज फॉर विमेन ने शरणार्थियों के समावेश के लिए मिलाया हाथ
UN रिफ्यूजी एजेंसी ने सदर्न इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एथिराज कॉलेज फॉर विमेन के साथ तीन तरफा साझेदारी की है ताकि शरणार्थियों को शिक्षा, रिसर्च और कम्युनिटी प्रोग्राम के जरिए आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
यह समझौता एथिराज कॉलेज के शैक्षणिक संसाधनों को UNHCR की काम करने की क्षमता और SICCI-UNHCR पार्टनरशिप फोरम के साथ जोड़ता है। यह फोरम भारत में शरणार्थियों के सामाजिक-आर्थिक समावेश के लिए काम करता है, जिसमें तमिलनाडु में रह रहे श्रीलंकाई शरणार्थी भी शामिल हैं।
लागू करने का तरीका
एथिराज कॉलेज का डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क इस समझौते के तहत सभी गतिविधियों को चलाने और समन्वय करने की जिम्मेदारी संभालेगा।
इस समझौते पर SICCI के पूर्व अध्यक्ष पी. गणपति, एथिराज कॉलेज फॉर विमेन के चेयरमैन वी.एम. मुरलीधरन और एथिराज कॉलेज फॉर विमेन की प्रिंसिपल और सेक्रेटरी एस. उमा गौरी ने UNHCR के हेड ऑफ फील्ड ऑफिस वलन माइकल की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए।
यह साझेदारी शरणार्थियों के एकीकरण में कई हितधारकों की भागीदारी की दिशा में बदलाव का संकेत है। इसमें व्यापार, शिक्षा और मानवीय सहायता की विशेषज्ञता को मिलाकर दक्षिण भारत में विस्थापित समुदायों के सामने आने वाली आर्थिक भागीदारी और सामाजिक समावेश की दिक्कतों को दूर करने की कोशिश है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UNHCR, SICCI और एथिराज कॉलेज ने आपस में क्या समझौता किया है?
तीनों संगठनों ने शरणार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन तरफा साझेदारी की है। इसके तहत शिक्षा, रिसर्च और कम्युनिटी प्रोग्राम के जरिए शरणार्थियों को सामाजिक-आर्थिक समावेश दिलाया जाएगा।
इस साझेदारी से किन शरणार्थियों को फायदा मिलेगा?
इस समझौते से भारत में रहने वाले शरणार्थियों को फायदा मिलेगा, खासकर तमिलनाडु में रह रहे श्रीलंकाई शरणार्थियों को।
इस प्रोग्राम को चलाने की जिम्मेदारी किसकी है?
एथिराज कॉलेज का डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क इस समझौते के तहत सभी गतिविधियों को चलाने और समन्वय करने की जिम्मेदारी संभालेगा।
यह साझेदारी क्यों जरूरी था?
दक्षिण भारत में विस्थापित समुदायों को आर्थिक भागीदारी और सामाजिक समावेश की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। व्यापार, शिक्षा और मानवीय सहायता को एकजुट करके इन समस्याओं को दूर करने के लिए यह साझेदारी बनाई गई।
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