बांदा जेल में रक्षाबंधन पर कैदियों से मिले परिवार के लोग
बांदा जिला जेल में रक्षाबंधन के मौके पर एक खास नजारा देखने को मिला, जब जेल में बंद कैदियों से उनकी बहनें और परिवार के लोग मिलने पहुंचे।
बांदा जिला जेल में रक्षाबंधन के मौके पर एक खास नजारा देखने को मिला, जब जेल में बंद कैदियों से उनकी बहनें और परिवार के लोग मिलने पहुंचे। सरकार के निर्देश पर जेल प्रशासन ने इस पावन पर्व पर महिला और पुरुष बंदियों को उनके परिजनों से मिलने की खास व्यवस्था की। बहनों ने जेल में अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की दुआ मांगी।
जेल प्रशासन ने बताया कि जिला जेल की कुल 12 पालियों में 208 पुरुष कैदियों से मिलने के लिए 324 महिलाएं और 120 बच्चे पहुंचे। इसके साथ ही एक महिला कैदी से मिलने एक पुरुष भी आया। कुल मिलाकर 445 परिजनों ने इस दिन अपने प्रियजनों से मुलाकात की और राखी बांधने की खास व्यवस्था का फायदा उठाया।
जेल परिसर में माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए संगीत का भी इंतजाम किया गया था। बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधने के साथ मिठाई भी खिलाई और पर्व की खुशियां एक-दूसरे के साथ बांटीं। कई भाई-बहन एक-दूसरे को देखकर भावुक हो गए। जेल प्रशासन ने भीड़ को काबू में रखने के लिए बैचवार मुलाकात की व्यवस्था की और बाहर शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया।
इस मौके पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक शशि कान्त सिंह ने सभी कैदियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि भाई-बहन के प्यार, सम्मान, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी है। इस दौरान कारापाल संतोष रावत, उप कारापाल रंजीत कुमार यादव और अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बांदा जेल में रक्षाबंधन पर कितने लोग मिलने आए?
बांदा जिला जेल में रक्षाबंधन के दिन कुल 445 परिजन अपने प्रियजनों से मिलने आए। इनमें 324 महिलाएं, 120 बच्चे और एक पुरुष शामिल थे। ये लोग 208 पुरुष कैदियों और एक महिला कैदी से मिलने गए।
जेल प्रशासन ने रक्षाबंधन पर कैसी व्यवस्था की?
जेल प्रशासन ने कैदियों को उनके परिवार के लोगों से मिलने की खास व्यवस्था की। बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने दी गई। भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए 12 पालियों में बैचवार मुलाकात की व्यवस्था की गई और माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए संगीत का भी इंतजाम किया गया।
जेल अधीक्षक ने रक्षाबंधन के बारे में क्या कहा?
वरिष्ठ जेल अधीक्षक शशि कान्त सिंह ने कहा कि रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि भाई-बहन के प्यार, सम्मान, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का संदेश है। उन्होंने सभी कैदियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
कितने पुरुष कैदियों से परिवार के लोग मिले?
बांदा जिला जेल की 12 पालियों में कुल 208 पुरुष कैदियों से परिवार के लोग मिले। इसके अलावा एक महिला कैदी से भी एक पुरुष मिलने आया।
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