स्पेसएक्स का नया सैटेलाइट NanoTritium से ऊर्जा की खोज में जुटा
SpaceX के नए लॉन्च ने उठाया सवाल: सैटेलाइट्स को ऊर्जा कहां से मिलती है? स्पेसएक्स का नया सैटेलाइट लॉन्च और ऊर्जा के नए स्रोतों की खोज 7 जुलाई को SpaceX ने कैलिफोर्निया के वैंडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से
SpaceX के नए लॉन्च ने उठाया सवाल: सैटेलाइट्स को ऊर्जा कहां से मिलती है?
स्पेसएक्स का नया सैटेलाइट लॉन्च और ऊर्जा के नए स्रोतों की खोज
7 जुलाई को SpaceX ने कैलिफोर्निया के वैंडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से अपने फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए BOHR नाम का सैटेलाइट लॉन्च किया। इसे फ्लोरिडा की कंपनी सिटी लैब्स ने बनाया है। इस सैटेलाइट का मकसद एक नए पावर सोर्स NanoTritium को पहली बार अंतरिक्ष में टेस्ट करना है।
ये प्रयोग अंतरिक्ष में नई ऊर्जा तकनीकों के रास्ते खोल सकता है, खासकर उन जगहों पर जहां सूरज की रोशनी कम या बिल्कुल नहीं मिलती।
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NanoTritium कैसे काम करता है?
NanoTritium एक बेटावोल्टाइक माइक्रोपावर सोर्स है, जो ट्रिटियम (हाइड्रोजन का रेडियोएक्टिव रूप) के रेडियोधर्मी क्षय के दौरान निकलने वाले बीटा पार्टिकल्स से बिजली बनाता है। इन पार्टिकल्स को एक सेमीकंडक्टर डिवाइस के जरिए सीधे इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदला जाता है।
ये तकनीक NASA के Voyager स्पेसक्राफ्ट में इस्तेमाल होने वाले रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTG) से अलग है। RTG प्लूटोनियम के क्षय से निकलने वाली गर्मी को बिजली में बदलता है।
हालांकि BOHR सैटेलाइट मुख्य रूप से सोलर पैनल्स से चलता है, लेकिन इस मिशन का मकसद कम रोशनी वाले हालात में बेटावोल्टाइक सिस्टम्स की क्षमता को परखना है। सिटी लैब्स का मानना है कि ये सिस्टम चांद के दक्षिणी ध्रुव के गड्ढों जैसे अंधेरे इलाकों में इस्तेमाल हो सकते हैं, जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती।
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सोलर पावर के विकल्प क्यों खोजे जा रहे हैं?
अभी ज्यादातर सैटेलाइट्स सोलर पैनल्स और लिथियम-आयन बैटरी पर निर्भर हैं। धरती की कक्षा में सोलर सेल्स करीब 30% तक एफिशिएंसी हासिल कर सकते हैं, क्योंकि सूरज से लगभग 1.4 किलोवाट प्रति वर्ग मीटर ऊर्जा मिलती है। लेकिन सोलर पावर की अपनी सीमाएं हैं।
जैसे-जैसे स्पेसक्राफ्ट सूरज से दूर जाते हैं, जैसे कि बृहस्पति से आगे, सोलर फ्लक्स कम हो जाता है और सोलर पैनल्स बेअसर हो जाते हैं। इसके अलावा, सोलर पैनल्स रेडिएशन और गर्मी के कारण धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं, जिससे उन्हें बड़ा बनाना पड़ता है ताकि वे काम करते रहें। इन चुनौतियों के कारण बेटावोल्टाइक सिस्टम्स जैसे विकल्पों की खोज हो रही है, ताकि लंबे समय तक चलने वाले मिशन के लिए भरोसेमंद ऊर्जा मिल सके।
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Voyager से सीख: न्यूक्लियर पावर की अहमियत
NASA के Voyager मिशन, जो 1977 में लॉन्च हुए थे, गहरे अंतरिक्ष में न्यूक्लियर पावर की अहमियत को दिखाते हैं। Voyager 1 और Voyager 2 दोनों RTG का इस्तेमाल करते हैं, जो प्लूटोनियम के क्षय से निकलने वाली गर्मी को बिजली में बदलते हैं। हालांकि, ये सिस्टम हर साल करीब 4 वॉट पावर खोते हैं, जिससे NASA को कुछ इंस्ट्रूमेंट्स बंद करने पड़ते हैं।
Voyager 1, जो अब अंतरिक्ष में सबसे दूर मानव-निर्मित ऑब्जेक्ट है, न्यूक्लियर पावर की लंबी उम्र और भरोसेमंद क्षमता को दिखाता है। लेकिन इसकी घटती ऊर्जा भविष्य के मिशन के लिए NanoTritium जैसी नई ऊर्जा तकनीकों की जरूरत को भी रेखांकित करती है।
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अंतरिक्ष ऊर्जा का भविष्य
BOHR मिशन बेटावोल्टाइक तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। ये दिखाता है कि स्पेसक्राफ्ट मुश्किल हालात में कैसे काम कर सकते हैं। अगर ये सफल होता है, तो NanoTritium पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का पूरक बन सकता है या उन्हें बदल भी सकता है।
जैसे-जैसे स्पेस एजेंसियां और प्राइवेट कंपनियां अंतरिक्ष की नई सीमाओं को छूने की कोशिश कर रही हैं, ऐसे इनोवेशन कठिन हालात में काम करने की चुनौतियों को हल करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्पेसएक्स का नया सैटेलाइट BOHR क्या है?
BOHR एक सैटेलाइट है जिसे स्पेसएक्स ने 7 जुलाई को लॉन्च किया, जिसका मकसद NanoTritium नामक नए पावर सोर्स का परीक्षण करना है।
NanoTritium कैसे काम करता है?
NanoTritium एक बेटावोल्टाइक माइक्रोपावर सोर्स है, जो ट्रिटियम के रेडियोधर्मी क्षय से निकलने वाले बीटा पार्टिकल्स से बिजली बनाता है।
सोलर पावर के विकल्प क्यों खोजे जा रहे हैं?
सोलर पावर की सीमाएं हैं, जैसे कि सूरज से दूर जाने पर इसकी एफिशिएंसी कम हो जाती है। इसलिए बेटावोल्टाइक सिस्टम्स जैसे विकल्पों की खोज हो रही है।
BOHR मिशन का महत्व क्या है?
BOHR मिशन बेटावोल्टाइक तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो मुश्किल हालात में स्पेसक्राफ्ट के काम करने की क्षमता को दिखाता है।
Voyager मिशन से हमें क्या सीखने को मिला?
Voyager मिशन ने न्यूक्लियर पावर की अहमियत को दिखाया है और यह दर्शाता है कि नई ऊर्जा तकनीकों की जरूरत है जैसे NanoTritium।
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