केरल में दवाओं के स्टॉक पर जिला स्तर से निगरानी शुरू
केरल के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी रोकने के लिए जिला स्तर की टीमें स्टॉक, सप्लाई और जरूरत की सीधे जांच करेंगी।
नई व्यवस्था का मकसद सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी गंभीर स्थिति बनने से पहले ही उसका पता लगाना है। इसके तहत जिला स्तर की टीमें शिकायतों की जांच करेंगी, दवाओं के स्टॉक का जायजा लेंगी और सुधार के जरूरी कदम सुझाएंगी।
जिला स्तर की टीमें दवाओं की कमी की जांच करेंगी
स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाओं की उपलब्धता बिना रुकावट बनाए रखने के लिए जिला स्तर की निगरानी व्यवस्था तैयार की है।
स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) को हर जिले में जिला स्तर की दवा उपलब्धता निगरानी टीम बनाने का निर्देश दिया है।
ये टीमें दवाओं की कमी से जुड़ी शिकायतों की जांच करेंगी। अस्पतालों में असल स्थिति का जायजा लेंगी। कमी होने से पहले ही सुधार के जरूरी कदम उठाएंगी।
हर टीम के संयोजक अतिरिक्त जिला चिकित्सा अधिकारी (स्वास्थ्य) [डीएमओ] या उप जिला चिकित्सा अधिकारी (स्वास्थ्य) होंगे।
अस्पतालों के अधीक्षक, एक सहायक ड्रग्स कंट्रोलर या ड्रग्स इंस्पेक्टर, फार्मेसी स्टोर के अधीक्षक या फार्मेसी के प्रभारी अधिकारी और केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (केएमएससीएल) के वेयरहाउस मैनेजर इस टीम के सदस्य होंगे।
एक बयान में मुरलीधन ने कहा कि यह व्यवस्था पहले से दवाओं के स्टॉक के स्तर पर नजर रखेगी और कमी गंभीर होने से पहले संभावित कमी का पता लगाएगी।
टीमें अस्पतालों में मौजूद दवाओं के असल स्टॉक, मरीजों की संख्या, दवाओं के इस्तेमाल की दर, आने वाले दिनों और हफ्तों में दवाओं की अनुमानित जरूरत और सप्लाई में हो सकने वाली देरी का आकलन करेंगी।
सिर्फ रिकॉर्ड पर भरोसा करने के बजाय सीधे जांच
जिला स्तर की टीमों को सिर्फ रिकॉर्ड पर भरोसा करने के बजाय अस्पतालों की फार्मेसी और स्टोर में जाकर सीधे जांच करने का निर्देश दिया गया है।
इससे टीमें रिकॉर्ड में दिखाई जा रही स्थिति की तुलना फार्मेसी और स्टोर में वास्तव में मौजूद दवाओं से कर सकेंगी।
रिकॉर्ड में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध होने की जानकारी होने पर भी टीमें यह जांचेंगी कि फार्मेसी में मौजूद स्टॉक पर्याप्त है या नहीं।
टीमें यह भी देखेंगी कि दवाओं की सप्लाई में कोई देरी तो नहीं हो रही है और उपलब्ध स्टॉक कितने समय तक चलने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था का मकसद उस स्थिति में पहले ही चेतावनी देना है, जब रिकॉर्ड में दिखाई जा रही उपलब्धता सप्लाई की असल स्थिति को पूरी तरह नहीं दिखाती हो या मौजूदा स्टॉक आने वाले समय तक चलने की संभावना नहीं हो।
अस्पतालों के बीच दवाओं का बंटवारा संभव
जब किसी अस्पताल में कुछ दवाओं का स्टॉक जरूरत से ज्यादा हो और किसी दूसरे अस्पताल में उन्हीं दवाओं की कमी हो, तब टीमें दोनों अस्पतालों के बीच दवाओं को बांटने की संभावना पर विचार करेंगी।
इससे आपात स्थिति में उपलब्ध दवाओं का ज्यादा बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए केवल नई सप्लाई का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इस तरह की व्यवस्था में स्टॉक की जांच के साथ-साथ उस समय जिला स्तर पर कदम उठाने का विकल्प भी शामिल है, जब अस्पतालों के बीच दवाओं की सप्लाई बराबर तरीके से उपलब्ध नहीं हो।
दवाओं की उपलब्धता और कमी पर हर हफ्ते रिपोर्ट
जिला स्तर की टीमें सीधे की गई जांच के आधार पर हर हफ्ते रिपोर्ट तैयार करेंगी।
जिला जनरल अस्पताल तक के अस्पतालों से जुड़ी रिपोर्ट स्वास्थ्य सेवा निदेशक को भेजी जाएगी।
मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी रिपोर्ट मेडिकल शिक्षा निदेशक को भेजी जाएगी।
हर हफ्ते दी जाने वाली रिपोर्ट में प्रत्येक अस्पताल में उपलब्ध दवाओं और कमी वाली दवाओं की जानकारी शामिल होगी।
इन रिपोर्टों में मरीजों की संख्या के आधार पर दवाओं की जरूरत, आने वाले समय में जरूरी पड़ने वाली दवाओं और किसी भी कमी के कारणों का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा।
रिपोर्ट में केएमएससीएल के जरिए मिलने वाली संभावित दवाओं और अब तक किए जा चुके सुधार के कदमों की जानकारी भी शामिल होगी।
विभाग ने कहा है कि उसका ध्यान कमी सामने आने के बाद उस पर प्रतिक्रिया देने से हटकर पहले ही दवाओं के इस्तेमाल, आगे की जरूरत और सप्लाई में होने वाली देरी का आकलन करने पर है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केरल में दवाओं के स्टॉक पर निगरानी की नई व्यवस्था क्यों शुरू की गई है?
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी गंभीर होने से पहले उसका पता लगाने और जरूरी कदम उठाने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है।
जिला स्तर की टीमें दवाओं के स्टॉक की जांच कैसे करेंगी?
टीमें अस्पतालों की फार्मेसी और स्टोर में जाकर असल स्टॉक की जांच करेंगी और उसे रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी से मिलाएंगी।
अगर एक अस्पताल में दवाएं ज्यादा और दूसरे में कम हों तो क्या होगा?
टीमें दोनों अस्पतालों के बीच दवाओं के बंटवारे की संभावना पर विचार करेंगी, ताकि उपलब्ध स्टॉक का बेहतर इस्तेमाल हो सके।
जिला स्तर की टीमें कितनी बार रिपोर्ट तैयार करेंगी?
टीमें सीधे की गई जांच के आधार पर हर हफ्ते दवाओं की उपलब्धता और कमी पर रिपोर्ट तैयार करेंगी।
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