पुणे में नई ऊंची सड़क परियोजनाओं में UHPFRC तकनीक का इस्तेमाल
पुणे की ऊंची सड़कों पर मलेशियाई UHPFRC टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, कम होंगे पिलर: नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पुणे की नई ऊंची सड़क परियोजनाओं में मलेशियाई अल्ट्रा
पुणे की ऊंची सड़कों पर मलेशियाई UHPFRC टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, कम होंगे पिलर: नितिन गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पुणे की नई ऊंची सड़क परियोजनाओं में मलेशियाई अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (UHPFRC) टेक्नोलॉजी अपनाने का ऐलान किया है। इस तकनीक से पिलर के बीच की दूरी 120 मीटर तक बढ़ाई जा सकेगी, जिससे पिलर की संख्या कम होगी और प्रोजेक्ट की लागत भी घटेगी। गडकरी ने यह घोषणा शनिवार को पुणे जिले में तीन बड़ी ऊंची सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास समारोह के दौरान की।
पुणे के ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या पर फोकस
गडकरी ने कार्यक्रम में बताया कि पुणे ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है और यह भारत के सबसे ज्यादा ट्रैफिक वाली जगहों में से एक है। उन्होंने कहा कि पुणे-मुंबई, पुणे-नासिक और पुणे-सोलापुर जैसे शहरों को जोड़ने वाले हाईवे अपनी क्षमता तक पहुंच चुके हैं और इन्हें और चौड़ा करना संभव नहीं है। नई ऊंची सड़कें—पुणे-शिरूर, हडपसर-यवत और तलेगांव-चाकन-शिक्रापुर—इन समस्याओं को हल करने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद करेंगी।
परियोजनाएं और लागत
महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) द्वारा संचालित ये तीन कॉरिडोर पुणे जिले के सबसे ज्यादा ट्रैफिक वाले रूट्स को कवर करेंगे। पुणे-शिरूर कॉरिडोर 53.40 किलोमीटर लंबा है और इसके लिए ₹7,515 करोड़ मंजूर किए गए हैं। हडपसर-यवत कॉरिडोर 31.65 किलोमीटर का है और इसके लिए ₹5,265 करोड़ का बजट तय किया गया है। वहीं, तलेगांव-चाकन-शिक्रापुर कॉरिडोर 53.20 किलोमीटर लंबा है और इसके लिए ₹4,000 करोड़ मंजूर किए गए हैं। शिलान्यास के तुरंत बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
UHPFRC टेक्नोलॉजी क्यों है खास?
गडकरी ने बताया कि UHPFRC टेक्नोलॉजी पहले नागपुर में एक पुल के 40 पॉइंट्स पर टेस्ट की जा चुकी है। इसमें पारंपरिक स्टील के बजाय स्टील फाइबर रीइन्फोर्स्ड बीम का इस्तेमाल होता है, जिससे पिलर के बीच की दूरी 120 मीटर तक हो सकती है, जबकि भारतीय रोड कांग्रेस (IRC) के मौजूदा मानकों के हिसाब से यह दूरी 30 मीटर है। इससे पिलर की संख्या कम होगी, लागत घटेगी और निर्माण में तेजी आएगी।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर
मंत्री ने गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर देते हुए दिल्ली-देहरादून ऊंची सड़क पर रबर बियरिंग और एक्सपेंशन जॉइंट्स में आई समस्याओं का जिक्र किया, जहां दरारें मिली थीं। खराब सामग्री सप्लाई करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। गडकरी ने अधिकारियों को पुणे प्रोजेक्ट्स के लिए हाई-क्वालिटी बियरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने L&T के तकनीकी विशेषज्ञ वेंकटराम को इन नई सड़कों को डिजाइन करने के लिए श्रेय दिया और बेहतर निर्माण मानकों का भरोसा दिलाया।
पुणे जिले में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
गडकरी ने इस साल पुणे जिले के लिए ₹50,000 करोड़ के अतिरिक्त सड़क प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया। इसमें ₹15,000 करोड़ का शिरूर-छत्रपति संभाजीनगर कॉरिडोर भी शामिल है, जिससे पुणे और नागपुर के बीच यात्रा का समय पांच घंटे से कम हो जाएगा। अन्य प्रोजेक्ट्स में नासिक फाटा-खेड कॉरिडोर, रावत-नर्हे ऊंची सड़क और मुंबई-बेंगलुरु यात्रा को पांच घंटे में पूरा करने के लिए ₹10,000 करोड़ का नया एक्सप्रेसवे शामिल है। इन योजनाओं का मकसद पुणे की सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना और ट्रैफिक की समस्या को हल करना है।
UHPFRC टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पुणे की सड़क नेटवर्क को आधुनिक बनाने और ट्रैफिक और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्रोत: Indian Express
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