प्रशांत द्वीप रक्षा में पश्चिम, विकास में चीन को अपनाते हैं
वानुआतु और फिजी ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा संधि कर रहे हैं जबकि चीन से बुनियादी ढांचा निवेश भी ले रहे हैं।
प्रशांत द्वीपों के देश पश्चिमी सुरक्षा और चीनी व्यापार के बीच कैसे संतुलन बना रहे हैं
प्रशांत द्वीपों के देश एक साथ पश्चिमी देशों के साथ रक्षा समझौते साइन कर रहे हैं और चीन से इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ले रहे हैं, महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता का फायदा उठाते हुए दोनों पक्षों से ज्यादा से ज्यादा लाभ हासिल कर रहे हैं।
सुरक्षा साझेदारी का रुख कैनबरा की तरफ
ऑस्ट्रेलिया से 1,750 किलोमीटर पूर्व में स्थित वानुआतु ने जून में कैनबरा के साथ सुरक्षा समझौता किया। कुछ दिन बाद जुलाई की शुरुआत में फिजी ने ऑस्ट्रेलिया के साथ अपनी पहली म्यूचुअल डिफेंस संधि साइन की—यह समझौता इस तरह बनाया गया है कि दूसरे प्रशांत देश भी इसमें शामिल हो सकें।
बीजिंग ने दोनों डील्स पर लगभग एक जैसे बयान जारी कर जवाब दिया, चेतावनी देते हुए कहा कि क्षेत्रीय सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए या भू-राजनीतिक खेल को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
आर्थिक संबंध पूरी तरह चीन के साथ
जबकि रक्षा गठबंधन पश्चिम की तरफ जा रहे हैं, द्वीप सरकारें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और जिसे चीनी अधिकारी "छोटे और सुंदर" सहायता कार्यक्रम बताते हैं, उसके जरिए बीजिंग की आर्थिक मौजूदगी को बुलावा देना जारी रखे हुए हैं। इस दोहरी रणनीति से प्रशांत की राजधानियां पश्चिमी साझेदारों से सैन्य गारंटी हासिल करते हुए उस व्यापार और विकास के प्रवाह को बनाए रख सकती हैं जो उनकी अर्थव्यवस्थाओं का आधार है।
ऑस्ट्रेलिया की प्रशांत प्रतिस्पर्धा
विदेश मंत्री पेनी वोंग इस प्रतिस्पर्धा को बढ़ते मुखर चीन के खिलाफ एक "स्थायी प्रतियोगिता" बता रही हैं। सिडनी के लोवी इंस्टीट्यूट में रिसर्च फेलो कॉनर ग्राहम के मुताबिक, कैनबरा का लक्ष्य खुद को प्रशांत का पसंदीदा सुरक्षा साझेदार बनाना और क्षेत्र में चीनी प्रभाव को कम करना है।
रक्षा समझौतों की इस बाढ़ ने उस क्षेत्र के लिए एक तेज उलटफेर का संकेत दिया है जिसे पश्चिमी शक्तियां लंबे समय तक भू-राजनीतिक रूप से पिछड़ा इलाका मानती रही हैं। द्वीपों के नेताओं के पास अब वो ताकत है जो एक दशक पहले सोची भी नहीं जा सकती थी, वो महाशक्तियों की चिंता को ठोस सुरक्षा और आर्थिक फायदों में बदल रहे हैं बिना किसी एक पक्ष के साथ विशेष रूप से जुड़े।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रशांत द्वीप देश सुरक्षा और विकास के बीच कैसे संतुलन बना रहे हैं?
ये देश पश्चिमी देशों के साथ रक्षा समझौते कर रहे हैं जबकि चीन से इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ले रहे हैं। इस तरह वो दोनों पक्षों से सैन्य गारंटी और आर्थिक फायदे दोनों हासिल कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया प्रशांत क्षेत्र में क्या भूमिका निभा रहा है?
ऑस्ट्रेलिया वानुआतु और फिजी जैसे द्वीप देशों के साथ सुरक्षा समझौते कर रहा है। कैनबरा का लक्ष्य खुद को प्रशांत का पसंदीदा सुरक्षा साझेदार बनाना और क्षेत्र में चीनी प्रभाव को कम करना है।
चीन प्रशांत द्वीपों में कैसे अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है?
चीन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और 'छोटे और सुंदर' सहायता कार्यक्रम के जरिए आर्थिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। इससे द्वीपों की अर्थव्यवस्थाओं को व्यापार और विकास का प्रवाह मिल रहा है।
क्या चीन को पश्चिमी रक्षा समझौतों पर कोई समस्या है?
हां, बीजिंग ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए और भू-राजनीतिक खेल को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
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