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राप्ती नदी के टूटे बांधों से श्रावस्ती के गांवों पर बाढ़ का खतरा

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में राप्ती नदी पर बने सुरक्षा बांध कई जगहों से टूट गए हैं और आधा दर्जन से ज्यादा गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

राप्ती नदी के टूटे बांधों से श्रावस्ती के गांवों पर बाढ़ का खतरा
Image credit: News Darpan Team

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में राप्ती नदी पर बने सुरक्षा बांध कई जगहों से टूट गए हैं और आधा दर्जन से ज्यादा गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल की पहाड़ियों में हो रही भारी बारिश और बाढ़ के बाद नेपाल से सटा यह सीमावर्ती इलाका इस वक्त किसी भी समय तबाही की चपेट में आ सकता है। मिश्रपुरवा, मधवापुर और सर्रा समेत कई गांव सीधे खतरे के निशाने पर हैं जहां हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं।

राप्ती का जलस्तर सुबह खतरे के लाल निशान 127.70 सेंटीमीटर से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा था, हालांकि शाम 4 बजे से इसमें गिरावट देखी गई और यह खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे आ गया। लेकिन असली चिंता की बात यह है कि नदी किनारे के बांध कई जगहों से कट चुके हैं और पानी की तेज धार कभी भी इन कमजोर बांधों को तोड़कर बस्तियों में घुस सकती है।

स्थानीय ग्रामीण बलई ने कहा, "साहब, बांध जगह-जगह से कटा पड़ा है। नेपाल में पानी बढ़ा तो हमारे गांव बचने वाले नहीं हैं। अगर तेज बहाव आया तो मिश्रपुरवा, मधवापुर और सर्रा गांव का नामोनिशान मिट जाएगा। हम लोग दिन-रात डर के साये में जी रहे हैं, लेकिन कोई सुध लेने नहीं आ रहा।"

ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारी के दावे तो कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हर साल बाढ़ की त्रासदी झेल रहे इन लोगों को डर है कि इस बार भी राप्ती अपने साथ सिर्फ बर्बादी का सैलाब लेकर आएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राप्ती नदी में बाढ़ का खतरा कहां है?

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में राप्ती नदी के सुरक्षा बांध कई जगहों से टूट गए हैं। मिश्रपुरवा, मधवापुर और सर्रा समेत आधा दर्जन से ज्यादा गांव सीधे खतरे में हैं।

राप्ती नदी का जलस्तर कितना है?

सुबह राप्ती का जलस्तर खतरे के लाल निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर था। शाम 4 बजे तक इसमें गिरावट आई और यह खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे चला गया।

ग्रामीणों की मुख्य चिंता क्या है?

ग्रामीणों का कहना है कि बांध जगह-जगह से कट चुके हैं और नेपाल में पानी बढ़ने से पानी की तेज धार कभी भी इन कमजोर बांधों को तोड़कर गांवों में घुस सकती है।

ग्रामीणों को किससे शिकायत है?

ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारी के दावे कर रहा है, लेकिन बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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