सिंधिया दूसरी बार गैरहाजिर, नरोत्तम मिश्रा कोर ग्रुप का न्योता नहीं
भोपाल में मध्यप्रदेश भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक के दौरान दो बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है।
भोपाल में मध्यप्रदेश भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक के दौरान दो बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार दूसरी बार कोर ग्रुप की बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को इस बार बैठक में बुलाया ही नहीं गया। नरोत्तम मिश्रा को न्योता नहीं भेजे जाने से उनके कोर ग्रुप में बने रहने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
हालांकि, भाजपा संगठन ने न तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा कोर ग्रुप से बाहर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा की है और न ही इस मामले में कोई औपचारिक स्पष्टीकरण दिया है। इसलिए फिलहाल यह साफ नहीं है कि उन्हें बैठक में आमंत्रित नहीं किए जाने का मतलब संगठन में किसी बदलाव से है या यह केवल इस बैठक तक सीमित मामला है।
सूत्रों के मुताबिक, नरोत्तम मिश्रा कोर ग्रुप की बैठक में बुलाने के मुद्दे पर प्रदेश संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा की थी। दावा है कि केंद्रीय नेतृत्व की ओर से सहमति नहीं मिलने के बाद उन्हें बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। यदि यह जानकारी सही है, तो इससे प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू हो सकती है।
नरोत्तम मिश्रा को लेकर चर्चा इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि 1 अक्टूबर को हुई पिछली कोर ग्रुप की बैठक में भी वह शामिल नहीं हुए थे। उस समय नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, “उन्हें बैठक की जानकारी ही नहीं थी।” पिछली बैठक में शामिल नहीं होने की वजह उन्होंने बैठक की जानकारी नहीं होने को बताया था। लेकिन इस बार उन्हें न्योता ही नहीं भेजे जाने की बात सामने आने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
अब पार्टी के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि क्या नरोत्तम मिश्रा को बैठक में नहीं बुलाया जाना सिर्फ आमंत्रण से जुड़ा मामला है, या भाजपा संगठन में उनकी भूमिका और दायरे को लेकर कोई बदलाव होने जा रहा है। संगठन की ओर से अभी तक इस सवाल पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा के कोर ग्रुप में बने रहने को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की लगातार दूसरी गैरमौजूदगी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। संगठन से जुड़े सूत्रों ने उनकी अनुपस्थिति की वजह दिल्ली में व्यस्तता बताई है। हालांकि, सिंधिया की गैरमौजूदगी को किसी मतभेद या नाराजगी से जोड़ने वाली कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा की प्रदेश राजनीति में ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. नरोत्तम मिश्रा दोनों की अपनी अलग पहचान रही है। ऐसे में एक बड़े नेता का लगातार दूसरी बार बैठक में शामिल नहीं होना और दूसरे बड़े नेता को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया जाना, दोनों घटनाक्रमों ने कोर ग्रुप की बैठक को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी है। पार्टी के भीतर इन दोनों घटनाओं को अलग-अलग तरीके से देखा जा रहा है, लेकिन किसी राजनीतिक खींचतान या संगठनात्मक बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, सह प्रभारी रेखा शर्मा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
इसके अलावा सांसद वीडी शर्मा, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राकेश सिंह, संपतिया उइके, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, सांसद लता वानखेड़े और अन्य पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में संगठन से जुड़े मुद्दों के साथ सरकार के कामकाज और आने वाले कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई।
कोर ग्रुप की बैठक में सरकार के तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियों पर मंथन किया गया। इसके साथ ही मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कार्यों को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इस प्रस्ताव के जरिए मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कामकाज को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने की बात कही गई।
बैठक में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रदेशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ मध्यप्रदेश तक पहुंचाने के लिए प्रभावी समन्वय पर जोर दिया गया। पार्टी और सरकार से जुड़े नेताओं ने योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर आपसी तालमेल पर भी मंथन किया।
केंद्र सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बैठक में एक कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत मुख्यमंत्री के निर्देशन में राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों के मंत्रियों के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित करने की बात सामने आई। इन टीमों का उद्देश्य केंद्र सरकार की योजनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना और उनके क्रियान्वयन में तेजी लाना है।
बैठक में केंद्र सरकार के प्रत्येक मंत्रालय के साथ एक-एक सांसद को जोड़ने की योजना पर भी विचार किया गया। इस व्यवस्था के जरिए राज्य के मंत्री, सांसद और अधिकारी आपसी समन्वय के साथ केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने पर काम करेंगे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि योजनाओं का लाभ मध्यप्रदेश तक पहुंचाने के लिए संबंधित स्तरों के बीच समन्वय बेहतर होना चाहिए।
कोर ग्रुप की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री के पिता को लेकर दिए गए बयान के विरोध में निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। भाजपा ने इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया। बैठक के राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों के साथ इस प्रस्ताव को भी चर्चा का हिस्सा बनाया गया।
बैठक खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आमंत्रित नहीं किए जाने और ज्योतिरादित्य सिंधिया की गैरमौजूदगी को लेकर रही। एक ओर नरोत्तम मिश्रा को बैठक में बुलाने के मामले में केंद्रीय नेतृत्व की कथित असहमति की चर्चा है। दूसरी ओर, सिंधिया की अनुपस्थिति की वजह दिल्ली में व्यस्तता बताई गई है।
फिलहाल भाजपा संगठन ने नरोत्तम मिश्रा कोर ग्रुप से बाहर किए जाने की पुष्टि नहीं की है। सिंधिया की अनुपस्थिति को लेकर भी किसी मतभेद या नाराजगी की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इन दोनों घटनाक्रमों को लेकर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मध्यप्रदेश भाजपा का प्रदेश संगठन नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को लेकर कोई औपचारिक स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं। फिलहाल, कोर ग्रुप की बैठक में सिंधिया की लगातार दूसरी गैरमौजूदगी और नरोत्तम मिश्रा को न्योता नहीं दिए जाने से प्रदेश भाजपा के अंदरूनी समीकरणों पर बहस तेज हो गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्योतिरादित्य सिंधिया कोर ग्रुप की बैठक में क्यों नहीं पहुंचे?
संगठन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सिंधिया दिल्ली में व्यस्त थे। उनकी गैरमौजूदगी को किसी मतभेद या नाराजगी से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नरोत्तम मिश्रा को बैठक में क्यों नहीं बुलाया गया?
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा की थी और सहमति नहीं मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा को न्योता नहीं भेजा गया। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या नरोत्तम मिश्रा को भाजपा के कोर ग्रुप से बाहर कर दिया गया है?
भाजपा संगठन ने उन्हें कोर ग्रुप से बाहर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए अभी यह साफ नहीं है कि मामला सिर्फ इस बैठक तक सीमित है या संगठन में कोई बदलाव होगा।
सिंधिया और नरोत्तम मिश्रा को लेकर चर्चा क्यों बढ़ी?
सिंधिया लगातार दूसरी बार बैठक में शामिल नहीं हुए, जबकि नरोत्तम मिश्रा को इस बार न्योता ही नहीं मिला। हालांकि, किसी राजनीतिक खींचतान या संगठनात्मक बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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