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मुजफ्फरनगर पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह का किया खुलासा, दो गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर में साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। जनपद मुजफ्फरनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह का किया खुलासा, दो गिरफ्तार
Image credit: News Darpan Team

मुजफ्फरनगर में साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। जनपद मुजफ्फरनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों आरोपी भोले-भाले लोगों को झांसा देकर उनके नाम पर सिम कार्ड निकलवाते थे। इन सिम कार्डों को एक्टिवेट करने के बाद उनके व्हाट्सऐप का OTP विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को भेज दिया जाता था।

पुलिस के अनुसार, इन भारतीय मोबाइल नंबरों से व्हाट्सऐप अकाउंट चलाए जाते थे। इन अकाउंट के जरिए देशभर में लोगों को साइबर धोखाधड़ी का शिकार बनाया जाता था। जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी सिम कार्ड एक्टिवेट कराने और व्हाट्सऐप OTP उपलब्ध कराने का काम करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोनू पुत्र मेहर इलाही और कबीर पुत्र मुकीम के रूप में हुई है। दोनों आरोपी ग्राम हरसौली, थाना शाहपुर, मुजफ्फरनगर के निवासी हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

पुलिस ने बताया कि गृह मंत्रालय भारत सरकार के ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल पर मुजफ्फरनगर से संचालित फर्जी व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज के जरिए साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान थाना शाहपुर क्षेत्र में सिम कार्ड एक्टिवेट किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, इन सिम कार्डों से जुड़े व्हाट्सऐप अकाउंट के OTP थाईलैंड समेत अन्य देशों में बैठे साइबर अपराधियों को भेजे जाते थे। इसके बाद विदेशी साथी इन भारतीय मोबाइल नंबरों से व्हाट्सऐप चलाते थे और लोगों के साथ साइबर ठगी करते थे।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा एक्टिवेट किए गए मोबाइल नंबरों पर चल रहे व्हाट्सऐप अकाउंट के जरिए झारखंड और पश्चिम बंगाल से जुड़े साइबर धोखाधड़ी के दो मामले सामने आए हैं। इन दोनों मामलों में कुल 53 लाख 83 हजार 822 रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी मिली है।

जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन में करीब 70 सिम एक्टिवेट होने की जानकारी भी मिली है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इनमें से कितने भारतीय मोबाइल नंबरों के व्हाट्सऐप अकाउंट विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए थे।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन मोबाइल नंबरों के जरिए कितनी अन्य वारदातों को अंजाम दिया गया। मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ इस गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों और अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों की जानकारी सामने आ सकती है।

इस संबंध में थाना साइबर क्राइम मुजफ्फरनगर में मुकदमा अपराध संख्या 39/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) और 111 बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है।

कार्रवाई करने वाली टीम में साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह, उपनिरीक्षक जय शर्मा, उपनिरीक्षक मुबारिक हसन तथा हेड कांस्टेबल बालकिशन, आकाश चौधरी और सुनील कुमार शामिल रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुजफ्फरनगर साइबर ठगी मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए?

मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों पर क्या आरोप है?

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी लोगों के नाम पर सिम कार्ड निकलवाकर उन्हें एक्टिवेट करते थे और WhatsApp का OTP विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को भेजते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान क्या है?

आरोपियों की पहचान मोनू पुत्र मेहर इलाही और कबीर पुत्र मुकीम के रूप में हुई है। दोनों मुजफ्फरनगर के ग्राम हरसौली के रहने वाले हैं।

इस मामले में कितने रुपये की साइबर ठगी सामने आई है?

झारखंड और पश्चिम बंगाल से जुड़े दो मामलों में कुल 53 लाख 83 हजार 822 रुपये की साइबर ठगी की जानकारी मिली है।

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