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तेलंगाना में हथकरघा साड़ियों के लिए QR कोड सिस्टम शुरू

आपकी हथकरघा साड़ी किसने बनाई? तेलंगाना के यादाद्रि भुवनागिरी में अब जवाब QR कोड स्कैन करके मिलेगा तेलंगाना के यादाद्रि भुवनागिरी जिले ने हथकरघा उत्पादों के लिए QR कोड आधारित ऑथेंटिकेशन सिस्टम शुरू

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आपकी हथकरघा साड़ी किसने बनाई? तेलंगाना के यादाद्रि भुवनागिरी में अब जवाब QR कोड स्कैन करके मिलेगा

तेलंगाना के यादाद्रि भुवनागिरी जिले ने हथकरघा उत्पादों के लिए QR कोड आधारित ऑथेंटिकेशन सिस्टम शुरू किया है। नेशनल हैंडलूम डे 2026 के मौके पर भोंगीर में इस पहल का ऐलान हुआ। अब ग्राहक QR कोड स्कैन करके हर प्रोडक्ट के पीछे के बुनकर की पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं।

बुनकर की दुनिया से सीधा कनेक्शन

QR कोड सिस्टम, जिसे Jupitex AI ने बनाया है, सिर्फ प्रोडक्ट की असली पहचान ही नहीं देता। कोड स्कैन करने पर ग्राहक बुनकर का नाम, पता, जियो-टैग नंबर और प्रोडक्ट में इस्तेमाल हुए धागे की तकनीकी जानकारी भी देख सकते हैं। इस पहल से न केवल हथकरघा प्रोडक्ट्स की असली पहचान सुनिश्चित होती है, बल्कि बुनकरों को मार्केट में पहचान और सम्मान भी मिलता है।

पोचमपल्ली के बुनकरों के लिए नई शुरुआत

QR कोड सिस्टम के साथ-साथ पोचमपल्ली में एक डिजाइन रिसोर्स सेंटर भी बनाया जाएगा। पोचमपल्ली अपनी इकट बुनाई के लिए मशहूर है। यह सेंटर पारंपरिक कारीगरी को मॉडर्न डिजाइन के साथ जोड़ने का काम करेगा ताकि बुनकर बदलते बाजार के ट्रेंड्स को अपनाने में सक्षम हों। इस प्रोजेक्ट को यूनाइटेड वे हैदराबाद और यादाद्रि भुवनागिरी जिले के हैंडलूम और टेक्सटाइल विभाग के सहयोग से चलाया जाएगा।

पद्मश्री पुरस्कार विजेता चिंतकिंदी मल्लेशम इस पहल का मार्गदर्शन करेंगे। बुनकरों को ट्रेंड फोरकास्ट, पारंपरिक डिजाइनों के आर्काइव्स और मार्केट लिंकेज जैसे संसाधन दिए जाएंगे। यहां डिजाइन मार्किंग, डाईंग, जैक्वार्ड बुनाई और नेचुरल डाईंग जैसी ट्रेनिंग भी दी जाएगी। खास तौर पर दिव्यांग बुनकरों के लिए मोढ़ा पैडल मशीन और ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी। बुनकरों की मदद के लिए आई हेल्थ कैंप भी लगाए जाएंगे।

क्यों है ये पहल खास

टेक्नोलॉजी और डिजाइन स्किल डेवलपमेंट को साथ लाने वाली इस पहल से यादाद्रि भुवनागिरी के हथकरघा सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्राहक सीधे बुनकरों से जुड़ सकेंगे और बुनकरों को मॉडर्न टूल्स और ट्रेनिंग मिलेगी। इससे पारंपरिक कारीगरी को बचाने और उसे आज के बाजार में प्रासंगिक बनाने में मदद मिलेगी।

इन प्रयासों के जरिए तेलंगाना दिखा रहा है कि कैसे टेक्नोलॉजी और परंपरा मिलकर कारीगरों की जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं और सदियों पुरानी विरासत को बचा सकते हैं।

स्रोत: The Hindu

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