दिल्ली में गुरु रविदास को श्रद्धांजलि, काशी की पावन माटी का कलश लाया गया
आज दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'समरसता संकल्प अभियान' का आयोजन हुआ, जिसमें संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को श्रद्धांजलि दी गई।
आज दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'समरसता संकल्प अभियान' का आयोजन हुआ, जिसमें संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और गुरु रविदास जी के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
खास बात यह रही कि इस मौके पर गुरु रविदास जी की जन्मस्थली काशी से पावन माटी के कलश लाए गए। इन कलशों का वंदन किया गया और उनका वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इसे एक खास और पवित्र अवसर बताया।
गुरु रविदास जी को समाज में समानता और भाईचारे का संदेश देने वाले महान संत के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने अपने जीवन और वाणी के जरिए समाज में सद्भाव और एकता का संदेश फैलाया। उनकी शिक्षाएं आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
समरसता संकल्प अभियान का मकसद समाज में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को आगे बढ़ाना है। इस तरह के कार्यक्रम समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
तालकटोरा स्टेडियम में हुआ यह आयोजन काफी भव्य रहा। काशी की पावन माटी का कलश लाने से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। श्रद्धालुओं ने बड़ी आस्था के साथ इस धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली में तालकटोरा स्टेडियम में क्या कार्यक्रम आयोजित हुआ?
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'समरसता संकल्प अभियान' का आयोजन किया गया, जिसमें संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को श्रद्धांजलि दी गई और बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम में काशी की पावन माटी का क्या महत्व था?
गुरु रविदास जी की जन्मस्थली काशी से पावन माटी के कलश लाए गए थे। इन कलशों का वंदन किया गया और उनका वितरण भी किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा बढ़ गई।
समरसता संकल्प अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का मकसद समाज में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को आगे बढ़ाना है, जो समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करता है।
गुरु रविदास जी किस बात के लिए जाने जाते हैं?
गुरु रविदास जी को समाज में समानता और भाईचारे का संदेश देने वाले महान संत के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने अपनी शिक्षाओं के जरिए समाज में सद्भाव और एकता का संदेश फैलाया।
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