बहराइच में 28 साल पुराने हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद की सजा
बहराइच में 28 साल पुराने हत्याकांड में दोषी अंगद शुक्ला उर्फ करुणेश को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
बहराइच में 28 साल पुराने हत्याकांड में दोषी अंगद शुक्ला उर्फ करुणेश को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पांचवें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील प्रसाद की कोर्ट ने दोषी को आजीवन कारावास के साथ 1,02,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला "ऑपरेशन कन्विक्शन" के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसमें पुराने मामलों में दोषी अभियुक्तों को तेजी से सजा दिलाने पर फोकस किया जा रहा है।
हत्याकांड की घटना 19 सितंबर 1998 को हरदी थाना क्षेत्र के सिकन्दरपुर गांव में हुई थी। दोपहर करीब ढाई बजे अंगद शुक्ला अपने हाथ में फरसा लेकर महानंद मिश्र के घर के बरामदे में पहुंचा, जहां वे तख्त पर लेटे थे। अंगद ने फरसे से महानंद की गर्दन पर वार कर उनकी हत्या कर दी। घटना के समय महानंद का भतीजा पास में बैठा था, जिसके चिल्लाने पर परिवार के अन्य लोग मौके पर पहुंचे। अंगद ने वहां मौजूद लोगों को भी जान से मारने की धमकी दी थी।
वादी राजितराम मिश्र की शिकायत पर थाना हरदी में मुकदमा संख्या 165/1998 धारा 302, 506, 120बी के तहत दर्ज किया गया। तत्कालीन थाना प्रभारी बी.आर. बौद्ध ने जांच की और 13 अक्टूबर 1998 को धारा 302 और 506 के तहत आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। सितंबर 1999 में कोर्ट ने आरोप तय किए थे। पुलिस के मुताबिक यह हत्या 1990 से चली आ रही पुरानी पारिवारिक रंजिश का नतीजा थी।
पुलिस महानिदेशक के आदेश और बहराइच के एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देशन में चलाए जा रहे "ऑपरेशन कन्विक्शन" के तहत पुलिस और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के बाद 22 अगस्त को यह फैसला आया। कोर्ट ने धारा 302 के तहत उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माना, तथा धारा 506 के तहत एक साल की सश्रम कैद और 2,000 रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहराइच में 28 साल पुराने हत्याकांड में किसे सजा दी गई है?
अंगद शुक्ला उर्फ करुणेश को उम्रकैद की सजा दी गई है। उन्होंने 19 सितंबर 1998 को सिकन्दरपुर गांव में महानंद मिश्र की फरसे से हत्या कर दी थी।
कोर्ट ने दोषी को कुल कितनी सजा और जुर्माना दिया है?
कोर्ट ने उम्रकैद की सजा के साथ 1,02,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें धारा 302 के तहत उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माना, तथा धारा 506 के तहत एक साल की सश्रम कैद और 2,000 रुपये जुर्माना शामिल है।
हत्या कब और कहां हुई थी?
हत्या 19 सितंबर 1998 को दोपहर करीब ढाई बजे बहराइच के हरदी थाना क्षेत्र के सिकन्दरपुर गांव में महानंद मिश्र के घर के बरामदे में हुई थी।
इस मामले को इतनी तेजी से सजा तक पहुंचाने का क्या कारण है?
यह फैसला 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के विशेष अभियान के तहत आया है। इस अभियान में पुराने मामलों में दोषी अभियुक्तों को तेजी से सजा दिलाने पर फोकस किया जा रहा है।
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