संजय दत्त ने याद किए जेल के दिन, हथकड़ी देख भावुक हुए पिता सुनील दत्त; बोले- अंदर से टूट रहा था
‘शेखर टुनाइट’ में संजय दत्त ने बताया कि पुलिस के हथकड़ी लगाने पर पिता सुनील दत्त की आंखों में आंसू आ गए थे। उन्होंने कहा कि वे बाहर से मजबूत दिखे, पर अंदर से टूट रहे थे।
संजय दत्त ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को याद किया है। अभिनेता ने शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ में जेल के दिनों पर बात की। उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने उनके पिता सुनील दत्त के सामने उन्हें हथकड़ी लगाई, तो पिता की आंखों में आंसू आ गए थे। संजय के मुताबिक उस वक्त वे पिता के सामने मजबूत बने रहे, जबकि अंदर से वे खुद बुरी तरह टूट रहे थे।
हथकड़ी देख सदमे में आ गए थे सुनील दत्त
संजय दत्त ने कहा कि जब पहली बार पुलिस ने उन्हें हथकड़ी लगाई, तो उनके पिता सदमे में आ गए थे। आंखों में आंसू लिए सुनील दत्त ने पुलिस से पूछा कि उनके बेटे के साथ यह क्या किया जा रहा है।
संजय ने बताया कि उन्होंने पिता को गले लगाया और समझाया कि यह सिर्फ एक प्रक्रिया है, इसलिए वे परेशान न हों। उन्होंने कहा कि असल में यह सब उन्हें अंदर से खत्म कर रहा था, लेकिन पिता के लिए उन्हें मजबूत रहना था। अभिनेता के मुताबिक पूरे मुकदमे के दौरान वे इसी तरह आगे बढ़ते रहे, और यह सिलसिला 24 साल चला।
जेल अधिकारियों को लगा था कि टूट जाएंगे
संजय दत्त ने जेल के दिनों का एक और किस्सा सुनाया। उनके मुताबिक अधिकारियों को लगता था कि एक बड़े फिल्म स्टार से स्टारडम की सुविधाएं छीन ली जाएंगी, तो वह मानसिक रूप से टूट जाएगा। संजय ने कहा कि ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने जेल में साधारण हालात को स्वीकार किया और खुद को किसी से ऊपर नहीं समझा।
शो में शेखर सुमन ने कहा कि संजय को अंडा सेल में रखा गया, फिर भी उन्होंने अपनी मानसिक स्थिति नहीं खोई। जब शेखर ने पूछा कि उन्हें सबसे कमजोर पल कौन सा लगा, तो संजय ने कहा कि उन्हें कभी कमजोर महसूस नहीं हुआ। ताकत कहां से मिली, इस सवाल पर उन्होंने ‘हर हर महादेव’ कहा।
‘सिगरेट नहीं मिलेगी’ पर बीड़ी वाला जवाब
संजय दत्त ने बताया कि एक अधिकारी ने उनसे कहा था कि यहां सिगरेट नहीं मिलेगी और पूछा कि अब वे क्या करेंगे। इस पर संजय ने जवाब दिया, “सर, यहां बीड़ी तो मिलेगी ना?” उनके मुताबिक अधिकारी यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि सुविधाएं छिनने के बाद वे टूट जाएंगे, लेकिन वे हालात के हिसाब से खुद को ढालते चले गए।
1993 के बाद चला लंबा कानूनी दौर
संजय दत्त की जिंदगी में 1993 के बाद कानूनी मुश्किलों का लंबा दौर चला। उन्हें आतंकवाद के आरोपों से बरी किया गया, लेकिन अवैध हथियार रखने के मामले में आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया। रिपोर्टों के अनुसार वे अलग-अलग दौर में करीब 18 महीने विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में रहे और अक्टूबर 1995 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।
2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा घटाकर पांच साल कर दी। अच्छे आचरण के कारण सजा में छूट मिलने के बाद वे 25 फरवरी 2016 को पुणे की येरवडा जेल से बाहर आए, यानी तय अवधि से करीब आठ महीने पहले।
आज भी नहीं भूले वह दौर
संजय दत्त की जिंदगी में फिल्मों की चमक और स्टारडम के साथ कई मुश्किल अध्याय भी रहे हैं, और जेल का दौर उनमें से एक है। इतने साल बाद भी पिता के सामने हथकड़ी लगने का वह दृश्य उनके लिए सबसे भावुक पलों में गिना जाता है। उनके इस खुलासे की चर्चा अब सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संजय दत्त के सामने पुलिस ने क्या किया था?
पुलिस ने उनके पिता सुनील दत्त के सामने उन्हें हथकड़ी लगाई थी।
हथकड़ी देखकर सुनील दत्त का क्या रिएक्शन था?
सुनील दत्त सदमे में आ गए थे और उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
संजय दत्त जेल में खुद को मजबूत कैसे रखते थे?
उन्होंने जेल के साधारण हालात को स्वीकार किया और खुद को किसी से ऊपर नहीं समझा। ताकत के सवाल पर उन्होंने ‘हर हर महादेव’ कहा।
संजय दत्त येरवडा जेल से कब बाहर आए?
अच्छे आचरण के कारण सजा में छूट मिलने के बाद वे 25 फरवरी 2016 को येरवडा जेल से बाहर आए।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।