मेरठ में शुरू हुआ दस दिवसीय उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव
मेरठ में 10 दिवसीय उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव शुरू हुआ। प्रदर्शनी में खादी, बनारसी रेशम, हस्तशिल्प, पीतल और देशी उत्पाद मौजूद हैं।
उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव मेरठ में शुरू
राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी और दूसरे जनप्रतिनिधियों ने शनिवार (October 18, 2026) को मेरठ में खादी महोत्सव और प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का दौरा किया और अलग-अलग राज्यों से इसमें हिस्सा लेने वाले व्यापारियों को सम्मानित किया।
उत्तर प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से आयोजित यह दस दिन की प्रदर्शनी देश के अलग-अलग हिस्सों से पारंपरिक भारतीय उत्पादों, हस्तशिल्प, कपड़ों और देश में बने सामान को एक जगह ला रही है। इसमें खादी के कपड़े, बनारसी रेशम की साड़ियां, गर्म कपड़े, कश्मीरी शॉल, सूखे मेवे, क्रॉकरी और कई दूसरे पारंपरिक सामान शामिल हैं।
अलग-अलग इलाकों के उत्पाद
प्रदर्शनी में आने वाले लोग मुरादाबाद के पीतल के सामान, पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई, बनारस के रेशम के उत्पाद, पिलखुवा की चादरें और सहारनपुर के लकड़ी के हस्तशिल्प देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के अलग-अलग इलाकों से खादी संस्थानों ने भी प्रदर्शनी में अपने स्टॉल लगाए हैं।
इन स्टॉलों पर हाथ से बुने कपड़ों और देश में बने अलग-अलग तरह के उत्पादों की बड़ी रेंज दिखाई जा रही है। इससे यह प्रदर्शनी सिर्फ खादी के कपड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें अलग-अलग इलाकों की खास पहचान भी नजर आती है। इस बड़े कलेक्शन में स्टोल, हस्तशिल्प, हर्बल उत्पाद, घर सजाने का सामान और अलग-अलग इलाकों से जुड़े दूसरे पारंपरिक सामान भी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिशिर सिंह ने कहा कि आने वाले लोग हिस्सा लेने वाले इलाकों और संस्थानों के उत्पाद देख सकते हैं। सिंह ने यह भी कहा कि यह प्रदर्शनी त्योहारों के मौसम में लगाई गई है। ऐसे समय में यहां आने वाले लोगों को दुर्गा पूजा, दशहरा, धनतेरस और दिवाली के लिए काम आने वाले सामान मिल सकते हैं।
“त्योहारों का मौसम चल रहा है। ऐसे में यह प्रदर्शनी दुर्गा पूजा, दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के लिए काम आने वाले कई तरह के सामान उपलब्ध करा रही है। पारंपरिक कपड़ों और घर सजाने के सामान से लेकर हाथ से बनाए गए सजावटी सामान, लकड़ी की कलाकृतियां, पीतल के बर्तन और त्योहारों में इस्तेमाल होने वाली दूसरी जरूरी चीजों तक, प्रदर्शनी लोगों को अलग और स्थानीय स्तर पर बनाए गए सामान खरीदने का मौका देती है। साथ ही, इससे पारंपरिक कारीगरों और छोटे कारोबारियों को मदद मिलती है,” सिंह ने कहा।
गांधी पवेलियन में खादी की विरासत की झलक
प्रदर्शनी के बीचोंबीच गांधी पवेलियन बनाया गया है। इसमें चरखा रखा गया है, जो महात्मा गांधी की विरासत और भारत के आजादी के आंदोलन में खादी की अहमियत को दिखाता है।
यह पवेलियन वहां रखे गए उत्पादों को खादी से जुड़े बड़े सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ के साथ लोगों के सामने रखता है। इस पहल का मकसद खादी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। इसके साथ ही, “Vocal for Local” की सोच के तहत आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और स्थानीय कारीगरों को मदद देना भी इसका लक्ष्य है।
पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने, रोजगार के मौके पैदा करने और ग्रामोद्योग से जुड़े कारोबारियों को बाजार तक पहुंच देने के लिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में खादी प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं। मेरठ की यह प्रदर्शनी भी ग्रामीण कारोबार, हाथ से बुने कपड़ों और अलग-अलग इलाकों की कारीगरी से जुड़े उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का मंच देती है।
इस पहल के बताए गए उद्देश्यों के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों और इलाकों के सामान को एक जगह लाकर यह प्रदर्शनी लोगों को भारत की कारीगरी का उत्सव मनाने का मौका देती है। इसके साथ ही, इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में भी योगदान मिलता है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव कहां शुरू हुआ?
उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव मेरठ में शुरू हुआ है।
यह खादी महोत्सव कितने दिनों तक चलेगा?
यह प्रदर्शनी दस दिनों तक चलेगी।
प्रदर्शनी में कौन-कौन से सामान मिलेंगे?
यहां खादी के कपड़े, बनारसी रेशम की साड़ियां, गर्म कपड़े, कश्मीरी शॉल, सूखे मेवे, क्रॉकरी, हस्तशिल्प और घर सजाने का सामान मिलेगा।
प्रदर्शनी में अलग-अलग इलाकों के कौन से उत्पाद रखे गए हैं?
यहां मुरादाबाद के पीतल के सामान, पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई, बनारस के रेशम के उत्पाद, पिलखुवा की चादरें और सहारनपुर के लकड़ी के हस्तशिल्प रखे गए हैं।
गांधी पवेलियन में क्या खास है?
गांधी पवेलियन में चरखा रखा गया है, जो महात्मा गांधी की विरासत और आजादी के आंदोलन में खादी की अहमियत को दिखाता है।
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