दक्षिण पूर्व एशिया में बुजुर्गों की असिस्टेड लिविंग सर्विस तेजी से बढ़ रही है
सिंगापुर और थाईलैंड में बुजुर्गों के लिए प्राइवेट असिस्टेड लिविंग का विस्तार हो रहा है। परिवार की जगह इन सेवाओं को चुन रहे हैं रिटायर लोग।
दक्षिण पूर्व एशिया में बढ़ती संख्या में रिटायर हुए लोग परिवार की देखभाल की जगह प्राइवेट असिस्टेड लिविंग चुन रहे हैं, जिससे इस सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
सिंगापुर के बुकित तिमाह इलाके में सेंट बर्नाडेट लाइफस्टाइल विलेज में 92 साल की फंग ने हाल ही में अपना जन्मदिन मनाया। साथ में दूसरे रहने वाले लोग और केयरटेकर थे। फंग ने अपने बच्चों के इंग्लैंड जाने के ऑफर को ठुकरा दिया था। "मैं यहां बहुत खुश हूं," उन्होंने सबके सामने कहा जब स्टाफ आठ रहने वालों को व्हीलचेयर पर डाइनिंग टेबल तक ले आए।
असिस्टेड लिविंग क्यों बढ़ रही है
ये जगहें उन बुजुर्गों के लिए ऑप्शन हैं जो अकेले नहीं रह सकते लेकिन उन्हें नर्सिंग होम जैसी पूरी मेडिकल देखरेख की जरूरत भी नहीं है। स्टाफ रोजमर्रा के कामों में मदद करता है जिसमें दवाई देना और पत्र-व्यवहार शामिल है। कुछ जगहों पर याददाश्त में कमी वाले लोगों के लिए खास यूनिट भी हैं।
ये मॉडल सिंगापुर से लेकर थाईलैंड तक प्राइवेट ऑपरेटर्स और लग्जरी रिसॉर्ट्स को अपनी ओर खींच रहा है। ये लोग उन रिटायर लोगों की डिमांड पर दांव लगा रहे हैं जो अपनी देखभाल के फैसले खुद लेना चाहते हैं। फंग का मामला ये दिखाता है कि ऐसे बुजुर्ग जिनके बच्चे विदेश में हैं या जो परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहते, लेकिन अपनी लाइफ की क्वालिटी से कोई समझौता भी नहीं करना चाहते।
ये बदलाव दक्षिण पूर्व एशिया में पारिवारिक ढांचे और बुजुर्गों की देखभाल को लेकर सोच में बड़े बदलाव को दिखाता है। जिस पीढ़ी ने इस इलाके की इकोनॉमिक सफलता बनाई, अब वो परंपरा की जगह आजादी को तरजीह देने वाली सर्विस चाहती है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
असिस्टेड लिविंग सर्विस आखिर क्या होती है?
असिस्टेड लिविंग वो जगहें हैं जहां बुजुर्ग अकेले नहीं रह सकते लेकिन उन्हें नर्सिंग होम जैसी पूरी मेडिकल देखरेख की जरूरत भी नहीं। यहां स्टाफ रोजमर्रा के कामों में मदद करता है जैसे दवाई देना और पत्र-व्यवहार। कुछ जगहों पर याददाश्त में कमी वाले लोगों के लिए खास यूनिट भी होती हैं।
दक्षिण पूर्व एशिया में ये सर्विस तेजी से क्यों बढ़ रही है?
सिंगापुर से थाईलैंड तक प्राइवेट ऑपरेटर्स और लग्जरी रिसॉर्ट्स इस सेक्टर में निवेश कर रहे हैं क्योंकि रिटायर लोग अपनी देखभाल के फैसले खुद लेना चाहते हैं। खासकर जिनके बच्चे विदेश में हैं या जो परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहते, वो ये सर्विस चुन रहे हैं।
फंग का उदाहरण क्या बताता है?
92 साल की फंग सिंगापुर के सेंट बर्नाडेट लाइफस्टाइल विलेज में रहती हैं। उन्होंने अपने बच्चों का इंग्लैंड जाने का ऑफर ठुकरा दिया क्योंकि वो यहां बहुत खुश हैं। उनका मामला दिखाता है कि बुजुर्ग लाइफ की क्वालिटी से कोई समझौता किए बिना आजादी चाहते हैं।
ये बदलाव दक्षिण पूर्व एशिया के लिए क्या मायने रखता है?
ये परंपरागत पारिवारिक ढांचे और बुजुर्गों की देखभाल को लेकर सोच में बड़े बदलाव को दिखाता है। इस इलाके की आर्थिक सफलता बनाने वाली पीढ़ी अब परंपरा की जगह आजादी और अपनी पसंद की सर्विस चाहती है।
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