तमिलनाडु बजट में पश्चिमी जिलों के लिए टेक्सटाइल और एनर्जी प्रोजेक्ट्स का ऐलान
तमिलनाडु बजट: पश्चिमी जिलों को टेक्सटाइल, टूरिज्म और एनर्जी प्रोजेक्ट्स से फायदा तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों, जैसे कोयंबटूर, तिरुपुर और कृष्णागिरी, को राज्य के बजट 2026-27 में बड़े फायदे मिलने वाले
तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों, जैसे कोयंबटूर, तिरुपुर और कृष्णागिरी, को राज्य के बजट 2026-27 में बड़े फायदे मिलने वाले हैं। वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने तमिलगा वेत्री कझगम सरकार का पहला बजट पेश करते हुए टेक्सटाइल, रिन्यूएबल एनर्जी और इको-टूरिज्म में बड़े निवेशों का ऐलान किया।
टेक्सटाइल सेक्टर को ग्रीन पुश
तिरुपुर, जो दुनियाभर में गारमेंट एक्सपोर्ट के लिए जाना जाता है, में पर्यावरण के अनुकूल टेक्सटाइल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया जाएगा। इसके लिए तिरुपुर टेक्सटाइल्स टेक्नोलॉजी सेंटर (TTTC) बनाया जाएगा, जिस पर ₹10 करोड़ खर्च होंगे। इसके अलावा, ₹60 करोड़ की लागत से एक डिजाइन इंस्टीट्यूट भी बनाया जाएगा, जो इंडस्ट्री और एकेडमिक पार्टनर्स के साथ मिलकर टेक्निकल टेक्सटाइल्स पर काम करेगा। टेक्निकल टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन स्कीम के तहत MSMEs और टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स को इंटरनेशनल एक्सपोजर, टेक्निकल ट्रेनिंग और इनोवेशन सपोर्ट मिलेगा।
रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स का विस्तार
एनर्जी सेक्टर को मजबूती देने के लिए कोयंबटूर-अरियालूर 765 kV ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत ₹4,000 करोड़ की लागत से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, ₹1,187 करोड़ के फेज-2 ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर प्रोजेक्ट और ₹1,640 करोड़ के विरुधुनगर-कोयंबटूर 765 kV ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को तेज़ी से पूरा किया जाएगा। ये प्रोजेक्ट तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्से से रिन्यूएबल एनर्जी को ट्रांसमिट करने में मदद करेंगे और राज्य की पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाएंगे।
टूरिज्म और मानव-पशु संघर्ष का समाधान
राज्य में नेचर-बेस्ड टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु इको-टूरिज्म मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत ट्रेकिंग रूट्स, वाइल्डलाइफ सफारी और इको-फ्रेंडली रहने की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कावेरी नदी को होगेनक्कल से श्रीरंगम तक कवर करते हुए ₹53 करोड़ की योजना के तहत रिवर टूरिज्म को प्रमोट किया जाएगा।
मानव-पशु संघर्ष से निपटने के लिए ₹20 करोड़ का बजट रखा गया है। इसके तहत सोलर फेंस, स्टील वायर रोप फेंसिंग और GPS-इनेबल्ड गाड़ियां लगाई जाएंगी। यह योजना कोयंबटूर, धर्मपुरी और नीलगिरी जैसे पश्चिमी जिलों के 100 संघर्ष-प्रभावित गांवों में लागू की जाएगी।
सोशल वेलफेयर और शिक्षा
सेलम समेत पांच जिलों में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए ‘नंबिक्कई इलम’ नाम से संस्थान बनाए जाएंगे। ₹4 करोड़ के बजट से बनने वाले ये सेंटर 3 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों को स्पेशल एजुकेशन, अर्ली इंटरवेंशन और वोकेशनल ट्रेनिंग देंगे। शुरुआत में ये डे स्कूल के तौर पर 50 बच्चों के लिए काम करेंगे और बाद में इनमें रेजिडेंशियल सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।
क्यों है ये अहम
ये योजनाएं तमिलनाडु सरकार की ओर से पश्चिमी जिलों की आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों को हल करने की कोशिश को दिखाती हैं। टेक्सटाइल और एनर्जी में निवेश राज्य को इंडस्ट्रियल लीडर के तौर पर मजबूत करेगा, जबकि इको-टूरिज्म और संघर्ष समाधान योजनाएं सतत विकास की ओर सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। बजट में ग्रोथ, समावेशिता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है।
स्रोत: The Hindu
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