UASD की नई तकनीक से आम का पल्प सालभर रहेगा उपलब्ध
आम की भरमार को सहारा, UASD ने सालभर इस्तेमाल के लिए पल्प कैन में बंद किया धारवाड़: यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़ (UASD) ने आम के पल्प को कैन में संरक्षित करने की नई तकनीक शुरू की है,
आम की भरमार को सहारा, UASD ने सालभर इस्तेमाल के लिए पल्प कैन में बंद किया
धारवाड़: यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़ (UASD) ने आम के पल्प को कैन में संरक्षित करने की नई तकनीक शुरू की है, जिससे यह सालभर उपलब्ध रहेगा। इस इनोवेटिव प्रोसेस में हर तरह के आम को शामिल किया जा सकता है और पल्प को दो साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इस पल्प से सीकराने, जूस, जैम, मिल्कशेक, आइसक्रीम और चॉकलेट जैसे कई प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं।
यह पहल आम किसानों की मदद के लिए शुरू की गई है, ताकि उन्हें कीमत गिरने, फलों के जल्दी पकने या खराब लेकिन खाने लायक फलों को फेंकने जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। UASD के फूड साइंस और न्यूट्रिशन डिपार्टमेंट की हेड प्रोफेसर एस. हेमलता ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने 10 क्विंटल आम प्रोसेस करके 4 क्विंटल पल्प तैयार किया है। इस प्रक्रिया में आम को पल्पर में डालकर छिलका और बीज अलग किया जाता है, फिर इसे तय तापमान पर उबाला जाता है।
पाश्चराइजेशन के बाद पल्प में वैल्यू एडिशन किया जाता है और फूड सेफ्टी सर्टिफाइड कैन में सील किया जाता है। किसान इन सील किए गए कैन को तय कीमत पर खरीद सकते हैं और उन्हें मार्केट में बेच सकते हैं या खुद इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रोफेसर हेमलता ने बताया कि जिन आमों के छिलके पर काले धब्बे होते हैं, लेकिन अंदर से सही होते हैं, उनका भी इस तरीके से बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
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