तमिलनाडु लाएगा नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी, निवेशकों को देंगे खास इंसेंटिव्स
तमिलनाडु लाएगा नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी, निवेश बढ़ाने पर जोर चेन्नई: तमिलनाडु सरकार जल्द ही नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का ऐलान करने वाली है।
चेन्नई: तमिलनाडु सरकार जल्द ही नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का ऐलान करने वाली है। इसका मकसद घरेलू और विदेशी निवेशकों को खास इंसेंटिव्स देकर राज्य में निवेश के लिए आकर्षित करना है।
सरकार "तमिलनाडु इन्वेस्टर प्रमोशन कमीशन" (TIPC) बनाएगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। इसका उद्देश्य मल्टीनेशनल कंपनियों को राज्य में लाना है। गुरुवार को विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2036 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए इंडस्ट्रियल ग्रोथ और वर्कर्स की भलाई पर फोकस किया जाएगा।
सरकार "ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस" को बेहतर बनाने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और ऑल-सेक्टर प्लेटफॉर्म में बदलने की योजना बना रही है। इससे कंपनियों को बिना किसी प्रशासनिक देरी के तेज़ी से मंजूरी मिल सकेगी।
नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी में पुरानी नीतियों की निरंतरता बनी रहेगी, लेकिन आर्थिक स्थिरता और इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर खास ध्यान दिया जाएगा। TIPC उन कंपनियों को फास्ट-ट्रैक परमिशन दिलाने में मदद करेगा जो ₹200 करोड़ से ज्यादा का निवेश करेंगी या कम से कम 5,000 लोगों को रोजगार देंगी।
इसके अलावा, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए भी परमिशन की प्रक्रिया तेज़ करने के उपाय किए जाएंगे। इससे राज्य के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को और मजबूती मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तमिलनाडु सरकार नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी क्या चाहती है?
तमिलनाडु सरकार नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के जरिए घरेलू और विदेशी निवेशकों को खास इंसेंटिव्स देकर राज्य में निवेश बढ़ाना चाहती है। इसका मकसद 2036 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
तमिलनाडु इन्वेस्टर प्रमोशन कमीशन (TIPC) क्या करेगा?
TIPC मल्टीनेशनल कंपनियों को राज्य में लाने के लिए काम करेगा। यह ₹200 करोड़ से ज्यादा का निवेश करने वाली कंपनियों या कम से कम 5,000 लोगों को रोजगार देने वाली कंपनियों को फास्ट-ट्रैक परमिशन दिलाने में मदद करेगा।
सिंगल-विंडो सिस्टम में क्या बदलाव आएंगे?
सरकार सिंगल-विंडो सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और सभी सेक्टरों के लिए एक प्लेटफॉर्म में बदलने की योजना बना रही है। इससे कंपनियों को बिना किसी प्रशासनिक देरी के तेज़ी से मंजूरी मिल सकेगी।
छोटे और मझोले कारोबार (MSMEs) के लिए क्या सुविधाएं होंगी?
माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए परमिशन की प्रक्रिया तेज़ करने के उपाय किए जाएंगे, जिससे राज्य के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।
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