प्रह्लाद जोशी 12 अक्टूबर को दिल्ली में गन्ना किसानों से मिलेंगे
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी 12 अक्टूबर को दिल्ली में गन्ना किसानों से मिलेंगे और चीनी एमएसपी समेत उनकी मांगों पर चर्चा करेंगे।
12 अक्टूबर को गन्ना किसानों के साथ बैठक करेंगे प्रह्लाद जोशी
12 अक्टूबर को नई दिल्ली में गन्ना किसानों के साथ बैठक होगी। इस बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा की जाएगी। केंद्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह जानकारी दी। किसानों की मांगों में चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी में बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है।
श्री जोशी ने शुक्रवार (2 अक्टूबर) को हुब्बल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि किसानों के विरोध और बेहतर कीमतों की उनकी मांग को देखते हुए केंद्र ने यह बैठक बुलाई है।
उन्होंने कहा, “हम तानाशाह नहीं हैं। इसी वजह से किसानों के साथ बैठक बुलाई गई है।”
केंद्र किसानों की मांगों पर करेगा चर्चा
प्रस्तावित बैठक में गन्ना किसानों की ओर से उठाई गई मांगों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी में बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है। किसानों के विरोध के बीच कीमतों का मुद्दा केंद्र के सामने आया है और इसी दौरान यह ऐलान किया गया है।
श्री जोशी ने समझाया कि चीनी का एमएसपी और गन्ना उत्पादकों को दी जाने वाली कीमत, दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि चीनी का एमएसपी उस समय शुरू किया गया था, जब बाजार में कीमतें तेजी से गिर गई थीं।
श्री जोशी के मुताबिक, इस व्यवस्था से यह तय होता है कि चीनी को तय की गई न्यूनतम कीमत से कम पर नहीं बेचा जाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी से गन्ना किसानों को अपने-आप ज्यादा भुगतान नहीं मिलने लगेगा।
उन्होंने कहा कि इन दोनों कीमतों का एक-दूसरे से सीधा संबंध नहीं है। यह फर्क किसानों की मांग के लिहाज से अहम है। इसकी वजह यह है कि चीनी की न्यूनतम कीमत में बदलाव से अकेले यह तय नहीं होगा कि गन्ना उत्पादकों को कितना भुगतान मिलेगा।
गन्ने की कीमत तय करने में राज्यों की भूमिका
श्री जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश बड़े एथनॉल उत्पादक राज्यों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र अपनी नीति के तहत एथनॉल खरीद रहा है। मंत्री ने गन्ने के लिए किए जाने वाले भुगतान को तय करने में राज्य सरकारों की भूमिका की ओर भी ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के पास गन्ने के लिए स्टेट एडवाइज्ड प्राइस यानी एसएपी तय करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक ने एसएपी तय नहीं किया है।
श्री जोशी ने कहा कि इसके चलते बनने वाली भुगतान की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को फंड देना होगा। उनकी बातों से यह साफ हुआ कि गन्ने के भुगतान का सवाल चीनी और एथनॉल को लेकर केंद्र की नीति के साथ-साथ एसएपी तय करने के राज्य के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है।
कर्नाटक सरकार पर निशाना
मंत्री ने किसानों के मुद्दों से निपटने के तरीके को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने सूखे से राहत, बिजली की कमी और किसान सम्मान योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय मदद बंद किए जाने का जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की परेशानी दूर करने के लिए सरकार ने पर्याप्त नए कदम नहीं उठाए हैं। ये आरोप उस समय लगाए गए, जब गन्ना किसानों के साथ प्रस्तावित बैठक का ऐलान किया जा रहा था।
श्री जोशी ने राज्य सरकार पर डिस्टिलरी लगाने की मंजूरियां देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों और आम लोगों के हितों के खिलाफ है।
मतदाता सूची और राजनीति पर बयान
मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर श्री जोशी ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की आलोचना की। उन्होंने राज्य चुनाव आयोग के सामने विरोध प्रदर्शन करने को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन संविधान के खिलाफ था। श्री जोशी ने मुख्यमंत्री और कैबिनेट के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।
श्री जोशी ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया कानून के तहत तय की गई है और अभी पूरी नहीं हुई है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राज्य की राजनीति में वापस लौटेंगे, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें लोगों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन मिलता रहेगा, तब तक वह केंद्र में काम करते रहेंगे।
विरोध के बाद माफी
इससे जुड़े एक घटनाक्रम में, इंचागेरी मठ के शशिकांत गुरु ने एक वीडियो क्लिप जारी की। इस वीडियो में उन्होंने श्री जोशी के साथ हुई अपनी बैठक और उसके बाद रैली के दौरान दिए गए अपने बयानों से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी।
हाल में हुब्बल्ली में गन्ना किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कथित तौर पर श्री जोशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी टिप्पणी करने का अफसोस है और उन्होंने अपने शब्द वापस ले लिए।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रह्लाद जोशी गन्ना किसानों से कब और कहां मिलेंगे?
प्रह्लाद जोशी 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में गन्ना किसानों से बैठक करेंगे।
बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
बैठक में किसानों की मांगों पर चर्चा होगी, जिसमें चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है।
क्या चीनी के एमएसपी बढ़ने से गन्ना किसानों को सीधे ज्यादा भुगतान मिलेगा?
नहीं, चीनी का एमएसपी और गन्ना किसानों को मिलने वाली कीमत अलग-अलग मुद्दे हैं। एमएसपी बढ़ने से किसानों को अपने-आप ज्यादा भुगतान नहीं मिलेगा।
गन्ने का एसएपी तय करने का अधिकार किसके पास है?
गन्ने का स्टेट एडवाइज्ड प्राइस यानी एसएपी तय करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है।
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