नारायण मूर्ति बोले, आइडिया और उद्यमिता ही नौकरियां पैदा कर सकते हैं
नारायण मूर्ति ने कहा कि आइडिया और उद्यमिता से नौकरियां पैदा होंगी। उन्होंने छात्रों को नाकामी से सीखने और नैतिक मूल्यों पर टिके रहने की सलाह दी।
सिर्फ आइडिया और उद्यमिता ही नौकरियां पैदा कर सकते हैं और भारत को विकसित देश बनाने में मदद कर सकते हैं: एन.आर. नारायण मूर्ति
इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने कहा कि आइडिया और उद्यमिता नौकरियां पैदा कर सकते हैं और भारत को एक विकसित देश बनाने में मदद कर सकते हैं।
मूर्ति ने हरियाणा के सोनीपत में ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के ‘यूनिवर्सिटी डे’ कार्यक्रम में ‘नैतिक नेतृत्व, बदलाव वाली तरक्की और टेक्नोलॉजी: इन्फोसिस की कहानी और भारत का भविष्य’ विषय पर बोलते हुए यह बात कही।
उन्होंने इस मौके पर यह भी बताया कि छात्रों और उद्यमियों को नाकामी का सामना किस तरह करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि रुकावटों और नाकामियों को कामयाबी की तरफ बढ़ने वाली यात्रा का हिस्सा मानना चाहिए।
उन्होंने कहा, “नाकामी कामयाबी की तरफ बढ़ने वाले कदमों की एक कड़ी जैसी थी।”
मूर्ति ने आगे कहा, “अगर आप नाकामियों से सबक सीखते हैं और उन गलतियों को दोबारा नहीं दोहराते हैं, तो आप नाकामी से उबर सकते हैं।”
नाकामी से सोच-विचार होना चाहिए
मूर्ति ने छात्र समुदाय को आगाह किया कि नाकामी को अपने अंदर मायूसी या कुछ न करने की स्थिति पैदा करने की वजह न बनने दें।
उन्होंने वैज्ञानिकों और रिसर्च करने वालों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें नतीजे नहीं मिलते, तब भी वे अपना काम जारी रखते हैं।
मूर्ति के मुताबिक, वैज्ञानिकों और रिसर्च करने वालों को अपने काम पर खुद से सोच-विचार करने और फिर से शुरुआत करने की ट्रेनिंग दी जाती है। वे अपनी कोशिशों को बीच में छोड़ने के बजाय दोबारा काम शुरू करते हैं।
उन्होंने छात्रों से कहा कि कामयाबी के लिए तर्क के साथ सोचना और पूरा ध्यान लगाना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “आपको पूरा ध्यान लगाकर तर्क के साथ सोचना होगा और फिर कामयाब होना होगा।”
मूर्ति ने नैतिक आचरण को मन की शांति से भी जोड़ा। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा, “सबसे मुलायम तकिया साफ ज़मीर होता है।”
उन्होंने कहा, “अगर आप सही काम को अपना पैमाना बना लें, तो सही काम करना बहुत आसान है।”
निजी फायदे से पहले मूल्य
यूनिवर्सिटी के अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए मूर्ति ने कहा कि उनकी परवरिश ऐसे मूल्य-तंत्र में हुई थी, जिसमें उद्यमिता की यात्रा के बीच समाज से मिलने वाले सम्मान को सबसे अहम जगह दी गई थी।
उन्होंने कहा कि ऐसी यात्रा का सबसे संतोष देने वाला नतीजा समाज से सम्मान मिलना था।
मूर्ति ने आगे कहा कि लोगों के काम और फैसले परिवार से मिले संस्कारों, साथियों और आसपास के माहौल से बनी संस्कृति के हिसाब से तय होते हैं।
उन्होंने वहां मौजूद लोगों को सलाह देते हुए कहा, “निजी फायदे से पहले कड़ी मेहनत, ईमानदारी, सम्मान और सच्चाई को जगह मिलनी चाहिए।”
उनकी बातों में उद्यमिता को नौकरी पैदा करने से जोड़ा गया। साथ ही, इस कोशिश के केंद्र में लगातार मेहनत करते रहना, नैतिक नेतृत्व और निजी मूल्यों को रखा गया।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नारायण मूर्ति ने नौकरियां पैदा करने के लिए किसे जरूरी बताया?
उन्होंने कहा कि आइडिया और उद्यमिता ही नौकरियां पैदा कर सकते हैं।
नाकामी से निपटने के लिए नारायण मूर्ति ने क्या सलाह दी?
उन्होंने कहा कि नाकामियों से सीखना चाहिए और वही गलतियां दोबारा नहीं दोहरानी चाहिए।
मूर्ति ने छात्रों को कामयाबी के लिए क्या करने को कहा?
उन्होंने छात्रों से तर्क के साथ सोचने और पूरा ध्यान लगाकर काम करने को कहा।
निजी फायदे से पहले किन चीजों को महत्व देना चाहिए?
मूर्ति के मुताबिक कड़ी मेहनत, ईमानदारी, सम्मान और सच्चाई को निजी फायदे से पहले जगह मिलनी चाहिए।
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