केरल में 'काफिर स्क्रीनशॉट' केस की जांच तेज, SIT सक्रिय
Discover the details of the controversial 'Kafir Screenshot' case in Kerala, raising political and legal questions ahead of the 2024 elections.
केरल में ‘काफिर स्क्रीनशॉट’ केस क्या है?
अब तक की कहानी
केरल पुलिस की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कोझिकोड के वडकरा विधानसभा क्षेत्र में एक विवादित WhatsApp स्क्रीनशॉट के निर्माण और इसे फैलाने की जांच कर रही है। ये मामला 26 अप्रैल 2024 को होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सामने आया। इस स्क्रीनशॉट ने धार्मिक आधार पर वोट मांगने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी है।
मामला क्या है?
ये स्क्रीनशॉट कथित तौर पर ‘यूथ लीग नेदुंब्रमन्ना’ नाम के WhatsApp ग्रुप में पोस्ट किया गया था। इसे मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF), जो इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की छात्र इकाई है, के जिला सचिव पी.के. मोहम्मद खासिम का बताया गया। स्क्रीनशॉट में UDF उम्मीदवार शफी परंबिल को "दीनदार युवा" बताया गया और वोटर्स से पूछा गया कि उन्हें शफी को वोट देना चाहिए या "काफिर महिला" को। LDF की उम्मीदवार CPI(M) की वरिष्ठ नेता के.के. शैलजा थीं।
शिकायतें और शुरुआती घटनाक्रम
मामला तब शुरू हुआ जब LDF चुनाव प्रचार समिति के सदस्य सी. भास्करन ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और जांच की मांग की। मोहम्मद खासिम ने इन आरोपों को खारिज किया, अपना मोबाइल पुलिस को सौंपा और दावा किया कि ऐसा कोई WhatsApp ग्रुप मौजूद ही नहीं है। पुलिस ने दो केस दर्ज किए—एक खासिम के खिलाफ धार्मिक आधार पर दुश्मनी फैलाने के आरोप में और दूसरा "अनजान व्यक्तियों" के खिलाफ मामूली आरोपों में।
पुलिस जांच और निष्कर्ष
पुलिस जांच में खासिम के खिलाफ स्क्रीनशॉट बनाने या फैलाने का कोई सबूत नहीं मिला। लेकिन ये पता नहीं चल सका कि इसे बनाया किसने। खासिम ने इसके बाद केरल हाई कोर्ट का रुख किया और कोर्ट-मॉनिटर जांच की मांग की। हाई कोर्ट ने उन्हें स्थानीय मजिस्ट्रेट या पुलिस के पास जाने को कहा। जब जांच में कोई प्रगति नहीं हुई, तो खासिम ने वडकरा कोर्ट में फिर से अपील की, जिसने पुलिस को प्रोग्रेस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
पुलिस ने जांच में पाया कि स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर सबसे पहले रिबेश रामकृष्णन, जो पहले DYFI के नेता थे, ने शेयर किया था। इसके बाद इसे लेफ्ट समर्थक सोशल मीडिया ग्रुप्स के अन्य एडमिन्स ने फैलाया। हालांकि, पुलिस स्क्रीनशॉट के असली स्रोत का पता लगाने में असफल रही और Meta (Facebook की पैरेंट कंपनी) पर कंटेंट हटाने में सहयोग न करने का आरोप लगाया। मामला बिना किसी ठोस नतीजे के बंद कर दिया गया।
मामले का फिर से उठना
मई में UDF केरल में सत्ता में आने के बाद मामला फिर से चर्चा में आया। IUML नेता परक्कल अब्दुल्ला, जो कुट्टियाडी से नए विधायक चुने गए और शफी परंबिल की चुनाव प्रचार टीम का हिस्सा थे, ने गृह मंत्री रमेश चेन्निथला से व्यापक जांच की मांग की। सरकार ने कोझिकोड ग्रामीण के डिप्टी एसपी टी. मनोहरन के नेतृत्व में आठ सदस्यीय SIT गठित की।
पुनः जांच में प्रगति
SIT ने अन्य WhatsApp ग्रुप्स जैसे ‘कदथनाडु सखक्कल’ और ‘बवुप्पारा सखक्कल’ की जांच शुरू की। ये सुराग ‘वडकरा स्क्वाड’ ग्रुप के एडमिन्स से पूछताछ के दौरान मिले। जिथिन भास्करन, जो DYFI के वडकरा ब्लॉक समिति के सदस्य और ‘वडकरा स्क्वाड’ ग्रुप के एडमिन हैं, को 16 जून को गिरफ्तार किया गया। उन पर विवादित स्क्रीनशॉट को ग्रुप में शेयर करने और इसे 200 से ज्यादा लोगों तक फैलाने का आरोप है। भास्करन का फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
राजनीतिक आरोप और असर
UDF ने आरोप लगाया कि स्क्रीनशॉट जिले के एक वरिष्ठ CPI(M) नेता के निर्देश पर बनाया गया हो सकता है। CPI(M) के कुछ नेताओं ने इसे अपने सोशल मीडिया पेज पर शेयर किया था, लेकिन बाद में पोस्ट डिलीट कर दिए। वहीं, DYFI नेताओं ने SIT पर उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। पुलिस अभी तक ये तय नहीं कर पाई है कि स्क्रीनशॉट भास्करन ने बनाया था या नहीं। CPI(M) नेता के.के. शैलजा ने कहा कि जांच जारी रह सकती है।
मामला अभी भी जांच के अधीन है और इसमें राजनीतिक और साम्प्रदायिक तनाव जुड़ गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केरल में 'काफिर स्क्रीनशॉट' केस क्या है?
यह मामला एक विवादित WhatsApp स्क्रीनशॉट के निर्माण और फैलाने से संबंधित है, जिसमें धार्मिक आधार पर वोट मांगने का आरोप लगाया गया है।
इस मामले में SIT का गठन क्यों किया गया?
SIT का गठन UDF के सत्ता में आने के बाद व्यापक जांच की मांग के कारण किया गया, ताकि मामले की पुनः जांच की जा सके।
स्क्रीनशॉट को सबसे पहले किसने शेयर किया?
पुलिस जांच में पाया गया कि स्क्रीनशॉट को सबसे पहले रिबेश रामकृष्णन ने शेयर किया था।
क्या पुलिस ने मामले में कोई ठोस सबूत पाया?
पुलिस ने खासिम के खिलाफ स्क्रीनशॉट बनाने या फैलाने का कोई सबूत नहीं पाया, और असली स्रोत का पता लगाने में भी असफल रही।
इस मामले में गिरफ्तारी कब हुई?
जिथिन भास्करन, जो DYFI के वडकरा ब्लॉक समिति के सदस्य हैं, को 16 जून को गिरफ्तार किया गया।
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