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अडूर प्रकाश ने सीएम सतीशन को घेरा, बोले- फैसले मीडिया से पता चलते

यूडीएफ संयोजक अडूर प्रकाश ने कहा कि सरकार के अहम फैसलों की जानकारी उन्हें मीडिया से मिल रही है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से शिकायत की बात कही।

अडूर प्रकाश ने सीएम सतीशन को घेरा, बोले- फैसले मीडिया से पता चलते
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केरलम यूडीएफ संयोजक अडूर प्रकाश ने सीएम सतीशन पर निशाना साधा, कहा कि उन्हें सरकार के फैसलों की जानकारी ‘मीडिया के जरिए’ मिलती है

अडूर प्रकाश ने तिरुवनंतपुरम में कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की सरकार के अहम फैसलों की जानकारी “मीडिया के जरिए” मिली। इसके साथ ही कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अंदरूनी तनाव गुरुवार (October 1, 2026) को खुलकर सामने आ गए।

यूडीएफ संयोजक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें “सरकार के अहम फैसलों के बारे में अंधेरे में रखा जा रहा है।”

उनकी आलोचना श्री सतीशन पर मुख्यमंत्री और यूडीएफ चेयरमैन, दोनों भूमिकाओं में थी। श्री प्रकाश ने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री ने यूडीएफ की बैठक बुलाने की पहल नहीं की।

कैबिनेट रैंक की नियुक्तियों से आलोचना शुरू

श्री प्रकाश ने कहा कि उन्हें बुधवार के कैबिनेट फैसले के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी, जिसमें आईयूएमएल नेता एम.के. मुनीर को स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स कमीशन का चेयरमैन और फॉरवर्ड ब्लॉक नेता जी. देवराजन को नई दिल्ली में राज्य सरकार का प्रतिनिधि नियुक्त करने का फैसला हुआ।

कैबिनेट फैसले के सोर्स अकाउंट के मुताबिक, दोनों पदों को कैबिनेट रैंक हासिल है।

श्री प्रकाश ने कहा कि मुद्दा श्री मुनीर या श्री देवराजन की योग्यता का नहीं है, बल्कि किसी भी चर्चा के न होने और इस बात का है कि उन्हें कैबिनेट फैसले के बारे में बताया नहीं गया।

उन्होंने कहा, “खैर, यूडीएफ संयोजक के तौर पर मुझे इन फैसलों की जानकारी नहीं थी। ये मेरी जानकारी के बिना लिए गए।”

उन्होंने कहा, “मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यूडीएफ को इसके बारे में पता होना चाहिए था।”

यह बताते हुए कि यूडीएफ संयोजक के तौर पर उनकी अपनी नियुक्ति ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने की थी, श्री प्रकाश ने कहा कि वह इन घटनाक्रमों को लेकर अपनी नाराजगी कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणियों को मुख्यमंत्री पर आरोप लगाने की कोशिश के तौर पर गलत नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें “उनके अनुभव की रोशनी” में देखा जाना चाहिए।

मीडिया के जरिए फैसलों की जानकारी मिलना ‘दुर्भाग्यपूर्ण’

श्री प्रकाश ने कहा कि वह यह उम्मीद नहीं करते कि व्यस्त शेड्यूल में काम करने वाले मुख्यमंत्री उन्हें हर एक फैसले के बारे में जानकारी दें।

फिर भी, उन्होंने कहा कि अगर यूडीएफ संयोजक को फैसलों की जानकारी मीडिया के जरिए लेनी पड़े, तो यह “दुर्भाग्यपूर्ण” है।

उन्होंने कहा कि “इन बातों को छिपाने का कोई मतलब नहीं है” और यह भी जोड़ा कि लोगों को भी हालात की जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब मुझसे यूडीएफ में हुए घटनाक्रमों पर सवाल पूछे जाते हैं, तो मैं उनका सही जवाब नहीं दे पाता। इन बातों को छिपाने का कोई मतलब नहीं है। लोगों को भी इसके बारे में पता होना चाहिए।”

उनकी टिप्पणियों ने यूडीएफ के अंदरूनी तालमेल के सिस्टम के कामकाज को फोकस में ला दिया है, ऐसे समय में जब कई मामलों पर फैसले लंबित हैं।

यूडीएफ कोऑर्डिनेशन कमेटी की आखिरी बैठक July 30 को हुई थी, और कई अहम फैसले लंबित हैं, जिनमें सरकारी विभागों के तहत आने वाले कॉरपोरेशनों और बोर्डों में टॉप पदों पर नियुक्तियां भी शामिल हैं।

