मेजर ओक: रॉबिन हुड का मशहूर पेड़ अब खत्म हुआ
दुनिया के मशहूर 'रॉबिन हुड ओक ट्री' की कहानी, जो करीब 1000 साल बाद खत्म हुआ: जानिए 'मेजर ओक' के बारे में दिलचस्प बातें ब्रिटेन के शेरवुड फॉरेस्ट के बीचों-बीच खड़ा 'मेजर ओक' देश के सबसे मशहूर
ब्रिटेन के शेरवुड फॉरेस्ट के बीचों-बीच खड़ा 'मेजर ओक' देश के सबसे मशहूर प्राकृतिक स्थलों में से एक था, जो दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर खींचता था। जून 2026 में, संरक्षण विशेषज्ञों ने इस प्राचीन पेड़ के खत्म होने की पुष्टि की, जब लगातार दूसरे साल इसकी शाखाओं पर पत्ते नहीं उगे। इसके साथ ही ब्रिटिश इतिहास का एक अनोखा अध्याय खत्म हो गया।
माना जाता है कि 'मेजर ओक' की उम्र 800 से 1200 साल के बीच थी। कई विशेषज्ञ इसे करीब 1000 साल पुराना मानते हैं, यानी यह पेड़ 1066 में नॉर्मन कॉन्क्वेस्ट के समय के आसपास उगना शुरू हुआ होगा। इसकी विशालता और लंबी उम्र ने इसे इतिहास से जोड़ने वाला एक खजाना बना दिया और नॉटिंघमशायर की विरासत का प्रतीक बना दिया।
इस पेड़ की प्रसिद्धि की जड़ें लोककथाओं में थीं, खासतौर पर मशहूर डाकू रॉबिन हुड से जुड़ी कहानियों में। पीढ़ियों से चली आ रही कहानियों के मुताबिक, रॉबिन हुड और उनके साथी 'मेजर ओक' का इस्तेमाल शेरिफ ऑफ नॉटिंघम से छिपने के लिए करते थे। रॉबिन हुड की बहादुरी, अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई और अमीरों से चोरी करके गरीबों की मदद करने की कहानियों ने इस पेड़ को न्याय और प्रतिरोध का प्रतीक बना दिया। हालांकि इतिहासकारों में रॉबिन हुड के अस्तित्व पर बहस होती है, लेकिन उनकी कहानियों ने 'मेजर ओक' को इंग्लिश लोककथाओं में अमर बना दिया।
'मेजर ओक' को पहले 'कॉकपेन ट्री' के नाम से जाना जाता था, क्योंकि इसके नीचे मुर्गों की लड़ाई होती थी। बाद में इसका नाम 18वीं सदी के पुरातत्वविद और सेना अधिकारी मेजर हैमन रूक के सम्मान में 'मेजर ओक' रखा गया, जिन्होंने इस पेड़ को डॉक्यूमेंट किया और इसे लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया।
यह ब्रिटेन के सबसे बड़े ओक पेड़ों में से एक था। इसकी तने की परिधि करीब 11 मीटर थी और इसकी शाखाएं लगभग 28 मीटर तक फैली थीं। पेड़ की उम्र बढ़ने के साथ इसकी शाखाएं इतनी भारी हो गईं कि इन्हें गिरने से बचाने के लिए लकड़ी और धातु के सपोर्ट लगाए गए, जो इसकी पहचान बन गए।
सदियों तक पर्यटक 'मेजर ओक' के खोखले तने के अंदर जा सकते थे, लेकिन बढ़ते पर्यटन ने इसकी सेहत पर असर डाला। भारी भीड़ के चलते पेड़ के आसपास की मिट्टी सख्त हो गई, जिससे इसकी जड़ों को पानी और ऑक्सीजन मिलने में दिक्कत हुई। 1970 के दशक में अधिकारियों ने पेड़ के चारों ओर बाड़ लगाकर इसे सुरक्षित किया, ताकि लोग इसे दूर से देख सकें।
हालांकि संरक्षण के लिए कई कोशिशें की गईं, लेकिन हीटवेव, सूखा और क्लाइमेट चेंज ने पेड़ की हालत और खराब कर दी। इन पर्यावरणीय चुनौतियों और पर्यटन के असर ने आखिरकार इसे खत्म कर दिया।
'मेजर ओक' हर साल करीब 3.5 लाख पर्यटकों को आकर्षित करता था और यह ब्रिटेन के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पेड़ों में से एक था। 2014 में वुडलैंड ट्रस्ट ने इसे 'ट्री ऑफ द ईयर' का खिताब दिया, जिससे इसकी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व को मान्यता मिली। शेरवुड फॉरेस्ट की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती थी, जब तक लोग इस ऐतिहासिक पेड़ को देख न लें।
हालांकि अब यह पेड़ खत्म हो गया है, लेकिन इसकी विरासत जीवित है। 'मेजर ओक' के बीज और कटिंग्स से उगाए गए पौधे ब्रिटेन और अन्य जगहों पर लगाए गए हैं, ताकि इसकी कहानी आगे बढ़ती रहे। खुद पेड़ को खड़ा रखा जाएगा, ताकि यह वन्यजीवों के लिए घर बना रहे और अपनी शानदार इतिहास की याद दिलाता रहे। लाखों लोगों के लिए 'मेजर ओक' हमेशा रॉबिन हुड की कहानी और शेरवुड फॉरेस्ट के जादू से जुड़ा रहेगा।
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