श्रावस्ती में राप्ती का जलस्तर घटा, कटान-जलभराव से परेशानी जारी
श्रावस्ती में राप्ती नदी का जलस्तर घटने लगा है, जिससे राहत के संकेत मिले हैं। लेकिन तराई के कई इलाकों में जलभराव और कटान की समस्या अभी भी बनी हुई है।
श्रावस्ती में राप्ती नदी का जलस्तर घटने लगा है, जिससे राहत के संकेत मिले हैं। लेकिन तराई के कई इलाकों में जलभराव और कटान की समस्या अभी भी बनी हुई है। नदी किनारे बसे गांवों में खतरा पूरी तरह टला नहीं है और प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
सुबह 9 बजे राप्ती बैराज पर जलस्तर खतरे के निशान से 1.15 मीटर ऊपर था, जो घटकर 0.70 मीटर ऊपर पहुंच गया। जलस्तर में यह गिरावट राहत की बात मानी जा रही है, लेकिन जिन इलाकों में पानी भरा है या नदी कटान कर रही है, वहां लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है।
इकौना के मझौवा सुमाल में राप्ती तेजी से कटान कर रही है। यहां निर्माणाधीन पुल के अप्रोच मार्ग के किनारे भी कटान हो रहा है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ी हुई है। कटान की वजह से आसपास के लोगों को डर है कि नुकसान और बढ़ सकता है।
जमुनहा के कई इलाकों में भी जलभराव और कटान से लोग परेशान हैं। पानी भरे होने की वजह से लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी परेशानी बताई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों की नजर जलस्तर और कटान दोनों पर बनी हुई है।
अतिवृष्टि ने खेती और ग्रामीण इलाकों को भी नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन के प्रारंभिक सर्वे में 87 हेक्टेयर धान की फसल क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इसके अलावा 22 कच्चे मकान, 2 पक्के मकान और 11 पशुशेड भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
तेज हवाओं की वजह से कई जगह पेड़ गिर गए थे। वन विभाग ने गिरे पेड़ों को हटाकर रास्ते साफ कराए हैं, ताकि लोगों को आवागमन में राहत मिल सके।
बारिश से जुड़ी घटनाओं में 3 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना है। नुकसान का आकलन प्रशासन के स्तर पर किया जा रहा है।
ADM श्रावस्ती ललित कुमार के मुताबिक फिलहाल बाढ़ से आबादी प्रभावित नहीं है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ चौकियां, राहत-बचाव दल और शरणालय सक्रिय हैं। राप्ती के जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावस्ती में राप्ती नदी का जलस्तर अभी कैसा है?
राप्ती नदी का जलस्तर घटने लगा है। राप्ती बैराज पर यह खतरे के निशान से 1.15 मीटर ऊपर था, जो घटकर 0.70 मीटर ऊपर पहुंच गया।
जलस्तर घटने के बाद भी लोगों को परेशानी क्यों है?
कई तराई इलाकों में अभी भी जलभराव और नदी कटान की समस्या बनी हुई है। पानी भरे होने से लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है।
कटान से सबसे ज्यादा चिंता कहां बताई गई है?
इकौना के मझौवा सुमाल में राप्ती तेजी से कटान कर रही है। निर्माणाधीन पुल के अप्रोच मार्ग के पास भी कटान हो रहा है, जिससे ग्रामीण चिंतित हैं।
बारिश और बाढ़ जैसे हालात से कितना नुकसान हुआ है?
प्रारंभिक सर्वे में 87 हेक्टेयर धान की फसल, 22 कच्चे मकान, 2 पक्के मकान और 11 पशुशेड क्षतिग्रस्त बताए गए हैं। बारिश से जुड़ी घटनाओं में 3 लोगों की मौत की भी सूचना है।
प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
प्रशासन जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रख रहा है। बाढ़ चौकियां, राहत-बचाव दल और शरणालय सक्रिय बताए गए हैं।
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