महंगी पेटेंट दवाओं पर केंद्र करे दखल, केरल हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि महंगी पेटेंट दवाओं की कीमतों पर केंद्र सरकार को दखल देना चाहिए, ताकि कमजोर मरीजों को आसानी से इलाज मिल सके।
जब पेटेंट वाली दवाएं बहुत ज्यादा कीमत पर बेची जाएं, तो केंद्र को दखल देना चाहिए: केरल हाई कोर्ट
केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि जब कीमतों की वजह से लोगों की पहुंच को लेकर चिंता पैदा होती है, तब केंद्र सरकार किसी दवा के पेटेंट का इस्तेमाल करके उस दवा को गैर-कारोबारी आधार पर आम लोगों के लिए बना और बेच सकती है। इसमें कमजोर तबके के मरीज भी शामिल हैं।
जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने सोमवार (September 28, 2026) को कहा कि जिन मामलों में किसी पेटेंट के आधार पर बनाई गई दवाएं बहुत ज्यादा कीमत पर बेची जाती हैं, उनमें केंद्र को Patents Act, 1970 के संबंधित प्रावधानों को लागू करना चाहिए।
कोर्ट ने पेटेंट के जनहित में इस्तेमाल की ओर इशारा किया
कोर्ट ने कहा कि सरकार को डेटा इकट्ठा करना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि कोई खास दवा किफायती है या नहीं।
कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत हो, तो सरकार को जनहित में पेटेंट का इस्तेमाल करना चाहिए और पेटेंट धारक को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा, “सरकार को नागरिकों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होती हैं, ताकि हेल्थकेयर तक पहुंच पक्की हो सके, जिसमें जीवन बचाने वाले इलाज तक पहुंच भी शामिल है, जैसा कि इस मामले में है।”
यह फैसला ब्रेस्ट कैंसर की एक मरीज की ओर से दायर याचिका पर आया।
उनकी बीमारी के लिए उन्हें Ribociclib लिखी गई थी, और उस समय यह दवा उनके लिए करीब ₹75,000 प्रति महीने पड़ती थी।
याचिका में सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह Ribociclib के पेटेंट को अपने हाथ में ले और इसे जितनी कम कीमत पर संभव हो, उपलब्ध कराए।
याचिका लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ता की मौत हो गई।
इसके बाद कोर्ट ने बड़े जनहित को देखते हुए इस मामले को आगे लिया।
फार्मास्युटिकल कंपनियों ने याचिका का विरोध किया
फार्मास्युटिकल कंपनियों ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि केंद्र पहले ही Ribociclib के पेटेंट के इस्तेमाल के मामले पर विचार कर चुका है।
उन्होंने कहा कि केंद्र ने ऐसा इस्तेमाल जरूरी नहीं पाया, क्योंकि एक सस्ता विकल्प Palbociclib पहले से ही मार्केट में उपलब्ध था।
यह फैसला अहम है, क्योंकि कोर्ट ने सरकार की हेल्थकेयर से जुड़ी जिम्मेदारियों को जीवन बचाने वाले इलाज तक पहुंच से जोड़ा, खासकर वहां जहां पेटेंट वाली दवाओं की कीमत लोगों की क्षमता से बाहर हो जाती है। साथ ही कोर्ट ने जनहित में दखल के कानूनी रास्ते के तौर पर Patents Act, 1970 की ओर ध्यान दिलाया।
यह रिपोर्ट September 28, 2026 को 12:21 pm IST पर प्रकाशित की गई थी।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केरल हाई कोर्ट ने महंगी पेटेंट दवाओं को लेकर केंद्र सरकार से क्या कहा है?
हाई कोर्ट ने कहा है कि जब कीमतें बहुत ज्यादा होने से दवाएं लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएं, तो केंद्र सरकार को दखल देना चाहिए और Patents Act, 1970 के प्रावधानों का इस्तेमाल करना चाहिए।
यह मामला किस बीमारी की दवा से जुड़ा हुआ है?
यह मामला ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा Ribociclib से जुड़ा है, जिसकी कीमत करीब 75,000 रुपये प्रति महीने थी।
फार्मा कंपनियों ने इस याचिका का विरोध क्यों किया था?
फार्मा कंपनियों का कहना था कि केंद्र सरकार पहले ही इस मामले पर विचार कर चुकी है और उसे इसकी जरूरत नहीं लगी, क्योंकि मार्केट में एक सस्ता विकल्प Palbociclib पहले से उपलब्ध है।
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