श्री प्रकाश ने कहा कि उन पदों में से कई पर अभी भी वे लोग बने हुए हैं, जिन्हें पिछली सीपीआई(एम) की अगुवाई वाली एलडीएफ सरकार ने नियुक्त किया था।

यूडीएफ की बैठक अभी तक नहीं बुलाई गई

श्री प्रकाश ने कहा कि यूडीएफ बैठक नहीं बुला पाया है, और मुख्यमंत्री को, यूडीएफ चेयरमैन के तौर पर, पहल करनी थी।

उन्होंने कहा, “यूडीएफ बैठक नहीं बुला पाया है। यूडीएफ चेयरमैन के तौर पर मुख्यमंत्री को पहल करनी होगी। लेकिन चेयरमैन के तौर पर उन्होंने कुछ नहीं कहा, और इसलिए यूडीएफ की बैठक नहीं हुई।”

उन्होंने कहा, “कई मामलों पर फैसले लंबित हैं।”

संयोजक की टिप्पणियों से यह संकेत मिला कि यूडीएफ की बैठक न होना, सरकार और फ्रंट स्तर के फैसलों को किस तरह संभाला जा रहा है, इसको लेकर उनकी चिंताओं के केंद्र में आ गया है।

उन्होंने यूडीएफ में घटनाक्रमों पर सवालों का जवाब न दे पाने की अपनी स्थिति को इस बात से जोड़ा कि संयोजक के तौर पर उनकी भूमिका में उन तक जानकारी नहीं पहुंच रही है।

उपचुनाव में झटका और तालमेल को लेकर चिंता

श्री प्रकाश की नाराजगी 38 लोकल बॉडी वार्डों में हुए उपचुनावों में यूडीएफ को लगे झटके के बाद सामने आई।

उन्होंने यूडीएफ की तरफ से तालमेल की कमी की ओर इशारा किया।

उन्होंने यह भी कहा कि बिजली संकट ने लोगों में नाराजगी पैदा की है।

इस तरह उनकी टिप्पणियां कैबिनेट रैंक की नियुक्तियों से आगे बढ़कर यूडीएफ के बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक कामकाज तक पहुंचीं।

आपदा प्रभावित निलांबुर के लिए श्री सतीशन की चार्टर्ड फ्लाइट को लेकर हालिया “स्पॉन्सरशिप” विवाद पर श्री प्रकाश ने कहा कि मुख्यमंत्री को “ऐसे मामलों को इस तरह समझाना चाहिए कि लोगों को भरोसा हो।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपनी चिंताएं केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अध्यक्ष और बिजली मंत्री सनी जोसेफ के सामने रखी हैं, तो श्री प्रकाश ने कहा कि मौका नहीं आया।

फुल-टाइम केपीसीसी अध्यक्ष की नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई के लिए मजबूत नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए फैसला जल्दी आना चाहिए।

ये घटनाक्रम October 01, 2026 को 04:06 pm IST पर प्रकाशित किए गए।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अडूर प्रकाश ने सीएम वी.डी. सतीशन पर क्या आरोप लगाया?

अडूर प्रकाश ने कहा कि उन्हें सरकार के अहम फैसलों की जानकारी सीधे नहीं मिलती, बल्कि मीडिया के जरिए पता चलती है। उन्होंने कहा कि उन्हें कई फैसलों से अंधेरे में रखा जा रहा है।

किस कैबिनेट फैसले पर अडूर प्रकाश ने नाराजगी जताई?

उन्होंने उस फैसले पर नाराजगी जताई जिसमें IUML नेता एम.के. मुनीर को स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स कमीशन का चेयरमैन और Forward Block नेता जी. देवराजन को नई दिल्ली में राज्य सरकार का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।

अडूर प्रकाश ने कहा कि असली मुद्दा क्या है?

उन्होंने कहा कि मुद्दा एम.के. मुनीर या जी. देवराजन की योग्यता का नहीं है। असली मुद्दा यह है कि फैसले से पहले चर्चा नहीं हुई और UDF संयोजक होने के बावजूद उन्हें जानकारी नहीं दी गई।

अडूर प्रकाश अपनी नाराजगी किसे बताएंगे?

अडूर प्रकाश ने कहा कि वह इन घटनाक्रमों को लेकर अपनी नाराजगी कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचाएंगे, क्योंकि उनकी नियुक्ति UDF संयोजक के तौर पर AICC ने की थी।

UDF के अंदर किस बात को लेकर तनाव दिख रहा है?

लेख के मुताबिक UDF के अंदर तालमेल और फैसलों की जानकारी साझा करने को लेकर तनाव सामने आया है। UDF कोऑर्डिनेशन कमेटी की आखिरी बैठक July 30 को हुई थी और कई अहम नियुक्तियां अब भी लंबित हैं।

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