उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट में अगले हफ्ते बड़ा फेरबदल? 3 मंत्री पद खाली, कांग्रेस के रुख पर भी नजर
जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज है। तीन मंत्री पद खाली हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस सूत्रों के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला से बातचीत के बाद अगले हफ्ते फैसला हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सरकार के दो साल पूरे होने से पहले कैबिनेट विस्तार की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, 11 अक्टूबर 2026 तक सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नए मंत्रियों के नाम और फेरबदल की अंतिम रूपरेखा पर आधिकारिक फैसला होने की पुष्टि नहीं हुई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सूत्रों के हवाले से खबर है कि मुख्यमंत्री की पार्टी नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद अगले हफ्ते इस बारे में फैसला हो सकता है।
तीन मंत्री पद खाली, कैबिनेट में कितनी जगह?
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। लागू नियमों के अनुसार, मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत तक सीमित है। इस हिसाब से मुख्यमंत्री समेत अधिकतम नौ सदस्य मंत्रिपरिषद में हो सकते हैं।
फिलहाल उमर अब्दुल्ला सरकार की मंत्रिपरिषद में छह सदस्य हैं। इनमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी और मंत्री सकीना मसूद (इटू), जावेद अहमद राणा, जाविद अहमद डार और सतीश शर्मा शामिल हैं। इस तरह तीन पद खाली हैं।
फारूक अब्दुल्ला से चर्चा के बाद होगा फैसला
उमर अब्दुल्ला ने पहले कहा था कि कैबिनेट विस्तार पर फैसला दिल्ली में GST काउंसिल की बैठक के बाद और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से चर्चा करके लिया जाएगा।
Media रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने संकेत दिया था कि पार्टी नेतृत्व से बातचीत के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अब पार्टी सूत्रों के हवाले से सामने आई खबरों में अगले हफ्ते तक निर्णय की संभावना जताई गई है।
क्या सिर्फ नए मंत्री आएंगे या मौजूदा मंत्रियों की भी होगी छुट्टी?
कैबिनेट विस्तार को लेकर सामने आ रही रिपोर्टों में दो तरह की संभावनाएं बताई गई हैं।
- तीन नए मंत्री: कुछ रिपोर्टों में खाली पड़े तीन पदों को भरने की संभावना जताई गई है।
- बड़ा कैबिनेट फेरबदल: Daily Excelsior और Kashmir Life की रिपोर्टों में पांच नए मंत्रियों को शामिल करने और दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना का जिक्र है।
हालांकि, ये मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के आधार पर बताई गई संभावनाएं हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सूत्रों ने यह भी कहा है कि अभी न तो नए मंत्रियों की संख्या तय हुई है और न ही संभावित नामों पर अंतिम मुहर लगी है। इसलिए किसी नेता को मंत्री बनाए जाने या किसी मौजूदा मंत्री को हटाए जाने की खबर को फिलहाल आधिकारिक फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
कांग्रेस के सरकार में शामिल होने पर क्या है स्थिति?
उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट के संभावित विस्तार में कांग्रेस का रुख भी अहम मुद्दा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने 2024 का विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था, लेकिन कांग्रेस सरकार में शामिल नहीं हुई और बाहर से समर्थन देने का रास्ता चुना।
कांग्रेस का कहना रहा है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी। इसी वजह से कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस को जगह मिलने की अटकलों के बावजूद उसकी भागीदारी की पुष्टि नहीं हुई है।
16 अक्टूबर से पहले हो सकता है फैसला
उमर अब्दुल्ला सरकार 16 अक्टूबर को अपने दो साल पूरे करने जा रही है। ऐसे में अगले हफ्ते होने वाली संभावित राजनीतिक बातचीत और कैबिनेट विस्तार पर फैसला अहम माना जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि उमर अब्दुल्ला केवल तीन खाली मंत्री पद भरेंगे या मौजूदा मंत्रियों के विभागों और मंत्रिमंडल की संरचना में भी बदलाव करेंगे। इसका जवाब पार्टी नेतृत्व के साथ बातचीत और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट में कितने मंत्री पद खाली हैं?
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं। अभी छह सदस्य हैं, इसलिए तीन मंत्री पद खाली हैं।
कैबिनेट विस्तार पर फैसला कब हो सकता है?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व से बातचीत के बाद अगले हफ्ते फैसला हो सकता है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या कैबिनेट में सिर्फ तीन नए मंत्री शामिल होंगे?
कुछ रिपोर्टों में तीन खाली पद भरने की बात कही गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में पांच नए मंत्री शामिल करने और दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना बताई गई है। अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस के शामिल होने की क्या स्थिति है?
कांग्रेस ने 2024 का विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था, लेकिन सरकार में शामिल नहीं हुई और बाहर से समर्थन दिया। कांग्रेस का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी।
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