कर्नाटक थिएटर में बौद्ध दर्शन पर आधारित नाटकों का जश्न
कर्नाटक थिएटर में बौद्ध दर्शन की अनोखी छाप: बसवराज हुगर गुरुवार को कलबुर्गी के रंगायन ऑडिटोरियम में एक खास कार्यक्रम में बौद्ध दर्शन पर आधारित दस नाटकों का जश्न मनाया गया।
गुरुवार को कलबुर्गी के रंगायन ऑडिटोरियम में एक खास कार्यक्रम में बौद्ध दर्शन पर आधारित दस नाटकों का जश्न मनाया गया। इन नाटकों को लिखा है ईश्वर एम. इंगन ने, और इन्हें कर्नाटक थिएटर में बौद्ध विचारधारा को लाने की एक अनोखी पहल बताया गया। कन्नड़ और संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक बसवराज हुगर ने इन नाटकों को कर्नाटक थिएटर में पहली बार ऐसा प्रयास बताया।
दर्शन और नाटक का अनोखा मेल
ये नाटक इतिहास और दर्शन को जोड़ते हैं और आज के सामाजिक मुद्दों को भी छूते हैं। कलबुर्गी रंगायन के पूर्व निदेशक प्रभाकर जोशी ने इस अनोखे मेल की तारीफ की। वरिष्ठ लेखक श्रीशैल नगराल ने इन नाटकों के साहित्यिक स्तर को सराहा और कहा कि थिएटर एक मुश्किल कला है, जिसमें अभिनय, संवाद, संगीत, नृत्य और मंच कला सब कुछ शामिल होता है।
प्रगतिशील थिएटर को बढ़ावा
रंगायन की निदेशक सुजाता जंगमशेट्टी ने कहा कि बौद्ध दर्शन और वचन साहित्य जैसे प्रगतिशील नाटकों को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने इंगन की नई थिएटर प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की कोशिशों की भी तारीफ की।
प्रोजेक्ट का प्रेरणा स्रोत
इंगन ने बताया कि उनके नाटकों की प्रेरणा बुद्ध की जीवनी और बौद्ध महिलाओं की कहानियां हैं, जो एक बौद्ध विहार की लाइब्रेरी में मिलीं। उनके नाटक बौद्ध दर्शन की गहराई को थिएटर के जरिए व्यक्त करने की कोशिश करते हैं।
साहित्यिक और थिएटर जगत की बैठक
कन्नड़ और संस्कृति विभाग और रंगायन, कलबुर्गी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कई लेखक, साहित्य प्रेमी और थिएटर कलाकार शामिल हुए। इनमें एच.टी. पोटे, सिद्राम सिंधे, एम.बी. कट्टी, शैलजा बगेवाड़ी और अन्य लोग मौजूद थे। रंगायन के कलाकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।
इंगन का योगदान कन्नड़ थिएटर में दर्शन और नाटक का अनोखा संगम पेश करता है। यह बौद्ध विचारधारा को आधुनिक समाज के मुद्दों के साथ जोड़कर कन्नड़ साहित्य को समृद्ध करता है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कर्नाटक थिएटर में बौद्ध दर्शन पर आधारित नाटकों का यह जश्न कहां हुआ?
यह कार्यक्रम गुरुवार को कलबुर्गी के रंगायन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था।
इन नाटकों को किसने लिखा है और कितने नाटक हैं?
ये दस नाटक ईश्वर एम. इंगन ने लिखे हैं। ये नाटक बौद्ध दर्शन पर आधारित हैं।
इंगन को इन नाटकों लिखने की प्रेरणा कहां से मिली?
इंगन को प्रेरणा बुद्ध की जीवनी और बौद्ध महिलाओं की कहानियों से मिली, जो उन्हें एक बौद्ध विहार की लाइब्रेरी में मिलीं।
ये नाटक क्या संदेश देते हैं?
ये नाटक इतिहास और दर्शन को जोड़ते हैं, बौद्ध विचारधारा को व्यक्त करते हैं, और आज के सामाजिक मुद्दों को भी छूते हैं।
रंगायन की निदेशक का इन नाटकों के बारे में क्या कहना है?
सुजाता जंगमशेट्टी का मानना है कि बौद्ध दर्शन पर आधारित ऐसे प्रगतिशील नाटकों को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना जरूरी है।
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