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उज्जैन में श्रावण की आखिरी सवारी में महाकाल निकले, हजारों भक्तों ने किए दर्शन

उज्जैन में आज श्रावण मास की अंतिम और चौथी सवारी में बाबा महाकाल रजत जड़ित पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले।

उज्जैन में श्रावण की आखिरी सवारी में महाकाल निकले, हजारों भक्तों ने किए दर्शन
Image credit: News Darpan Team

उज्जैन में आज श्रावण मास की अंतिम और चौथी सवारी में बाबा महाकाल रजत जड़ित पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। हजारों भक्तों ने इस दिव्य शोभायात्रा में शामिल होकर बाबा चंद्रमोलेश्वर के दर्शन किए। पूरे शहर में भक्ति का माहौल था और हर तरफ जय महाकाल के नारे गूंज रहे थे।

श्रावण मास को भगवान शिव का सबसे पवित्र महीना माना जाता है और इस दौरान उज्जैन में खास तौर पर चार सवारियां निकाली जाती हैं। आज की सवारी इस साल की आखिरी सवारी थी, जिसमें बाबा महाकाल को खूबसूरत रजत यानी चांदी की जड़ाऊ पालकी में बिठाया गया। भक्तों ने इस मौके पर पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की और प्रसाद चढ़ाया।

महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और श्रावण के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस साल भी पूरे महीने मंदिर परिसर और शहर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। प्रशासन ने सवारी के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और पूरे रूट पर पुलिस की तैनाती की गई थी।

सवारी के दौरान पूरा उज्जैन शहर रोशनी और फूलों से सजा हुआ था। रास्ते में जगह-जगह भक्तों ने बाबा महाकाल का स्वागत किया और आरती उतारी। इस धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर उज्जैन की आस्था और परंपरा को दुनिया के सामने पेश किया। श्रावण मास की इस आखिरी सवारी के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-पाठ का सिलसिला भी समाप्त हो गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन में आज कौन सी सवारी निकली?

उज्जैन में श्रावण मास की आखिरी और चौथी सवारी निकली। इसमें बाबा महाकाल को रजत यानी चांदी की जड़ाऊ पालकी में बिठाया गया और हजारों भक्तों ने इस दिव्य शोभायात्रा में शामिल होकर दर्शन किए।

श्रावण मास में उज्जैन में कितनी सवारियां निकाली जाती हैं?

श्रावण मास को भगवान शिव का सबसे पवित्र महीना माना जाता है और इस दौरान उज्जैन में खास तौर पर चार सवारियां निकाली जाती हैं।

महाकालेश्वर मंदिर क्या है?

महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। श्रावण के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

सवारी के दौरान शहर को कैसे सजाया गया?

सवारी के दौरान पूरा उज्जैन शहर रोशनी और फूलों से सजा हुआ था। रास्ते में जगह-जगह भक्तों ने बाबा महाकाल का स्वागत किया और आरती उतारी।

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