काशी के लखी मेले में सावन में उमड़ी भीड़, ट्रैफिक जाम
काशी के दुर्गाकुंड इलाके में लगने वाले मशहूर लखी मेले में सावन के महीने में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। सावन के आखिरी सोमवार से पहले हजारों श्रद्धालु और पर्यटक मेले में पहुंचे और खूब मजे किए।
काशी के दुर्गाकुंड इलाके में लगने वाले मशहूर लखी मेले में सावन के महीने में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। सावन के आखिरी सोमवार से पहले हजारों श्रद्धालु और पर्यटक मेले में पहुंचे और खूब मजे किए। शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी तादाद में लोग मेले में आए, जिससे पूरे इलाके में जबरदस्त उत्साह का माहौल रहा।
भारी भीड़ की वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ और जाम की स्थिति भी बनी। हालांकि स्थानीय प्रशासन और काशी के लोगों के सहयोग से ट्रैफिक को जल्दी ही ठीक कर दिया गया। अधिकारियों ने भीड़ को संभालने के लिए खास इंतजाम किए थे।
रक्षाबंधन और पूर्णिमा तक चलने वाले इस पारंपरिक लखी मेले में हर साल झूले, मनोरंजन के साधन और तरह-तरह की दुकानें लोगों को अपनी तरफ खींचती हैं। खासतौर पर बच्चों और युवाओं में झूलों को लेकर काफी उत्साह देखने को मिलता है। परिवार के साथ आए लोगों ने मेले में खाने-पीने का भी खूब मजा लिया।
सावन के पावन मौके पर आयोजित यह मेला काशी की सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। सावन के इस खास मौके पर मेले में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि काशी का लखी मेला लोगों की आस्था, मनोरंजन और सांस्कृतिक विरासत का एक अहम केंद्र है। यह मेला काशी की पहचान का हिस्सा बन चुका है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काशी के लखी मेले में इस बार सावन में कितनी भीड़ उमड़ी?
सावन के आखिरी सोमवार से पहले हजारों श्रद्धालु और पर्यटक मेले में पहुंचे। शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी तादाद में लोग आए, जिससे पूरे इलाके में जबरदस्त उत्साह का माहौल रहा।
भारी भीड़ की वजह से क्या-क्या परेशानी आई?
भारी भीड़ की वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ और जाम की स्थिति भी बनी। हालांकि स्थानीय प्रशासन और काशी के लोगों के सहयोग से ट्रैफिक को जल्दी ही ठीक कर दिया गया।
लखी मेले में आने वाले लोगों को क्या-क्या आकर्षण मिलते हैं?
इस परंपरागत मेले में झूले, मनोरंजन के साधन और तरह-तरह की दुकानें लोगों को अपनी तरफ खींचती हैं। खासतौर पर बच्चों और युवाओं में झूलों को लेकर काफी उत्साह देखने को मिलता है।
लखी मेला साल में कब-कब लगता है?
यह मेला रक्षाबंधन और पूर्णिमा तक चलता है और यह काशी की सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है।
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