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नेपाल बाढ़ में पांच फीट बचा जान, तमिलनाडु महिला की जीवंत कहानी

नेपाल की भयानक बाढ़ में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गईं तमिलनाडु की शिवरंजनी सहित 21 यात्री बचे। सड़क के मोड़ ने बचाई जान।

नेपाल बाढ़ में पांच फीट बचा जान, तमिलनाडु महिला की जीवंत कहानी
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नेपाल बाढ़: 'लगा था सब खत्म हो गया, 5 फीट के अंतर से बची जान', नेपाल बाढ़ से बचकर लौटीं शिवरंजनी ने सुनाई आपबीती

जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ पांच फीट का फासला

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली की रहने वाली शिवरंजनी शनिवार को घर लौट आईं। वो नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बच गईं, जिसमें उनकी गाड़ी चीन बॉर्डर इमिग्रेशन पोस्ट से महज तीन किलोमीटर दूर फंस गई थी। शिवरंजनी समेत 21 तमिलनाडु के लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और स्पेशल फ्लाइट से चेन्नई पहुंचे।

तिमुरे में फंसे जब पानी और मलबा बहकर आया

यात्रा बड़े जोश से शुरू हुई थी, लेकिन स्याब्रूबेंसी-केरुंग रूट पर हालात बिगड़ते गए। तिमुरे में शिवरंजनी की गाड़ी भारी ट्रैफिक और मलबे में दूसरी गाड़ियों के साथ फंस गई। पहाड़ों से अचानक पानी, कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थर तेजी से नीचे की तरफ बहने लगे।

उनकी गाड़ी तीन तरफ से घिर गई, भागना लगभग नामुमकिन हो गया। तेज धारा को अपने चारों ओर देखकर शिवरंजनी को लगा कि सब खत्म हो गया और यही उनका आखिरी दिन है। जब कोई रास्ता नहीं बचा तो यात्रियों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव से प्रार्थना करनी शुरू कर दी।

सड़क के मोड़ ने बचाई जान

उनकी गाड़ी सड़क के एक मोड़ पर खड़ी थी जहां पानी का मुख्य बहाव घूमकर दूसरी तरफ निकल गया। अगर गाड़ी सिर्फ पांच फीट आगे या पीछे होती तो तेज धारा उसे पूरी तरह बहा ले जाती, शिवरंजनी ने बताया। उसी पांच फीट की दूरी ने सबकी जान बचाई।

ग्रुप दाहिनी तरफ का दरवाजा खोलकर भागने में कामयाब रहा। लेकिन खतरा तब भी बना था: बारिश में फिसलन भरी, कीचड़ वाली पहाड़ी चढ़ना बेहद मुश्किल साबित हुआ।

साथी यात्री बने रक्षक

मायावरम के रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगोडी ने शानदार हिम्मत दिखाई, शिवरंजनी ने बताया। खुद सुरक्षित जगह पहुंचने के बाद रत्नाकुमार ने अपनी पत्नी की साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया और उन महिलाओं को ऊपर खींचा जो अपने आप ढलान नहीं चढ़ सकती थीं। उस मुसीबत के वक्त वो दोनों फरिश्तों से कम नहीं थे, उन्होंने कहा।

वापस आने पर शिवरंजनी ने सरकार, रेस्क्यू टीमों और सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उनकी सलामती के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि इस मुसीबत में उनका असली पासपोर्ट और दूसरा सामान खो गया और प्रशासन से अनुरोध किया कि जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करके दस्तावेज उनके घर तक पहुंचा दें। उन्होंने भगवान भोलेनाथ की बड़ी कृपा और सरकार की तेज कार्रवाई को श्रेय दिया जिससे वो अपने परिवार के पास सुरक्षित लौट सकीं।

स्रोत: Patrika

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल की बाढ़ में शिवरंजनी की गाड़ी कहां फंसी थी?

शिवरंजनी की गाड़ी स्याब्रूबेंसी-केरुंग रूट पर तिमुरे में भारी ट्रैफिक और मलबे के बीच फंस गई थी। यह चीन बॉर्डर इमिग्रेशन पोस्ट से महज तीन किलोमीटर दूर था।

शिवरंजनी की जान कैसे बची?

उनकी गाड़ी सड़क के एक मोड़ पर खड़ी थी जहां बाढ़ का पानी मुख्य बहाव घूमकर दूसरी तरफ निकल गया। अगर गाड़ी सिर्फ पांच फीट आगे या पीछे होती तो पानी उसे बहा ले जाता।

शिवरंजनी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर कहां से गई थीं?

वह तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से थीं। उन्हें बचाने के लिए एक स्पेशल फ्लाइट चलाई गई जो उन्हें चेन्नई ले आई।

पहाड़ी से चढ़ते समय लोगों की मदद किसने की?

मायावरम के रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगोडी ने महिलाओं को बचाया। रत्नाकुमार ने अपनी पत्नी की साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल करके उन महिलाओं को ऊपर खींचा जो खुद ढलान नहीं चढ़ सकती थीं।

बाढ़ में शिवरंजनी को क्या नुकसान हुआ?

इस मुसीबत में उनका असली पासपोर्ट और दूसरा सामान खो गया। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जरूरी कागजी कार्रवाई करके दस्तावेज उनके घर तक भेज दें।

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