हाथरस में विधिक साक्षरता क्लबों के 37 नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू
हाथरस में विधिक साक्षरता क्लब के नोडल शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है।
हाथरस में विधिक साक्षरता क्लब के नोडल शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया जा रहा है। जनपद न्यायाधीश विनय कुमार तृतीय के आदेशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की ओर से इसका आयोजन जनपद न्यायालय के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में किया गया।
कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनु चौधरी की उपस्थिति में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे विधिक साक्षरता क्लबों को अधिक प्रभावी, सक्रिय और उद्देश्यपूर्ण बनाना है। प्रशिक्षण के जरिए विद्यालयों में कानून और संविधान से जुड़ी जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिन पहले चरण में 37 विद्यालयों के शिक्षक-प्रभारियों को नोडल शिक्षक के रूप में नामित किया गया और उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। ये नोडल शिक्षक अपने विद्यालयों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे। इनके माध्यम से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को संविधान, कानून, मौलिक अधिकारों, नागरिक कर्तव्यों और विधिक सहायता से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण के पहले सत्र में संविधान और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चंद्रा, सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी द्वितीय अरिजीत सिंह तथा सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी प्रथम रोबिन कुमार ने शिक्षकों को संविधान निर्माण और संविधान निर्माताओं के योगदान के बारे में जानकारी दी।
इस सत्र में संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, संवैधानिक उपचार, राज्य के नीति निदेशक तत्वों और मौलिक कर्तव्यों को समझाया गया। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि संविधान सभा ने दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन के अथक परिश्रम के बाद देश को संविधान प्रदान किया।
संविधान की प्रस्तावना को इसकी आत्मा बताते हुए न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि इसमें भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने का संकल्प निहित है। प्रस्तावना में नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
शिक्षकों को छह मौलिक अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार और संवैधानिक उपचार का अधिकार शामिल हैं। प्रशिक्षण में इन अधिकारों के महत्व और नागरिकों के जीवन में उनकी भूमिका को समझाया गया।
अनुच्छेद 32 और 226 के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा हुई। शिक्षकों को बताया गया कि मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में नागरिक सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की शरण ले सकते हैं। न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण और परमादेश जैसी रिट जारी कर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।
प्रथम सत्र में राज्य के नीति निदेशक तत्वों और संविधान के अनुच्छेद 51ए के अंतर्गत नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्यों की जानकारी भी दी गई। शिक्षकों को बताया गया कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन करना भी जरूरी है। देश की एकता और अखंडता की रक्षा करना तथा सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका को समझाया गया। चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ऋतुराज सिंह और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल आशुतोष गौतम ने इस सत्र में शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों की जानकारी दी।
इस दौरान पॉक्सो अधिनियम, बाल विवाह निषेध कानून और बाल श्रम उन्मूलन से संबंधित प्रावधानों के बारे में बताया गया। शिक्षकों को इन कानूनों के प्रति जागरूक रहने और विद्यार्थियों को भी इनके बारे में जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी विद्यालय स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।
तीसरे सत्र में निःशुल्क विधिक सहायता की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। मध्यस्थ अधिवक्ता रमेश चंद्र वर्मा और संदीप वर्मा ने शिक्षकों को बताया कि संविधान का अनुच्छेद 39ए सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने पर जोर देता है।
उन्होंने बताया कि आर्थिक या अन्य अक्षमता के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे, इसके लिए पात्र व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस सहायता का उद्देश्य पात्र लोगों को कानूनी प्रक्रिया में मदद देना है, ताकि वे अपनी विधिक जरूरतों के लिए सहायता प्राप्त कर सकें।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि पात्र महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों तथा अन्य निर्धारित श्रेणियों के व्यक्तियों को नियमानुसार निःशुल्क अधिवक्ता सहित कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। शिक्षकों को इस व्यवस्था की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए कहा गया।
सत्र के दौरान लोक अदालत की कार्यप्रणाली और उसके फायदों के बारे में भी बताया गया। लोक अदालत को सुलभ और त्वरित न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा गया कि यहां आपसी सहमति और समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण किया जाता है।
शिक्षकों को बताया गया कि लोक अदालत के निर्णय अंतिम होते हैं और उनके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता। लोक अदालत के जरिए मामलों का निस्तारण होने पर समय और धन की बचत होती है। नियमानुसार कोर्ट फीस वापस मिलने की सुविधा भी मिल सकती है।
लंबित दीवानी, पारिवारिक और समझौता योग्य आपराधिक मामलों के निस्तारण में लोक अदालत की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई। प्रशिक्षण के जरिए नोडल शिक्षकों को यह जानकारी दी गई कि वे लोक अदालत और निःशुल्क कानूनी सहायता से जुड़ी जरूरी जानकारी विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझा सकें।
कार्यक्रम के दौरान नोडल शिक्षकों को राष्ट्रीय विधिक सहायता टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि इस नंबर के माध्यम से लोग निःशुल्क कानूनी सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। लोग अपनी विधिक सहायता संबंधी जरूरतों के लिए संबंधित प्राधिकरण से भी संपर्क कर सकते हैं।
शिक्षकों से अपील की गई कि वे हेल्पलाइन नंबर 15100 और कानूनी जागरूकता से जुड़ी जानकारी विद्यार्थियों तक जरूर पहुंचाएं। इससे विद्यार्थी अपने परिवार और समाज के लोगों को भी कानून के प्रति जागरूक कर सकेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यालयों में विधिक जागरूकता को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाथरस में नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण क्यों शुरू किया गया?
विधिक साक्षरता क्लबों को अधिक प्रभावी, सक्रिय और उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए यह दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है।
प्रशिक्षण के पहले चरण में कितने शिक्षकों को नोडल शिक्षक बनाया गया?
पहले चरण में 37 विद्यालयों के शिक्षक-प्रभारियों को नोडल शिक्षक बनाया गया और उन्हें प्रशिक्षण दिया गया।
नोडल शिक्षक विद्यार्थियों को किन विषयों की जानकारी देंगे?
नोडल शिक्षक कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को संविधान, कानून, मौलिक अधिकारों, नागरिक कर्तव्यों और विधिक सहायता की जानकारी देंगे।
प्रशिक्षण में किन मौलिक अधिकारों के बारे में बताया गया?
प्रशिक्षण में समानता, स्वतंत्रता, शोषण के खिलाफ अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार और संवैधानिक उपचार के अधिकार के बारे में बताया गया।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर नागरिक कहां जा सकते हैं?
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर नागरिक सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की शरण ले सकते हैं।
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