मध्यप्रदेश का 4500 करोड़ नया कर्ज, कुल ऋण 5.33 लाख करोड़ पार
मध्यप्रदेश में विकास परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से 4500 करोड़ रुपये का नया बाजार ऋण लिया है।
मध्यप्रदेश में विकास परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से 4500 करोड़ रुपये का नया बाजार ऋण लिया है। इस नए कर्ज के साथ प्रदेश पर कुल ऋण का बोझ 5.33 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। सरकार के मुताबिक, नए ऋण से मिलने वाली रकम सड़क, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई, बिजली और दूसरी पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
राज्य सरकार विकास कार्यों के लिए सरकारी संसाधनों के साथ-साथ बाजार से भी कर्ज ले रही है। सरकार का कहना है कि अधोसंरचना निर्माण पर निवेश बढ़ाने की रणनीति के तहत यह ऋण लिया गया है। इसका इस्तेमाल ऐसी परियोजनाओं में किया जाना है, जिनसे सड़क और परिवहन व्यवस्था, सिंचाई सुविधाओं, बिजली की अधोसंरचना और शहरी सुविधाओं का विस्तार हो सके।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में बाजार से कर्ज लेने की प्रक्रिया लगातार जारी है। 19 अक्टूबर को सरकार ने तीन अलग-अलग हिस्सों में 4500 करोड़ रुपये का ऋण लिया। इस राशि को मिलाकर चालू वित्त वर्ष में अब तक करीब 45 हजार करोड़ रुपये का बाजार ऋण लिया जा चुका है। यानी नए ऋण के साथ इस वित्तीय वर्ष में बाजार से जुटाई गई कुल रकम करीब 45 हजार करोड़ रुपये हो गई है।
वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, दिसंबर तक मध्यप्रदेश के लिए 58,274 करोड़ रुपये की बाजार ऋण सीमा स्वीकृत है। इसके अलावा, सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी के अनुपात में पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान प्रदेश को लगभग 87 हजार करोड़ रुपये तक कर्ज लेने की गुंजाइश बताई गई है। हालांकि, वास्तविक उधारी निर्धारित वित्तीय सीमाओं और लागू नियमों के अधीन रहेगी। इसका मतलब है कि सरकार को आगे भी ऋण लेने के लिए तय वित्तीय प्रावधानों और नियमों का पालन करना होगा।
राज्य सरकार का कहना है कि बाजार से लिए जाने वाले ऋण का मुख्य इस्तेमाल पूंजीगत कार्यों में किया जाता है। इनमें सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार, बिजली अधोसंरचना का विकास, सड़क निर्माण, एक्सप्रेस-वे, पुल और शहरी सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए सरकार मौजूदा सुविधाओं को बढ़ाने और नई अधोसंरचना तैयार करने पर जोर दे रही है।
सरकार की रणनीति बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाकर आर्थिक गतिविधियों को गति देने की है। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, परिवहन सुविधाओं में सुधार और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की भी उम्मीद जताई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश का पूंजीगत व्यय एक लाख करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है। इस अनुमान के बीच सड़क, सिंचाई, ऊर्जा और दूसरी परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाने की योजना है।
मध्यप्रदेश में पिछले दो दशकों से सड़क, पुल, सिंचाई, ऊर्जा और शहरी अधोसंरचना के विस्तार पर निवेश किया गया है। अब राज्य सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नई परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दे रही है। विकास कार्यों के लिए लिया जा रहा नया ऋण इसी निवेश प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालांकि, बढ़ते कर्ज के साथ सरकार के सामने निवेश से होने वाले आर्थिक लाभ और सरकारी राजस्व में वृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। प्रदेश पर 5.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल ऋण है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में बड़े पूंजीगत व्यय का अनुमान है। ऐसे में सरकार को विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखने के साथ वित्तीय अनुशासन पर भी ध्यान देना होगा।
कर्ज लेने के साथ पुराने ऋण की अदायगी की जिम्मेदारी भी सरकार के सामने है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश ने 29,980 करोड़ रुपये के ऋण का पुनर्भुगतान किया। वहीं, अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक 12,073 करोड़ रुपये चुकाए जा चुके थे। ये भुगतान राज्य सरकार की पुरानी देनदारियों से जुड़े हैं।
वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश अब तक ऋण और ब्याज का भुगतान निर्धारित समयसीमा में करता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर भुगतान से वित्तीय संस्थानों के बीच राज्य की साख बनाए रखने में मदद मिली है। सरकार के लिए आगे भी ऋण और ब्याज का भुगतान समय पर करना महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि नए बाजार ऋण के साथ भविष्य की देनदारियां भी बढ़ेंगी।
बुनियादी ढांचे पर निवेश को आर्थिक विकास के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज के साथ ब्याज भुगतान और भविष्य की देनदारियों का प्रबंधन भी अहम है। 5.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कुल ऋण और एक लाख करोड़ रुपये के पार जाने वाले अनुमानित पूंजीगत व्यय के बीच सरकार के सामने विकास और वित्तीय संतुलन, दोनों को साथ लेकर चलने की चुनौती रहेगी।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नए ऋण से तैयार होने वाली परिसंपत्तियां प्रदेश की उत्पादकता, रोजगार और राजस्व में कितना योगदान देती हैं। सरकार का जोर विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर है, जबकि कर्ज की अदायगी, ब्याज भुगतान और निर्धारित वित्तीय सीमाओं के पालन के जरिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्यप्रदेश सरकार ने कितना नया कर्ज लिया है?
राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से 4500 करोड़ रुपये का नया बाजार ऋण लिया है।
नए कर्ज के बाद मध्यप्रदेश पर कुल ऋण कितना हो गया है?
नए कर्ज के बाद प्रदेश पर कुल ऋण 5.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
नए कर्ज की रकम किन कामों पर खर्च की जाएगी?
यह रकम सड़क, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई, बिजली, पुल और शहरी सुविधाओं जैसी पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
चालू वित्त वर्ष में मध्यप्रदेश ने अब तक कितना बाजार ऋण लिया है?
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक करीब 45 हजार करोड़ रुपये का बाजार ऋण लिया जा चुका है।
सरकार के मुताबिक कर्ज लेने से क्या फायदा होने की उम्मीद है?
सरकार को उम्मीद है कि बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार बढ़ेंगे, परिवहन सुविधाओं में सुधार होगा और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
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