श्रावस्ती के स्कूल में हिंदी दिवस पर सुलेख प्रतियोगिता, रजनी को पहला पुरस्कार
श्रावस्ती के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल जमुनहा में हिंदी दिवस के मौके पर सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें कक्षा 6 की छात्रा रजनी ने पहला स्थान हासिल किया।
श्रावस्ती के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल जमुनहा में हिंदी दिवस के मौके पर सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें कक्षा 6 की छात्रा रजनी ने पहला स्थान हासिल किया।
इस भव्य सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन हिंदी दिवस के पावन अवसर पर बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी सुंदर लिखावट का हुनर दिखाया।
प्रतियोगिता का मुख्य विषय "समय का सदुपयोग" रखा गया था। इस विषय पर छात्र-छात्राओं ने अपनी सुंदर हस्तलिपि में प्रेरणादायक संदेश लिखे। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच बच्चों ने अपनी कलात्मक क्षमता का जबरदस्त प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कक्षा 6 की रजनी ने हासिल किया। द्वितीय स्थान कक्षा 8 की विद्या गुप्ता को मिला, जबकि तृतीय स्थान कक्षा 6 की मिष्ठी मोदनवाल ने हासिल किया।
प्रतियोगिता के समापन पर विजयी प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सराहा गया और शुभकामनाएं दी गईं। विद्यालय के शिक्षकों ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा और राष्ट्र की शान है। उन्होंने बताया कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से न केवल बच्चों की लिखावट में सुधार आता है, बल्कि उनमें अपनी भाषा के प्रति प्रेम और गौरव की भावना भी जागृत होती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का समस्त स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंदी दिवस पर स्कूल में क्या प्रतियोगिता हुई?
श्रावस्ती के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल जमुनहा में हिंदी दिवस के मौके पर सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बच्चों को सुंदर हस्तलिपि में अपने कौशल का प्रदर्शन करने का मौका मिला।
सुलेख प्रतियोगिता में कौन जीता?
प्रथम स्थान कक्षा 6 की रजनी ने जीता। द्वितीय स्थान कक्षा 8 की विद्या गुप्ता को मिला और तृतीय स्थान कक्षा 6 की मिष्ठी मोदनवाल ने हासिल किया।
प्रतियोगिता का विषय क्या था?
प्रतियोगिता का मुख्य विषय 'समय का सदुपयोग' रखा गया था। छात्र-छात्राओं ने इसी विषय पर अपनी सुंदर हस्तलिपि में प्रेरणादायक संदेश लिखे।
शिक्षकों ने इस तरह की प्रतियोगिताओं के बारे में क्या कहा?
शिक्षकों ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से न केवल बच्चों की लिखावट में सुधार आता है, बल्कि उनमें अपनी भाषा के प्रति प्रेम और गौरव की भावना भी जागृत होती है।
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