श्रावस्ती के बाबा विभूतिनाथ मंदिर में सावन के आखिरी सोमवार को भक्तों की भीड़
सावन के चौथे और आखिरी सोमवार को श्रावस्ती के ऐतिहासिक बाबा विभूतिनाथ महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सिरसिया इलाके में बने इस मंदिर को गुप्त काशी के नाम से भी जाना जाता है।
सावन के चौथे और आखिरी सोमवार को श्रावस्ती के ऐतिहासिक बाबा विभूतिनाथ महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सिरसिया इलाके में बने इस मंदिर को गुप्त काशी के नाम से भी जाना जाता है। सुबह तीन बजे से ही हर-हर महादेव और बोल बम के नारों के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया और सुख-समृद्धि की कामना की। हाथों में पवित्र जल लेकर लंबी कतारों में खड़े भक्तों का तांता देर शाम तक लगा रहा।
इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक, पांडवों ने अपने बारह साल के वनवास और एक साल के अज्ञातवास के दौरान सोहेलवा के घने जंगलों में वक्त गुजारा था। कहा जाता है कि पांडव पुत्र भीम ने यहां एक गांव बसाया था जिसे पहले भीमगांव कहा जाता था और बाद में यही इलाका भिनगा के नाम से मशहूर हुआ। माना जाता है कि पांडवों ने यहीं भगवान शिव की पूजा की और शिवलिंग की स्थापना की थी।
सावन के आखिरी सोमवार पर सिर्फ श्रावस्ती ही नहीं, बल्कि नेपाल और आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। रविवार शाम से ही भक्त सीताद्वार के सीता सरोवर और जंगलदास कुट्टी समेत अलग-अलग जगहों से पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से जलाभिषेक किया। इसके अलावा गिलौला इलाके के मशहूर बाबा झारखंडीनाथ मंदिर समेत जिले के दूसरे बड़े शिवालयों में भी तड़के से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।
भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट रहा। बाबा विभूतिनाथ मंदिर परिसर और आसपास के इलाके को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया। पर्याप्त पुलिस बल के साथ सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी भीड़ के बीच मौजूद रहे ताकि सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावस्ती के बाबा विभूतिनाथ मंदिर को और किस नाम से जाना जाता है?
इस मंदिर को गुप्त काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर श्रावस्ती के सिरसिया इलाके में स्थित है।
सावन के आखिरी सोमवार को इस मंदिर में भक्तों ने क्या किया?
हजारों श्रद्धालुओं ने सुबह तीन बजे से ही बाबा का जलाभिषेक किया। भक्तों ने हर-हर महादेव और बोल बम के नारों के बीच सुख-समृद्धि की कामना की।
बाबा विभूतिनाथ मंदिर का इतिहास किस काल से जुड़ा है?
इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। माना जाता है कि पांडवों ने यहां भगवान शिव की पूजा की और शिवलिंग की स्थापना की थी।
सावन के आखिरी सोमवार को कहां-कहां से भक्त मंदिर पहुंचे?
श्रावस्ती के अलावा नेपाल और आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने सीताद्वार के सीता सरोवर और जंगलदास कुट्टी जैसी जगहों से पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुंचे।
भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
मंदिर परिसर और आसपास के इलाके को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया। पर्याप्त पुलिस बल के साथ सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए मौजूद रहे।
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