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स्वरा भास्कर के जौहर टिप्पणी पर दीपा वार्ष्णेय का तीव्र प्रतिक्रिया

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त को नई दिल्ली टॉक्स शो के दौरान जौहर पर आपत्ति जताई थी। इस पर दीपा वार्ष्णेय जिला संयोजिका ने गहरा रोष प्रकट किया है।

स्वरा भास्कर के जौहर टिप्पणी पर दीपा वार्ष्णेय का तीव्र प्रतिक्रिया
Image credit: News Darpan Team

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त को नई दिल्ली टॉक्स शो के दौरान जौहर पर आपत्ति जताई थी। इस पर दीपा वार्ष्णेय जिला संयोजिका ने गहरा रोष प्रकट किया है।

दीपा वार्ष्णेय ने कहा कि जौहर जैसी पवित्र साहसिक परंपरा पर जो टिप्पणी की गई और उसे 'दुष्कर्म', 'आत्महत्या' जैसे शब्दों से जोड़कर देखा गया, यह गलत है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या जौहर किसी हार का नाम था? क्या जौहर किसी मजबूरी में उठाया गया कदम था? उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि नहीं, जौहर स्वाभिमान की वो जलती हुई ज्वाला थी जिसके सामने आक्रांताओं की क्रूरता जलकर राख हो गई।

दीपा वार्ष्णेय ने कहा कि जब विदेशी आक्रांता हमारी मातृभूमि पर आंख उठाकर देखते थे तब उनके मन में केवल लूटपाट और हमारी माताओं-बहनों की अस्मिता को रौंदने का वहशी इरादा होता था। तब हमारी वीरांगनाओं ने आत्मसमर्पण करने के बजाए अग्नि स्नान को चुना।

उन्होंने कहा कि यह कायरता नहीं बल्कि आक्रांताओं के मुंह पर तमाचा था कि तुम हमारे शरीर को छू भी नहीं सकते। जौहर किसी भी बहस का विषय नहीं बल्कि इस देश की महिलाओं के उस उच्च साहस और पराक्रम का प्रतीक है जिसने अत्याचारियों को झुकने पर मजबूर कर दिया।

दीपा वार्ष्णेय ने कहा कि हमें अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व होना चाहिए न कि आधुनिकता के नाम पर अपने ही पूर्वजों के बलिदान पर सवाल उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां पावन कथाएं इतिहास बनती हैं उसी भारत की मिट्टी में हमारी सांस बसती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वरा भास्कर ने जौहर के बारे में क्या कहा?

स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त को नई दिल्ली टॉक्स शो के दौरान जौहर पर आपत्ति जताई थी और इसे नकारात्मक शब्दों से जोड़ा था।

दीपा वार्ष्णेय ने जौहर को कैसे परिभाषित किया?

दीपा वार्ष्णेय के अनुसार जौहर स्वाभिमान की वो जलती हुई ज्वाला थी, न कि हार या मजबूरी। यह भारतीय महिलाओं के उच्च साहस और पराक्रम का प्रतीक है जिसने आक्रांताओं को झुकने पर मजबूर कर दिया।

दीपा वार्ष्णेय ने जौहर को कायरता बनाम साहस के संदर्भ में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि जौहर कायरता नहीं, बल्कि आक्रांताओं के मुंह पर तमाचा था। यह आत्मसमर्पण के बजाय अग्नि स्नान को चुनने की बहादुरी का प्रतीक है।

दीपा वार्ष्णेय के अनुसार हमें अपने इतिहास के बारे में क्या सोचना चाहिए?

उन्होंने कहा कि हमें अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व होना चाहिए, न कि आधुनिकता के नाम पर अपने पूर्वजों के बलिदान पर सवाल उठाने चाहिए।

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