राप्ती की बाढ़ से श्रावस्ती के किसानों की जमीन और फसल दोनों बह रहे
श्रावस्ती में उफनती राप्ती नदी किसानों के लिए तबाही लेकर आई है। जमुनहा तहसील के वीरपुर लौकिहा इलाके में नदी के उग्र रूप ने अन्नदाताओं की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है।
श्रावस्ती में उफनती राप्ती नदी किसानों के लिए तबाही लेकर आई है। जमुनहा तहसील के वीरपुर लौकिहा इलाके में नदी के उग्र रूप ने अन्नदाताओं की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है।
हालात इतने भयावह हैं कि जिन खेतों में कुछ हफ्तों बाद लहलहाती फसल कटनी थी, वहां आज लाचार किसान कच्ची, हरी धान की फसल पर हंसिया चलाने को मजबूर हैं। कर्ज लेकर बोई गई मेहनत देखते ही देखते राप्ती की जलधारा में विलीन हो रही है।
राप्ती नदी अपने तेज बहाव से वीरपुर लौकिहा गांव की उपजाऊ जमीनों को निगलती जा रही है। हर बीतते घंटे के साथ जमीन के बड़े-बड़े टुकड़े दरक कर नदी में समा रहे हैं, और साथ ही समा रही है किसान के खून-पसीने की कमाई।
जिन धान के पौधों में अभी दाने पूरी तरह पके भी नहीं हैं, किसान उन्हें काटने में जुटे हैं। अगर आज नहीं काटा तो कल सुबह तक यह जमीन ही नदी का पेट भर चुकी होगी। कर्ज उठाकर, बीज-खाद का इंतजाम कर बोई गई सैकड़ों बीघा हरी फसल अब नदी की आगोश में समाने की कगार पर है। जो फसल किसान के घर की भुखमरी दूर करती, वह आज मवेशियों का चारा बनने को मजबूर है।
एक स्थानीय किसान ने बताया, "साहब, बैंक और साहूकारों से कर्ज़ा लेकर हमने धान की रोपाई की थी। सोचा था फसल होगी तो क़र्ज़ चुकाएंगे और बाल-बच्चों का पेट पालेंगे। लेकिन राप्ती सब लील गई। ज़मीन कटकर पानी में बह रही है। अगर कच्ची फसल नहीं काटेंगे तो भूसे के लिए भी कुछ नहीं बचेगा। सैकड़ों बीघा ज़मीन कट चुकी है, प्रशासन की तरफ से कोई झांकने तक नहीं आया।"
वीरपुर लौकिहा के किसानों का दर्द सिर्फ फसल गंवाने का नहीं, बल्कि अपना वजूद खोने का है। जमीन कट रही है, घर मुहाने पर खड़े हैं और उम्मीदें दम तोड़ रही हैं।
जमुनहा के एसडीएम रवि प्रताप सिंह ने कहा, "वीरपुर लौकिहा क्षेत्र में राप्ती नदी द्वारा कृषि योग्य भूमि के कटान का मामला हमारे संज्ञान में है। राजस्व और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम को मौके पर स्थलीय निरीक्षण के निर्देश दे दिए गए हैं। लेखपालों को निर्देशित किया गया है कि प्रभावित किसानों की फसलों और कटान में आई भूमि का तत्काल सर्वे कर विस्तृत क्षति आंकलन रिपोर्ट तैयार करें। शासन के मंशानुरूप और आपदा राहत मानकों के तहत पीड़ित किसानों को हरसंभव आर्थिक सहायता व नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, संवेदनशील स्थलों पर नदी के कटान को रोकने के लिए संबंधित विभाग को आवश्यक तकनीकी उपाय करने को कहा गया है।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राप्ती नदी की बाढ़ से श्रावस्ती के किसानों को क्या नुकसान हो रहा है?
राप्ती नदी के उफनते पानी से वीरपुर लौकिहा गांव की उपजाऊ जमीन कट रही है। किसानों की धान की फसल बह रही है और अभी कच्ची फसल को भी निगल जा रहा है। कर्ज लेकर बोई गई सैकड़ों बीघा जमीन और फसल दोनों नदी में समा रहे हैं।
किसान अभी हरी फसल काटने पर क्यों मजबूर हैं?
धान के दाने अभी पूरी तरह पके नहीं हैं, फिर भी किसान उन्हें काटने को मजबूर हैं क्योंकि अगर आज नहीं काटा तो कल सुबह तक जमीन ही नदी में बह जाएगी। कम से कम भूसा तो बच जाएगा, लेकिन अगर देरी हुई तो सब कुछ खो जाएगा।
प्रशासन ने इस समस्या के बारे में क्या कहा है?
जमुनहा के एसडीएम रवि प्रताप सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। राजस्व और सिंचाई विभाग की टीम को स्थलीय निरीक्षण के निर्देश दे दिए गए हैं। प्रभावित किसानों का तत्काल सर्वे किया जाएगा और आपदा राहत मानकों के तहत मुआवजा दिलाया जाएगा।
किसानों का सबसे बड़ा सवाल क्या है?
किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या सिर्फ फसल गंवाना नहीं है, बल्कि अपनी जमीन और अपना वजूद खोना है। प्रशासन की तरफ से कोई सहायता नहीं मिल रही है, जबकि सैकड़ों बीघा जमीन कट चुकी है और और भी कट रही है।
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